पॉपुलर ब्रांड का 'हाइब्रिड' फोन, फीचर फोन जैसा सिंपल; इसमें टचस्क्रीन और 4G सपोर्ट भी
चीन के बाद, अब HMD Touch AI अंतरराष्ट्रीय स्तर पर लॉन्च होने वाला है। कंपनी इसे हाइब्रिड फोन कह रही है क्योंकि फीचर फोन की सिंपलिसिटी को टचस्क्रीन, 4G/Wi-Fi और AI फीचर्स के साथ मिलाता है। देखें इसमें क्या-क्या खास है
अमरनाथ यात्रा 20 दिन पहले रोकी गई:बारिश और लैंडस्लाइड से रास्ते खराब होने के कारण फैसला, अब तक 4.8 लाख ने दर्शन किए
बाबा अमरनाथ की यात्रा तय समय से 20 दिन पहले रोक दी गई है। लगातार बारिश और लैंडस्लाइड के कारण रास्ते खराब हो जाने के कारण यह फैसला लिया गया। अब जो जत्थे यात्रा पर हैं, उन्हीं की यात्रा पूरी कराई जाएगी। नए जत्थे नहीं भेजे जाएंगे। अब तक 4.8 लाख से ज्यादा श्रद्धालु पवित्र गुफा के दर्शन कर चुके हैं। डिविजनल कमिश्नर कश्मीर अंशुल गर्ग ने बताया कि IMD ने अगले कुछ दिनों में खराब मौसम का पूर्वानुमान जारी किया है। श्रद्धालुओं की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए 9 अगस्त से दोनों रूट पर यात्रा रोकने का फैसला किया गया है। यात्रा भले ही 9 अगस्त से श्रद्धालुओं के लिए बंद हो जाएगी, लेकिन पारंपरिक छड़ी मुबारक कार्यक्रम के साथ इसका धार्मिक समापन होगा। पवित्र छड़ी 28 अगस्त को पारंपरिक पहलगाम मार्ग से अमरनाथ गुफा तक जाएगी और इसी के साथ अमरनाथ यात्रा-2026 का औपचारिक समापन होगा। एक महीने पहले ही गायब हो गया था हिमलिंग 23 मई को BSF के जवानों ने जो तस्वीर जारी की थी, उसमें शिवलिंग का आकार करीब 7 फीट था। 29 जून को पहली पूजा के दिन भी हिमलिंग की ऊंचाई 5 फीट से ज्यादा थी। 6 जुलाई को सामने आई तस्वीर में हिमलिंग लगभग 90% गायब हो गया था। फिर 7 जुलाई को हिमलिंग पूरी तरह से गायब हो गया। हालांकि इसके बावजूद यात्रा जारी रही। अमरनाथ के बाबा बर्फानी प्राकृतिक बनते हैं, तराशा नहीं जाता अमरनाथ का हिम शिवलिंग किसी बर्फ के ब्लॉक को तराशकर नहीं बनाया जाता, बल्कि यह प्राकृतिक आइस स्टैलेग्माइट है। जैसे चूना-पत्थर की गुफाओं में जमीन से खनिज जमा होकर स्टैलेग्माइट बनते हैं, उसी तरह अमरनाथ गुफा में छत से टपकने वाला पानी जमकर बर्फ का शिवलिंग बनाता है। इसका आकार हर साल मौसम, तापमान और पानी की उपलब्धता के अनुसार अलग-अलग होता है। यही इसकी सबसे अनोखी विशेषता है। यात्रा के 2 रूट, एक 48km लंबा लेकिन सरल, दूसरा 14km का लेकिन कठिन चढ़ाई अमरनाथ यात्रा दो रास्तों से की जाती है। पारंपरिक रास्ता 48 किलोमीटर लंबा नुनवान-पहलगाम से है। दूसरा रास्ता गांदरबल जिले में 14 किलोमीटर लंबे बालटाल से है। यात्रा 28 अगस्त को खत्म होनी थी।
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