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बिना दवा के शरीर को रखना है निरोग, प्रकृति दिखाएगी स्वस्थ रखने का रास्ता

नई दिल्ली, 8 अप्रैल (आईएएनएस)। आज के समय में हर कोई निरोगी काया चाहता है, लेकिन सवाल है कि कैसे निरोगी काया को पाया जा सकता है।

इस सवाल का एक ही जवाब है—अपने शरीर को समझना। हमारे शरीर में इतनी क्षमता होती है कि वह हर बीमारी से लड़ सकता है और बिना दवा के अच्छा जीवन जी सकता है। बिना दवा के जीवन जीना सिर्फ एक विचार नहीं, बल्कि अच्छी जीवनशैली का संकेत है।

आयुर्वेद के मुताबिक, आज के समय में आधुनिक जीवनशैली और खान-पान ही बीमारियों की जड़ है, और यही कारण है कि अब प्रकृति के पास वापस लौटने का समय आ गया है। जितना आप प्रकृति के पास जाएंगे, बीमारी उतना ही दूर हो जाएगी। बिना दवा के स्वस्थ जीवनशैली जीने के लिए कुछ चीजों को जीवन में वापस लाना होगा।

पहला स्टेप है स्व निदान, यानी पहले खुद की बीमारी की पहचान करें। हमारा शरीर कभी झूठ नहीं बोलता है, और जब भी शरीर में किसी तरह की कोई परेशानी होती है तो कुछ न कुछ संकेत जरूर मिलता है। इसके लिए शरीर के कुछ मुख्य लक्षण जानने की जरूरत है, जैसे जोड़ों का दर्द, कमजोरी, घटता हुआ वजन, अचानक धुंधला दिखना, बुखार, और कब्ज होना। यह कारण शरीर की आंतरिक गड़बड़ी को दर्शाते हैं।

दूसरा स्टेप है प्राकृतिक दवाओं का इस्तेमाल। हमारा मतलब किसी दवा से नहीं, बल्कि प्रकृति से करीब रहना और समय ही है। इसके लिए समय पर आहार लेना जरूरी है और जीवनशैली में प्रकृति से मिले ताजे फलों का सेवन करना भी जरूरी है। यही ताजे फल हैं, जो दवा के इस्तेमाल को कम करने में मदद करते हैं। इसके अलावा, रोज कम से कम आधे घंटे प्रकृति से जुड़ना भी जरूरी है। नंगे पांव घास पर चले और पेड़ों को गले लगाएं। इससे तनाव कम होता है और शरीर मानसिक रूप से स्वस्थ महसूस करता है।

तीसरा स्टेप है सुधार का चरण। इस समय आप खुद शरीर में बदलाव महसूस करेंगे। जैसे जोड़ों के दर्द में आराम मिलेगा और फल खाने से पेट से संबंधित रोगों में भी आराम मिलेगा। शरीर धीरे-धीरे खुद को हील करना शुरू कर देगा। अगर इसके बाद कभी-कभार बुखार की समस्या होती है तो दवा लेने की बजाय गर्म पानी में पैरों को भिगोकर बैठ जाए, इससे भले ही शरीर का तापमान बढ़ेगा, लेकिन बुखार ठीक होने में मदद मिलेगी। हमारा शरीर का तापमान तभी गर्म होता है, जब शरीर में बैक्टीरिया का हमला होता है। संक्रमण से लड़ने के लिए शरीर तापमान को बढ़ा देते हैं और एंटीबॉडी बनाना शुरू कर देते हैं।

इसके साथ ही कोशिश करें कि रोजाना कुछ पत्ते नीम के जरूर चबाए। यह शरीर के आधे से ज्यादा रोगों को समाप्त कर देगा।

--आईएएनएस

पीएस/डीकेपी

डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.

