भारत-स्वीडन एफओसी: नवाचार, सुरक्षा और निवेश पर जोर, 8वें दौर में बनी व्यापक सहमति
नई दिल्ली, 9 अप्रैल (आईएएनएस)। भारत और स्वीडन ने गुरुवार को नई दिल्ली में विदेश कार्यालय परामर्श (एफओसी) का आठवां दौर आयोजित किया। दोनों देशों ने इस बैठक में राजनीतिक जुड़ाव, व्यापार व निवेश, रक्षा एवं सुरक्षा, नवाचार, स्थिरता और लोगों के बीच संबंधों को और मजबूत बनाने के लिए सहयोग बढ़ाने पर पूरी सहमति जताई।
दोनों पक्षों ने आपसी हित के क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर भी चर्चा की। विदेश मंत्रालय (एमईए) में सचिव (पश्चिम) सिबी जॉर्ज और स्वीडन के विदेश मामलों के राज्य सचिव डैग हार्टेलियस ने बैठक की सह-अध्यक्षता की।
एमईए प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने एक्स पोस्ट में कहा, आज नई दिल्ली में 8वीं भारत-स्वीडन विदेश कार्यालय परामर्श (एफओसी) बैठक हुई। सचिव (पश्चिम) सिबी जॉर्ज ने विदेश मामलों के राज्य सचिव डैग हार्टेलियस के साथ एफओसी की सह-अध्यक्षता की। उन्होंने द्विपक्षीय संबंधों के सभी पहलुओं की समीक्षा की और राजनीतिक जुड़ाव, व्यापार और निवेश, रक्षा और सुरक्षा, नवाचार, स्थिरता और पीपल-टू पीपल कनेक्ट के क्षेत्रों में इसे और मजबूत करने पर सहमति जताई।
विदेश विभाग के अनुसार, उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि हाल ही में संपन्न भारत-ईयू एफटीए आर्थिक और वाणिज्यिक संबंधों में एक नया अध्याय है और यह भारत-स्वीडन व्यापार, निवेश और प्रौद्योगिकी संबंधों को गहरा करने में मदद करेगा। दोनों पक्षों ने आपसी हित के क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर भी विचारों का आदान-प्रदान किया।
बुधवार को, विदेश मंत्री (ईएएम) एस. जयशंकर ने नई दिल्ली में हार्टेलियस से मुलाकात की और द्विपक्षीय सहयोग तथा भारत-ईयू रणनीतिक साझेदारी को मजबूत करने पर चर्चा की।
एक्स पोस्ट में, जयशंकर ने लिखा, विदेश मामलों के स्वीडिश राज्य सचिव डैग हार्टेलियस से मिलकर अच्छा लगा। हमने अपने द्विपक्षीय सहयोग को आगे बढ़ाने और भारत-ईयू रणनीतिक साझेदारी को गहरा करने के बारे में बात की।
फरवरी में, स्वीडन की उप प्रधानमंत्री एब्बा बुश नई दिल्ली में एआई इम्पैक्ट समिट 2026 में शामिल होने के लिए भारत आई थीं। भारत यात्रा के दौरान, बुश ने 18 फरवरी को केंद्रीय संचार मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया से मुलाकात की थी।
बैठक के बाद सिंधिया ने एक्स पोस्ट में लिखा, स्वीडन की उप प्रधानमंत्री एब्बा बुश से मिलकर खुशी हुई। नवाचार-संचालित और स्टेबिलिटी फोकस्ड साझेदार के रूप में, भारत-स्वीडन एक मजबूत, भविष्योन्मुख टेलीकॉम और डिजिटल साझेदारी को तैयार हैं।
भारत और स्वीडन के बीच घनिष्ठ संबंध हैं। स्वीडन में भारतीय दूतावास के अनुसार, नियमित राजनीतिक जुड़ाव, बढ़ते व्यापारिक संबंध, वैश्विक चुनौतियों और बहुपक्षीय मुद्दों पर सहयोग भारत-स्वीडन की मजबूत साझेदारी को परिभाषित करते हैं।
--आईएएनएस
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किताबें नहीं, फिर भी पढ़ानी होगी तीसरी भाषा:CBSE ने स्कूलों को दिए निर्देश; छठी क्लास में इसी सेशन से 3 भाषाएं पढ़ाने का नियम लागू
