तलाक की खबरों पर Thalapathy Vijay ने तोड़ी चुप्पी, सरेआम कह डाली ये बात
Jan Nayagan Star Thalapathy Vijay on Divorce News: साउथ सिनेमा के सुपरस्टार थलापति विजय इन दिनों अपनी फिल्मों से ज्यादा पर्सनल लाइफ को लेकर सुर्खियों में हैं. जी हां, हाल ही में उनकी निजी जिंदगी से जुड़े कई दावे और अफवाहें सामने आईं, जिनमें सबसे ज्यादा चर्चा उनके और उनकी पत्नी संगीता सोरनलिंगम के कथित तलाक को लेकर रही. इस खबर ने फैंस और फिल्म इंडस्ट्री में हलचल मचा दी. इसी बीच उनका नाम एक्ट्रेस तृषा कृष्णन के साथ भी जोड़ा जाने लगा, जिससे इन अफवाहों को और हवा मिल गई. अब इन सबके बीच विजय का एक बयान सामने आया है, जिसे लोग इन खबरों से जोड़कर देख रहे हैं.
तलाक की अफवाहों पर पहली बार बोले विजय
हाल ही में थलापति विजय ने तमिलनाडु के तिरुनेलवेली (नेल्लाई) में एक सार्वजनिक कार्यक्रम के दौरान अपने खिलाफ चल रही अफवाहों पर प्रतिक्रिया दी. अपने भाषण में उन्होंने कहा कि कुछ लोग लंबे समय से उनके बारे में गलत खबरें फैलाने की कोशिश कर रहे हैं. उन्होंने इशारों में कहा कि कई सालों तक इंतजार करने के बाद एक अफवाह फैलाई गई, जिसे लोग अब जानते हैं, लेकिन इसका आम जनता पर कोई खास असर नहीं पड़ा. विजय ने यह भी कहा कि चाहे उन्हें कितनी भी मुश्किलों और आरोपों का सामना करना पड़े, कोई भी उन्हें उनके लोगों और फैंस से अलग नहीं कर सकता.
Thalapathy on the rumours spread about him ???????????????? pic.twitter.com/TD0mF402Q8
— Vijay Fans Trends (@VijayFansTrends) April 8, 2026
‘मुझे दोषी ठहराने की कोशिश होती है’
अपने भाषण में विजय ने यह भी कहा कि कुछ लोग हमेशा उन्हें गलत ठहराने की कोशिश करते हैं. उन्होंने सवाल उठाया कि कई विवादों में बिना वजह उनका नाम घसीटा जाता है, जबकि हर मामले में उनकी भूमिका नहीं होती. उन्होंने यह भी इशारा किया कि उनके खिलाफ नियम बनाए जा रहे हैं और उन्हें लोगों से मिलने-जुलने तक में बाधाएं पैदा की जा रही हैं. विजय के इस बयान का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है.
तृषा के साथ वीडियो ने बढ़ाई चर्चा
हाल ही में थलापति विजय और तृषा कृष्णन का एक वीडियो सोशल मीडिया पर खूब वायरल हुआ था. इस वीडियो में दोनों एक पार्टी में साथ नजर आए थे, जिसके बाद उनके रिश्ते को लेकर अटकलें और तेज हो गईं. हालांकि, दोनों में से किसी ने भी इन खबरों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है.
‘जन नायकन’ को लेकर भी छिड़ी चर्चा
अपने भाषण के दौरान विजय ने अपनी फिल्म जन नायकन का भी जिक्र किया. उन्होंने कहा कि कुछ लोग उनकी फिल्म की रिलीज में भी रुकावट डालने की कोशिश कर रहे हैं. उन्होंने यह भी संकेत दिया कि उनके खिलाफ नए नियम और प्रतिबंध लगाए जा रहे हैं, जिससे उनकी प्रोफेशनल लाइफ भी प्रभावित हो रही है.
