कमर दर्द और रीढ़ की जकड़न से छुटकारा दिलाए चक्रासन योगासन
नई दिल्ली, 9 अप्रैल (आईएएनएस)। आधुनिक जीवनशैली में देर तक कुर्सी पर बैठने से अक्सर रीढ़ की हड्डी प्रभावित होने लगती है। इससे कमर दर्द, उठने-बैठने में तकलीफ और मांसपेशियों में तनाव बढ़ जाता है। कई लोग घरेलू नुस्खों या थेरेपी से राहत पाने की कोशिश करते हैं, लेकिन समस्या जड़ से समाप्त नहीं होती हैं।
इन्हीं में से एक लोकप्रिय आसन है चक्रासन, जिसे व्हील पोज भी कहा जाता है और यह अष्टांग योग की प्राइमरी सीरीज का ही एक हिस्सा है। इस योगासन को करने के लिए शरीर को पीछे की ओर झुकाया जाता है और शरीर एक पहिए का रूप धारण कर लेता है।
आयुष मंत्रालय के अनुसार, चक्रासन (व्हील पोज) एक उन्नत योगासन है, जो रीढ़ की हड्डी के लचीलेपन को बढ़ाता है और हृदय व फेफड़ों के लिए अत्यधिक लाभकारी है। यह आसन नसों, पाचन, श्वसन और अंतःस्रावी तंत्र को मजबूत करता है, तनाव कम करता है और संपूर्ण शरीर की मांसपेशियों को टोन करता है।
चक्रासन रीढ़ को लचीला बनाता है और कमर दर्द से राहत दिलाता है। यह आंखों की मांसपेशियों को मजबूत कर रोशनी बढ़ाने में मदद करता है। कब्ज और पाचन संबंधी समस्याओं को दूर करता है। यह मानसिक तनाव और चिंता को कम कर शांति देने में भी मददगार है। यह मांसपेशियों को मजबूत कर शरीर की सक्रियता बढ़ाता है।
इसके नियमित अभ्यास से शरीर को कई तरह के लाभ मिल सकते हैं। हालांकि, शुरुआत में करने से थोड़ी मुश्किलों का सामना करना पड़ सकता है, लेकिन अभ्यासकर्ता आसन को करने के लिए दीवार का सहारा ले सकते हैं।
चक्रासन न सिर्फ रीढ़ की मज़बूती बढ़ाता है, बल्कि पूरे शरीर को ऊर्जावान बनाता है। रोजाना 5-10 मिनट का अभ्यास कमर दर्द को काफी हद तक नियंत्रित कर सकता है। अगर कोई भी अभ्यासकर्ता बैठे रहने की वजह से जकड़न महसूस कर रहे हैं, तो उन्हें अपनी दिनचर्या में चक्रासन शामिल करें।
अगर पीठ, कलाई या गर्दन में गंभीर दर्द है, तो डॉक्टर या योग गुरु की सलाह लें। गर्भवती महिलाएं या हाई ब्लड प्रेशर वाले लोग बिना मार्गदर्शन के न करें।
--आईएएनएस
एनएस/पीएम
डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.