CBSE ने क्लास 6 में तीसरी भाषा लागू करने को लेकर बड़ा फैसला लिया है। 9 अप्रैल को जारी सर्कुलर में बोर्ड ने सभी स्कूलों को 7 दिन के अंदर इसे लागू करने का निर्देश दिया है। बोर्ड ने इसे urgent mandatory बताते हुए तुरंत पढ़ाई शुरू करने को कहा है। जारी नोटिस के अनुसार, यह नियम 2026-27 सेशन यानी इसी साल से लागू होगा, लेकिन स्कूलों को अभी से तैयारी और पढ़ाई शुरू करनी होगी। खास बात ये है कि थर्ड लैंग्वेज को बतौर सब्जेक्ट पढ़ाने के लिए अभी किताबें उपलब्ध नहीं हैं। बोर्ड ने कहा- किताबें जल्द जारी होंगी CBSE ने अपने नोटिस में कहा कि स्कूल तीसरी भाषा की पढ़ाई के लिए फिलहाल स्थानीय स्तर पर उपलब्ध किताबों और सामग्री का इस्तेमाल करें। बोर्ड ने यह भी बताया कि आधिकारिक टेक्स्टबुक्स जल्द उपलब्ध कराई जाएंगी। लेकिन तब तक स्कूलों को इंतजार नहीं करना है और तुरंत क्लास में पढ़ाई शुरू करनी होगी। स्कूलों को देनी होगी जानकारी स्कूल अपनी चुनी गई तीसरी भाषा की जानकारी CBSE को देंगे। इसके साथ ही इसे OASIS पोर्टल पर अपडेट करना भी जरूरी होगा। बोर्ड ने कहा है कि इस पूरी प्रक्रिया की निगरानी उसके रीजनल ऑफिस करेंगे, ताकि सभी स्कूल समय पर नियम लागू करें। CBSE का ऑफिशियल नोटिस यहां देख सकते हैं महाराष्ट्र थ्री लैंग्वेज पॉलिसी लागू करने वाला पहला राज्य पिछले साल महाराष्ट्र थ्री लेंग्वेज पॉलिसी लागू करने वाला देश का पहला राज्य बना था। राज्य में 1 से 5वीं क्लास तक के बच्चों के लिए हिंदी पढ़ना जरूरी कर दिया गया है। राज्य के सभी मराठी और अंग्रेजी मीडियम स्कूलों में नियम लागू है। NEP 2020 के तहत थ्री लैंग्वेज पॉलिसी लागू नेशनल एजुकेशन पॉलिसी (NEP) 2020 की सिफारिश के मुताबिक सेंट्रल बोर्ड ऑफ सेकेंडरी एजुकेशन (CBSE) ने 2 अप्रैल को अपना नया करिकुलम फ्रेमवर्क रिलीज किया। इसके तहत स्कूल्स में थ्री-लैंग्वेज फॉर्मूला लागू किया जाएगा। हर स्टूडेंट को दसवीं क्लास तक तीन भाषाएं सीखनी होगी। 34 साल बाद नई शिक्षा नीति 2020 को लाया गया नई शिक्षा नीति 2020 (NEP 2020) को भारत सरकार ने 29 जुलाई, 2020 को मंजूरी दी थी। यह 34 साल बाद भारत की शिक्षा नीति में एक बड़ा बदलाव है। इससे पिछली नीति 1986 में बनाई गई थी (जिसे 1992 में अपडेट किया गया था)। इसका उद्देश्य भारत की शिक्षा प्रणाली को 21वीं सदी की जरूरतों के अनुसार ढालना है, ताकि छात्र न केवल परीक्षा पास करें, बल्कि व्यावहारिक ज्ञान और कौशल से लैस हों। इस बार नई शिक्षा नीति को लागू करने के लिए केन्द्र ने साल 2030 तक का लक्ष्य रखा गया है। चूंकि शिक्षा संविधान में समवर्ती सूची का विषय है, जिसमें राज्य और केंद्र सरकार दोनों का अधिकार होता है। इसलिए राज्य सरकारें इसे पूरी तरह अप्लाई करे ऐसा जरूरी नहीं है। जब भी कहीं टकराव वाली स्थिति होती है, दोनों पक्षों को आम सहमति से इसे सुलझाने का सुझाव दिया गया है। ------------------------- ये खबरें भी पढ़ें... केंद्र सरकार ने NCERT को डीम्ड यूनिवर्सिटी का दर्जा दिया: खुद एंट्रेस लेने, कोर्स और सिलेबस डिजाइन करने, डिग्री देने की छूट मिली केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय ने नेशनल काउंसिल ऑफ़ एजुकेशनल रिसर्च एंड ट्रेनिंग (NCERT) को 'डीम्ड यूनिवर्सिटी' का दर्जा दिया। यूनिवर्सिटी ग्रांट्स कमीशन (UGC) की सलाह पर शिक्षा मंत्रालय ने 30 जनवरी को नोटिफिकेशन जारी कर इसकी घोषणा की। पूरी खबर पढ़ें...
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