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केंद्र ने प्रमुख सेक्टर्स को एलपीजी की आपूर्ति बढ़ाई, प्रतिदिन करीब 1.1 लाख 5 किलो वाले एफटीएल सिलेंडर्स की हो रही बिक्री

नई दिल्ली, 8 अप्रैल (आईएएनएस)। केंद्र सरकार ने बुधवार को ऐलान किया कि कमर्शियल एलपीजी की सीमा को मार्च 2026 से पहले के थोक उपभोग स्तर के 70 प्रतिशत तक बढ़ाने का फायदा अब फार्मा, खाद्य, पॉलिमर, कृषि, पैकेजिंग, पेंट, यूरेनियम, भारी जल, इस्पात, बीज, धातु, सिरेमिक, फाउंड्री, फोर्जिंग, ग्लास और एयरोसोल क्षेत्रों की औद्योगिक इकाइयों को भी दिया जाएगा।

हालांकि, यह वृद्धि प्रतिदिन 0.2 हजार मीट्रिक टन की समग्र क्षेत्रीय सीमा के अधीन होगी।

केंद्र सरकार ने एक आधिकारिक बयान में कहा कि प्रवासी मजदूरों के लिए 5 किलो वाले एफटीएल (फ्री ट्रेड एलपीजी) सिलेंडर्स की आपूर्ति को करीब दोगुना कर दिया गया है। मौजूदा समय में औसत 1.1 लाख 5 किलो वाले एलपीजी सिलेंडर्स की बिक्री हो रही है, जो कि फरवरी में औसत 77,000 के आसपास थी।

23 मार्च से अब तक 8.9 लाख 5 किलो वाले एलपीजी सिलेंडर्स की बिक्री हो चुकी है।

सरकार ने बताया कि 14 मार्च से अब तक लगभग 93,085 मीट्रिक टन कमर्शियल एलपीजी बेची जा चुकी है, जबकि मंगलवार को 6,646 मीट्रिक टन कमर्शियल एलपीजी (35 लाख से अधिक 19 किलोग्राम सिलेंडरों के बराबर) बेची गई।

इंडियन ऑयल, एचपीसीएल और बीपीसीएल के कार्यकारी निदेशकों की तीन सदस्यीय समिति कमर्शियल एलपीजी वितरण की योजना बनाने के लिए राज्य अधिकारियों और उद्योग निकायों के साथ समन्वय कर रही है।

आधिकारिक बयान में यह भी कहा गया है कि घरेलू एलपीजी सिलेंडरों की आपूर्ति सामान्य बनी हुई है, मंगलवार को 53.5 लाख से अधिक घरेलू एलपीजी सिलेंडर वितरित किए गए। एलपीजी वितरकों में किसी भी प्रकार की कमी की सूचना नहीं मिली है।

कुल बुकिंग में ऑनलाइन की हिस्सेदारी लगभग 95 प्रतिशत तक बढ़ गई है। वितरक स्तर पर हेराफेरी को रोकने के लिए डिलीवरी ऑथेंटिकेशन कोड (डीएसी) आधारित डिलीवरी लगभग 91 प्रतिशत तक बढ़ गई है।

सभी रिफाइनरियां पूरी क्षमता से काम कर रही हैं और कच्चे तेल का पर्याप्त भंडार मौजूद है। देश में पेट्रोल और डीजल का भी पर्याप्त स्टॉक बना हुआ है। बयान में कहा गया है कि घरेलू खपत को पूरा करने के लिए रिफाइनरियों से एलपीजी का उत्पादन बढ़ा दिया गया है।

सरकार पेट्रोल, डीजल और एलपीजी की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए हर संभव प्रयास कर रही है और नागरिकों को सलाह दी जाती है कि वे ईंधन की अफरा-तफरी में खरीदारी करने और एलपीजी की अनावश्यक बुकिंग से बचें। बयान में आगे कहा गया है कि नागरिकों से अनुरोध है कि वे एलपीजी सिलेंडर बुक करने के लिए डिजिटल माध्यमों का उपयोग करें और जब तक आवश्यक न हो, एलपीजी वितरकों के पास जाने से बचें।

--आईएएनएस

एबीएस/

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