नाजुक युद्धविराम के बीच बातचीत के लिए इस्लामाबाद जाएंगे जेडी वेंस, ईरान के न्यूक्लियर मुद्दे पर रहेगा फोकस
वॉशिंगटन, 9 अप्रैल (आईएएनएस)। अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस हंगरी की अपनी यात्रा समाप्त करने के बाद अब इस सप्ताह के अंत में इस्लामाबाद के लिए रवाना होंगे, जहां वह ईरान के साथ वार्ता के लिए एक उच्चस्तरीय अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व करेंगे। यह दौरा ऐसे समय में हो रहा है, जब वॉशिंगटन हाल के हफ्तों में हुई सैन्य तनातनी के बाद बने नाज़ुक युद्धविराम को मजबूत करने की कोशिश कर रहा है। ट्रंप प्रशासन इस संघर्ष विराम को स्थायी शांति में बदलने के लिए कूटनीतिक प्रयास तेज कर रहा है।
व्हाइट हाउस ने बुधवार को कहा कि वार्ता टीम में विशेष दूत स्टीव विटकॉफ और जेरेड कुशनर शामिल होंगे। इससे संकेत मिलता है कि प्रशासन अब उस चरण के बाद एक संगठित कूटनीतिक प्रक्रिया को आगे बढ़ाना चाहता है।
व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरोलिन लेविट ने पत्रकारों से कहा, “मैं यह घोषणा कर सकती हूं कि राष्ट्रपति इस सप्ताहांत वार्ता के लिए अपनी टीम इस्लामाबाद भेज रहे हैं, जिसका नेतृत्व अमेरिका के उपराष्ट्रपति जे. डी. वेंस, विशेष दूत विटकॉफ और श्री कुशनर करेंगे।” उन्होंने आगे कहा, “इन वार्ताओं का पहला दौर शनिवार को होगा।”
हंगरी से स्वदेश लौटते समय मीडिया से बात करते हुए वेंस ने इस बात पर जोर दिया कि पाकिस्तान और ईरान के बीच समानांतर कूटनीतिक बातचीत पहले ही तय हो चुकी थी। हमारी एक बातचीत है जो इस वीकेंड शुरू होनी है। यह सच है। मुझे लगता है कि यह एक अच्छा कदम है।”
यह बातचीत राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा “ऑपरेशन एपिक फ्यूरी” के बाद घोषित दो हफ्ते के सीजफायर के बाद हो रही है। इस सीजफायर को लेकर सरकार का कहना है कि इसने ईरान की मिलिट्री क्षमता को काफी कम कर दिया है।
प्रेस सचिव लेविट ने कहा, “यह अमेरिका की जीत है जिसे राष्ट्रपति और हमारी जबरदस्त सेना ने मुमकिन बनाया।” व्हाइट हाउस के मुताबिक, मिलिट्री ऑपरेशन के दबाव ने तेहरान को सीजफायर करने और होर्मुज स्ट्रेट को फिर से खोलने पर राजी होने के लिए मजबूर किया।
उन्होंने कहा, “राष्ट्रपति के ज्यादा से ज्यादा दबाव और ऑपरेशन एपिक फ्यूरी की सफलता से बने फायदे की वजह से ईरानी सरकार ने सीजफायर का प्रस्ताव मांगा और अंत में उसके लिए राजी हो गई।”
वेंस ने कहा कि युद्धविराम का ढांचा शर्तों पर आधारित है। यह एक सीजफायर के साथ-साथ बातचीत की प्रक्रिया है। हम अपनी तरफ से कुछ देते हैं और बदले में उनसे उम्मीद करते हैं कि समुद्री रास्ते (स्ट्रेट्स) दोबारा खोले जाएंगे।” उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि अगर इन शर्तों का पालन नहीं किया गया, तो इसके परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं।
डिप्लोमैटिक कोशिशों के बावजूद, सरकार ने चेतावनी दी है कि सीजफायर अभी अस्थिर है। लेविट ने कहा, “यह एक नाजुक सीजफायर है। सीजफायर प्रकृति से ही नाजुक होते हैं।”
इस्लामाबाद के कोर एजेंडा पर वेंस ने साफ किया कि ईरान का न्यूक्लियर प्रोग्राम सेंट्रल होगा। उन्होंने कहा, “हम चाहते हैं कि ईरान न्यूक्लियर हथियार न बना पाए। हम चाहते हैं कि ईरान न्यूक्लियर फ्यूल छोड़ दे।”
लेविट ने दोहराया कि राष्ट्रपति की शर्तें यानी ईरान में यूरेनियम संवर्धन को पूरी तरह समाप्त करना, अब भी जस की तस बनी हुई हैं और इसमें कोई बदलाव नहीं हुआ है।
वहीं, वेंस ने ईरान के प्रस्तावों पर आई मीडिया रिपोर्ट्स को खारिज करते हुए कहा, “तीन अलग-अलग 10-बिंदुओं वाले प्रस्ताव सामने आए थे, लेकिन पहला प्रस्ताव तो तुरंत ही खारिज कर दिया गया।”
उन्होंने जोर देकर कहा कि वॉशिंगटन का मानना है कि तेहरान अब ज्यादा गंभीरता से बातचीत कर रहा है। उन्होंने कहा, ईरान में जमीन पर जो हो रहा है, वह यह है कि सरकार की स्थिति साफ है, जो कि अमेरिका के साथ बातचीत करने की है।
--आईएएनएस
केके/वीसी
डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.
होम
जॉब
पॉलिटिक्स
बिजनेस
ऑटोमोबाइल
गैजेट
लाइफस्टाइल
फोटो गैलरी
Others
News Nation



