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पाकिस्तान में तेल कंपनियों का संकट नहीं हो रहा खत्म, सरकार ने रोक रखी है राशि
नई दिल्ली, 9 अप्रैल (आईएएनएस)। अमेरिका और ईरान के बीच एक महीने से ज्यादा समय तक जारी रहे संघर्ष का असर क्रूड ऑयल की सप्लाई पर पड़ा। इस बीच पाकिस्तान की मीडिया के अनुसार, देश की ऑयल मार्केटिंग कंपनियां गंभीर नकदी संकट का सामना कर रही हैं। करीब 107 अरब रुपए तक के प्राइस डिफरेंस क्लेम अब भी लंबित हैं। इसकी वजह से कंपनियों पर वित्तीय दबाव बढ़ता जा रहा है।
उद्योग से जुड़े लोगों ने ऑयल एंड गैस रेगुलेटरी अथॉरिटी पर आरोप लगाया है कि वह बकाया भुगतान करने के बजाय बार-बार दस्तावेज की आवश्यकताओं में बदलाव कर रही है, जिससे भुगतान प्रक्रिया और अधिक उलझती जा रही है।
इंडस्ट्री के अनुमान बताते हैं कि मार्च के बीच में फाइल किया गया लगभग 27 बिलियन रुपए का पहला क्लेम सिर्फ थोड़ा ही सेटल हुआ था, जबकि 70-80 बिलियन रुपए के बाद के क्लेम अभी भी पूरी तरह से बिना पेमेंट के हैं। कराची के एक्सप्रेस ट्रिब्यून के मुताबिक, कुल मिलाकर इस नुकसान की वजह से कंपनियां बहुत कम मार्जिन पर काम कर रही हैं और कैश फ्लो बनाए रखने के लिए संघर्ष कर रही हैं।
अधिकारियों का कहना है कि असली समस्या पारदर्शिता की नहीं, बल्कि अनिश्चितता की है। उनका आरोप है कि हर बार जब ऑयल मार्केटिंग कंपनियां (ओएमसी) नियमों का पालन करने की कोशिश करती हैं, तो अथॉरिटी नई दस्तावेजी मांगें सामने रख देती है।
मांगों में इनवॉइस-स्तर पर मिलान से लेकर बार-बार सीईओ, सीएफओ और ऑडिटर सर्टिफिकेशन तक शामिल हैं, जिससे पूरी प्रक्रिया बार-बार शुरू से करनी पड़ती है। सोमवार रात तक एक नया संशोधित फॉर्मेट भी जारी किया गया, लेकिन इसमें यह स्पष्ट नहीं था कि आगे बदलाव किए जाएंगे या नहीं, जिससे अनिश्चितता बनी हुई है।
इंडस्ट्री के एक सीनियर सोर्स ने कहा, हर बार जब इंडस्ट्री पालन करने की तैयारी करती है, तो एक नई जरूरत आ जाती है। कोई फिनिशिंग लाइन नजर नहीं आती है।
अगर रेगुलेटरी अथॉरिटी फेडरल बोर्ड ऑफ रेवेन्यू के साथ टैक्स रिकंसिलिएशन तक पेमेंट का 10 फीसदी रोकने के प्रस्ताव पर आगे बढ़ती है, तो हालात और खराब हो सकते हैं। इस कदम से 7.4 बिलियन रुपए और दो महीने तक अटक सकते हैं।
प्राइस डिफरेंशियल क्लेम उस स्थिति में पैदा होते हैं, जब सरकार ईंधन की कीमतें उसकी खरीद लागत से कम तय कर देती है। ऐसे में इस अंतर की भरपाई कंपनियों को की जानी होती है। भुगतान में देरी होने पर ऑयल मार्केटिंग कंपनियों को इस अंतर को पूरा करने के लिए उधार लेना पड़ता है, जिससे उन पर वित्तीय दबाव और अधिक बढ़ जाता है।
औद्योगिक अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि अगर लिक्विडिटी कम होती रही तो यह संकट जल्द ही फ्यूल सप्लाई में रुकावट में बदल सकता है। आर्टिकल में आगे कहा गया है कि क्षेत्र ने ऊर्जा मंत्रालय से दखल देने की अपील की और बकाया का तुरंत सेटलमेंट करने, एक ही डॉक्यूमेंटेशन फ्रेमवर्क और कुछ पेमेंट रोकने के प्रस्तावित कदम को वापस लेने की मांग की है।
--आईएएनएस
केके/एबीएम
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