भारत के एडवांस्ड रूसी फा इटर जेट खरीदने के आसार हमेशा कम ही थे, लेकिन क्रेमलिन को उम्मीद थी कि मेक इन इंडिया (स्थानीय निर्माण) और तकनीक हस्तांतरण के ज़रिए इस डील को आकर्षक बनाया जा सके।
ईरान के विदेश मंत्री अरागची ने शनिवार को कहा कि होर्मुज़ जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) से ट्रैफ़िक को रेगुलेट करने के लिए ओमान के साथ बनी सहमति का मतलब इस रणनीतिक जलमार्ग को फिर से खोलना नहीं है, क्योंकि तेहरान और मस्कट अभी भी एक अस्थायी शिपिंग रूट पर बातचीत कर रहे हैं। IRIB न्यूज़ एजेंसी के अनुसार, अरागची ने कहा कि बातचीत चल रही है और तकनीकी जटिलताओं के कारण एक अस्थायी रूट पर काम किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि दोनों पक्ष अंतिम नतीजे के बहुत करीब हैं, लेकिन इस बात पर ज़ोर दिया कि जलडमरूमध्य को फिर से खोलना अतिरिक्त शर्तों पर निर्भर करेगा।
IRIB के अनुसार, अरागची ने कहा यह कदम होर्मुज़ जलडमरूमध्य को फिर से खोलने का संकेत नहीं देता है और कहा कि इसे फिर से खोलना अन्य शर्तों और संयुक्त राज्य अमेरिका द्वारा समझौता ज्ञापन (MoU) के उल्लंघन के लिए मुआवज़े पर निर्भर करेगा। अल जज़ीरा के अनुसार, अरागची ने कहा कि तेहरान इस्लामाबाद में पहले हुए 14-सूत्रीय समझौता ज्ञापन (MoU) की धारा 5 को लागू कर रहा था, जिसके तहत एक महीने के भीतर ट्रैफ़िक के सामान्य होने की उम्मीद थी। उन्होंने कहा कि तेहरान की चेतावनियों के बावजूद, जब अमेरिका ने होर्मुज़ जलडमरूमध्य से नए रास्ते बनाने की कोशिश की, उससे पहले ही ट्रैफ़िक "दो हफ़्तों के अंदर सामान्य स्थिति के 60 प्रतिशत" तक पहुँच गया था।
अरागची ने कहा कि मौजूदा बातचीत एक अस्थायी शिपिंग रूट बनाने पर केंद्रित थी, जो आगे चलकर स्थायी व्यवस्था का आधार बन सके।
उन्होंने कहा नए रास्ते पर पहुँचने से पहले, एक अस्थायी रास्ते को मुख्य रास्ते के आधार के तौर पर माना जाएगा।" साथ ही उन्होंने यह भी बताया कि इसमें शामिल देशों की सेना और नौसेना के बीच बातचीत हुई है। यह बयान तब आया है जब शुक्रवार (स्थानीय समय) को एक अमेरिकी अधिकारी ने कहा कि ईरान और ओमान के बीच बातचीत में प्रगति हुई है। इससे रणनीतिक रूप से अहम 'स्ट्रेट ऑफ़ होर्मुज़' को फिर से खोलने और पांच महीने से चल रहे संघर्ष के कारण रुके हुए तेल निर्यात को बहाल करने का रास्ता साफ़ हो सकता है। रॉयटर्स ने नाम न बताने की शर्त पर बात करने वाले अमेरिकी अधिकारी के हवाले से बताया कि वॉशिंगटन को उम्मीद है कि इस जलमार्ग से जुड़े दोनों देशों—ईरान और ओमान—के बीच जल्द ही कोई समझौता होगा, जिससे सामान्य कमर्शियल तेल शिपमेंट फिर से शुरू हो सकेंगे। इस रणनीतिक रास्ते पर नियंत्रण को लेकर समझौता होना, शांति के लिए एक बड़े समझौते की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है।
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