Kerala Rain: 7 जिलों में Orange Alert जारी, राहत शिविरों में पहुंचे सैकड़ों लोग
केरल के कई हिस्सों में शनिवार को भी बारिश जारी रही। कई इलाकों में बाढ़ के पानी का स्तर धीरे-धीरे ही कम हो रहा है, लेकिन अभी भी कई सड़कें और मकान जलमग्न हैं जिससे सैकड़ों लोग राहत शिविरों में रहने को मजबूर हैं। अधिकारियों ने बताया कि अलप्पुझा के ऊपरी कुट्टनाड और कुट्टनाड क्षेत्र तथा कोट्टायम जिले के अंदरूनी इलाके सबसे ज्यादा बाढ़ से प्रभावित हैं।
हालांकि, कई जगहों पर पानी का स्तर अब घटने लगा है। कुछ क्षेत्रों में बाढ़ का पानी बहुत धीमी गति से कम हो रहा है, जिसके कारण कई मकान और सड़कें अब भी जलमग्न हैं, जिससे स्थानीय निवासी फंसे हुए हैं। अलप्पुझा-चंगनाशेरी सड़क समेत कई प्रमुख सड़कें अब भी जलमग्न हैं, जिससे इलाके में यातायात प्रभावित हुआ है।
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जलभराव वाले इलाकों से लोगों को लाने और ले जाने तथा जरूरी सामान को दूसरे स्थान पर पहुंचाने के लिए छोटी नावों का इस्तेमाल किया जा रहा है। बाढ़ से स्थिति अभी पूरी तरह सामान्य नहीं पाई है जिसकी वजह से दक्षिण और मध्य जिलों के कई इलाकों में सैकड़ों लोग राहत शिविरों में ही रह रहे हैं। इस बीच, भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) ने रविवार के लिए पत्तनमथिट्ठा, अलप्पुझा, कोट्टायम, कोझिकोड, वायनाड, कन्नूर और कासरगोड जिलों में ‘ऑरेंज अलर्ट’ जारी किया है।
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‘ऑरेंज अलर्ट’ का मतलब 11 सेंटीमीटर से 20 सेंटीमीटर तक की बहुत भारी बारिश से होता है। केरल राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (केएसडीएमए) ने कहा कि तेज हवाएं राज्य में मौसम से जुड़ी सबसे खतरनाक स्थितियों में से एक हैं। तेज हवाएं चलने के दौरान अक्सर पेड़ उखड़ने और शाखाएं टूटने जैसी घटनाएं होती हैं।
केएसडीएमए ने लोगों को तेज हवाओं और बारिश के दौरान पेड़ों के नीचे शरण लेने या वहां वाहन खड़े करने से बचने की सलाह दी। स्थानीय निकायों, राजस्व अधिकारियों और निर्वाचित प्रतिनिधियों से जरूरत पड़ने पर प्रभावित लोगों को राहत शिविरों में पहुंचाने की व्यवस्था करने को कहा गया है।
PM Modi के वादे के बाद भी Jammu Kashmir को राज्य का दर्जा न मिलने से निराश हैं उमर अब्दुल्ला
जम्मू-कश्मीर का राज्य का दर्जा वादे के अनुरूप बहाल किए जाने में हो रही देरी पर मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने शनिवार को गहरी निराशा जताई। उन्होंने कहा कि केंद्र शासित प्रदेश में इस मुद्दे को लेकर ‘‘गुस्सा और निराशा’’ केवल मोदी सरकार के खिलाफ नहीं है, बल्कि उन्हें खुद भी इसकी वजह से ‘‘बहुत बड़ा राजनीतिक नुकसान’’ उठाना पड़ा है। अब्दुल्ला ने कहा कि राज्य का दर्जा बहाल करने में लगातार हो रही देरी से जम्मू-कश्मीर की जनता में निराशा पैदा हुई है, जो केवल केंद्र सरकार तक सीमित नहीं है।
अब्दुल्ला ने यह भी स्वीकार किया कि उनकी अपनी राजनीतिक विश्वसनीयता को भी बड़ा नुकसान पहुंचा है, क्योंकि वह लगातार ‘‘उन गलतियों की कीमत चुका रहे हैं, जो उनकी नहीं हैं।’’ मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य का दर्जा जल्द बहाल कराने की उम्मीद में केंद्र सरकार के साथ रचनात्मक संबंध बनाने की उनकी शुरुआती रणनीति ने स्थानीय लोगों के बीच उनकी राजनीतिक साख को गंभीर रूप से नुकसान पहुंचाया है। अब्दुल्ला ने ‘द वायर’ के लिए पत्रकार करण थापर को दिए एक साक्षात्कार में कहा, ‘‘मैंने इसके लिए अपनी बहुत बड़ी राजनीतिक साख दांव पर लगा दी। मुझे अच्छी तरह पता है कि मैंने इसका एक बड़ा हिस्सा खो दिया है।’’ उन्होंने कहा, ‘‘मैं उन गुनाहों की सजा भुगतूंगा जो मेरे नहीं हैं, और मैं फिर से वह सलीब उठाऊंगा क्योंकि उसे उठाना मेरी ही जिम्मेदारी है।’’ जम्मू-कश्मीर को सही समय पर राज्य का दर्जा बहाल करने की केंद्र की अस्पष्ट समय-सीमा की आलोचना करते हुए मुख्यमंत्री ने इस प्रक्रिया की तुलना ऐसे लक्ष्य से की, जो लगातार आगे खिसकता जा रहा है।
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उन्होंने कहा, ‘‘यह मैराथन दौड़ की तरह है। इसे 42 किलोमीटर में पूरा करने के बजाय, जब भी आप अंतिम रेखा के करीब पहुंचते हैं, वे उसे आगे खिसका देते हैं।’’ उन्होंने केंद्र सरकार से स्पष्ट मानदंड तय करने का आग्रह किया, ताकि उनकी सरकार के पास एक निश्चित लक्ष्य हो। अब्दुल्ला ने इस तर्क को भी खारिज किया कि जब तक आतंकवाद पूरी तरह खत्म नहीं हो जाता, तब तक राज्य का दर्जा बहाल नहीं किया जा सकता।
उन्होंने कहा कि केंद्र शासित प्रदेश में काम कर रहे सुरक्षा तंत्र पर उनकी निर्वाचित सरकार का कोई नियंत्रण नहीं है। उन्होंने कहा, ‘‘इस तर्क के साथ समस्या यह है कि आप वास्तव में ऐसी सरकार को सजा दे रहे हैं, जिसकी इसमें कोई भूमिका नहीं है। जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद इसलिए नहीं है कि वहां निर्वाचित सरकार है।
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वास्तव में जम्मू-कश्मीर में इस समय जो आतंकवाद रोधी तंत्र काम कर रहा है, उससे हमारा कोई लेना-देना नहीं है।’’ उन्होंने तर्क दिया कि ऐसा कहकर ‘‘आप वास्तव में यह कह रहे हैं कि जब पाकिस्तान आतंकवाद को समर्थन देना बंद कर देगा, तब आप राज्य का दर्जा बहाल करेंगे। यानी आप यह फैसला हमारे देश की राजधानी से हटाकर इस्लामाबाद को सौंप रहे हैं।’’ प्रशासनिक कामकाज में आ रही बाधाओं को रेखांकित करते हुए अब्दुल्ला ने विधानसभा वाले केंद्र शासित प्रदेश को ‘‘विसंगति’’ बताया। उन्होंने कहा कि जम्मू-कश्मीर ऊर्जा विकास निगम और शेर-ए-कश्मीर चिकित्सा विज्ञान संस्थान जैसे प्रमुख संस्थान अब भी उपराज्यपाल के अधिकार क्षेत्र में हैं।
उन्होंने कहा, ‘‘विधानसभा वाले केंद्र शासित प्रदेश से खराब शासन व्यवस्था का कोई और रूप नहीं हो सकता। कृपया केंद्र शासित प्रदेश रखें, लेकिन उन्हें विधानसभा न दें।’’ उन्होंने कहा कि उनके मंत्रिमंडल के पास अपने प्रशासनिक सचिवों का चयन करने या महाधिवक्ता की नियुक्ति करने तक का अधिकार नहीं है। अनुच्छेद 370 पर अपना रुख कमजोर करने के आरोपों का जवाब देते हुए अब्दुल्ला ने कहा कि संवैधानिक शक्तियों के किसी भी विभाजन के लिए राज्य का दर्जा एक पूर्व कानूनी शर्त है।
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उन्होंने कहा, ‘‘अनुच्छेद 370 मूल रूप से केंद्र सरकार और राज्य सरकार के बीच शक्तियों का बंटवारा था। जब आप राज्य ही नहीं हैं तो राज्य सूची कैसे हो सकती है? अनुच्छेद 370 की बहाली से पहले राज्य का दर्जा बहाल होना जरूरी है।’’ केंद्र सरकार के वादे पर अब्दुल्ला ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने क्षेत्र के अपने दौरों के दौरान व्यक्तिगत रूप से राज्य का दर्जा बहाल करने की प्रतिबद्धता जताई थी।
उन्होंने कहा कि यह कोई सामान्य राजनीतिक आश्वासन नहीं, बल्कि स्पष्ट रूप से ‘‘मोदी का वादा’’ था।
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