महायुद्ध में सीजफायर का ऐलान हुआ। लेकिन सबसे बड़ा सवाल यहां पर यह उठ गया है क्या इजराइल का अगला टारगेट पाकिस्तान है? महायुद्ध 40 दिन तक चला। पूरा मिडिल ईस्ट बर्बाद होता रहा, तबाह होता रहा और हर तरफ बारूदी गंध फैली नजर आई। लेकिन इस बीच बहुत बड़ा दावा पाकिस्तान की तरफ से किया गया और वो दावा था मध्यस्थता को लेकर। डॉनल्ड ट्रंप ने पोस्ट भी किया। पाकिस्तान ने वहां क्रेडिट लेने की कोशिश की। लेकिन इस क्रेडिट की लड़ाई में पाकिस्तान को बहुत बड़ा झटका लगा है। दरअसल पाकिस्तान की तरफ से जो ऐलान किया गया था सीज फायर को लेकर उसमें यह भी दावा किया गया पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ की तरफ से कि यह सीज फायर लेबनान पर भी लागू होगा। दरअसल उनके शब्द कुछ यूं थे कि जितने भी एलआई हैं यूएस के और या फिर ईरान के उन हर मोर्चों पर कोई भी हमला नहीं किया जाएगा
पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ इस सीज फायर से फूले नहीं समा रहे थे। क्रेडिट लेने की होड़ में लड़े हुए थे, लगे हुए थे। इसी बीच उनको झटका दिया उनके सबसे बड़े दुश्मन यानी कि इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की तरफ से। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री के दावे को झुठलाते हुए, खारिज करते हुए, इंकार करते हुए उनको आईना दिखाते हुए बेंजामिन नेतन्याहू ने बता दिया कि इजराइल अपना ऑपरेशन लेबनान में बिल्कुल भी नहीं रोकेगा। यानी पाकिस्तान के पहले दावे पर ही गलत की मोहर यहां पर इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की तरफ से लगा दी गई। इजराइल को पाकिस्तान ने आज तक भी एक देश के तौर पर मान्यता नहीं दी है। इजराइल के प्रधानमंत्री समेत तमाम नेताओं की तरफ से कई मौकों पर अलग-अलग मंचों पर ये कहा गया है कि उनका अगला टारगेट पाकिस्तान है। पाकिस्तान एक ऐसा मुस्लिम देश है जिसके पास न्यूक्लियर पावर है। न्यूक्लियर हथियार है।
ईरान न्यूक्लियर हथियार डेवलप कर रहा था। एनरच यूरेनियम 60% से 90% तक ले जाता। उससे पहले ही इजराइल ने अमेरिका के साथ मिलकर ईरान को वहां पर पूरी तरह से बराबर कर दिया, समतल कर दिया। यह लगातार दावा किया जा रहा है और अब अगले काफी वक्त तक ईरान न्यूक्लियर पावर बनने की कोशिश में कामयाब नहीं हो पाएगा। यह माना जा रहा था। और उसके बाद ईरान के बाद पाकिस्तान इजराइल के लिए दूसरा बड़ा टारगेट था और ना सिर्फ इजराइल के लिए बल्कि अमेरिका के लिए भी एक थ्रेट के तौर पर पाकिस्तान हाल फिलहाल में उभरा है।
तुलसी गबार्ड यानी कि इंटेलिजेंस चीफ की तरफ से भी बात का जिक्र कुछ ही दिन पहले किया गया था कि पाकिस्तान की मिसाइल रेंज जो है वो थ्रेट हो सकती है और उसका परमाणु हथियार होना एक और बड़ा खतरा भी है। ऐसे में अब इजराइल का नेक्स्ट टारगेट जो है वो लॉक हो गया है। और डॉनल्ड ट्रंप भले इस बात का जिक्र कर रहे थे कि यह मध्यस्था हुई है। यहां पर सीज फायर किया गया है। लेकिन इजराइल ने साफ कर दिया कि वो अपना ऑपरेशन लेबनान में नहीं रोकेगा।
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अमेरिका और ईरान के बीच दो सप्ताह के युद्धविराम पर सहमति बनने के कुछ घंटों बाद, युद्ध सचिव पीट हेगसेथ ने कड़े बयान जारी करते हुए कहा कि अमेरिकी नेतृत्व ने संघर्ष में स्पष्ट बढ़त हासिल कर ली है। उनके ये बयान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा अचानक युद्धविराम की घोषणा के बाद वैश्विक स्तर पर मची गहन जांच के बीच आए। पेंटागन में एक ब्रीफिंग में बोलते हुए, हेगसेथ ने कहा कि राष्ट्रपति ट्रंप ने इस भीषण संकट के समय में एक अभूतपूर्व कदम उठाया है। हेगसेथ ने आगे कहा कि युद्धविराम से ठीक पहले के अंतिम कुछ घंटों में राष्ट्रपति ट्रंप के फैसलों ने 'इतिहास रच दिया' और युद्ध की दिशा बदल दी।
ईरान का भविष्य हमारे हाथों में है
अपने सबसे मुखर बयानों में से एक में अमेरिकी युद्ध सचिव ने घोषणा की कि ईरान का भविष्य हमारे हाथों में है यह संकेत देते हुए कि युद्धविराम पर सहमति के बावजूद वाशिंगटन के पास रणनीतिक और सैन्य शक्ति बनी हुई है। उन्होंने दावा किया कि युद्धविराम से पहले ही अमेरिका ने युद्धक्षेत्र में एक महत्वपूर्ण बढ़त हासिल कर ली थी। उन्होंने आगे कहा कि अमेरिकी सेनाओं ने एक निर्णायक सैन्य विजय प्राप्त की थी जिसने प्रशासन को मजबूत स्थिति से बातचीत करने का आत्मविश्वास दिया।
ईरान कभी भी परमाणु हथियार हासिल नहीं करेगा
वाशिंगटन के दृढ़ रुख को दोहराते हुए, हेगसेथ ने दावा किया कि ईरान कभी भी परमाणु हथियार हासिल नहीं कर पाएगा। उन्होंने कहा कि युद्धविराम की शर्तें अमेरिका के दीर्घकालिक सुरक्षा उद्देश्यों के अनुरूप थीं। हेगसेथ ने आगे कहा कि ईरान को पूरी तरह से कुचलने के लिए आर्थिक और सैन्य विकल्प उपलब्ध थे। अमेरिकी युद्ध सचिव ने कहा, "राष्ट्रपति ट्रम्प ईरान की अर्थव्यवस्था को तबाह कर सकते थे, लेकिन उन्होंने संयम बरता। उन्होंने युद्धविराम के दौरान राजनयिक बातचीत का रास्ता चुनकर दया दिखाई।
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