कौन है अली घमसारी जो जंग के बीच ‘तार’ से दे रहे शांति का संदेश, ईरान के पावर प्लांट में 48 घंटे से बैठे
जहां एक ओर ईरान में मिसाइलों की गड़गड़ाहट, बम धमाके और युद्ध की आशंका से माहौल भयभीत है, वहीं दूसरी ओर एक कलाकार शांति का अनोखा संदेश दे रहा है. अली घमसारी तेहरान के दमावंद पावर प्लांट में बैठकर अपने ‘तार’ वाद्ययंत्र के सुरों से दुनिया को एक अलग दिशा दिखाने की कोशिश कर रहे हैं.
पावर प्लांट बना संगीत का मंच
दमावंद पावर प्लांट, जो तेहरान की ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा पूरा करता है, इन दिनों सिर्फ बिजली का ही नहीं, बल्कि शांति का भी केंद्र बन गया है. अली घमसारी ने इस संवेदनशील जगह को इसलिए चुना क्योंकि यह संभावित हमलों के निशाने पर है. उनका मानना है कि संगीत के जरिए वह हिंसा के माहौल में सकारात्मक ऊर्जा ला सकते हैं.
उन्होंने एक वीडियो संदेश में कहा कि वह यहां एक कलाकार के रूप में मौजूद हैं, किसी राजनीतिक एजेंडे के तहत नहीं. उनका उद्देश्य केवल इतना है कि उनके संगीत की ध्वनि लोगों के दिलों तक पहुंचे और शायद युद्ध की आग को ठंडा करने में मदद करे.
ट्रंप की धमकियों के बीच उम्मीद की आवाज
जब डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को कड़ी चेतावनी देते हुए पावर प्लांट्स और इंफ्रास्ट्रक्चर को निशाना बनाने की बात कही, तब भी घमसारी वहीं बैठे अपने ‘तार’ के सुर छेड़ रहे थे. उनका यह कदम सिर्फ साहस नहीं, बल्कि एक गहरा संदेश है कि कला और संगीत किसी भी संघर्ष से ऊपर हो सकते हैं.
कौन हैं अली घमसारी?
अली घमसारी का जन्म 19 सितंबर 1983 को तेहरान में हुआ था. बचपन से ही संगीत में रुचि रखने वाले घमसारी ने कम उम्र में ही अपनी अलग पहचान बना ली थी. उन्होंने 17 साल की उम्र में ‘सरमद’ नाम से एक ऑर्केस्ट्रा की स्थापना की और संगीत रचना की दुनिया में कदम रखा.
उन्होंने तेहरान यूनिवर्सिटी से ईरानी वाद्ययंत्रों की पढ़ाई की और कई सफल एल्बम तैयार किए. उनका पहला एल्बम “नग्श खियाल” काफी लोकप्रिय रहा, जिसे मशहूर गायक हुमायूं शाजारियन ने अपनी आवाज दी.
वैश्विक मंच पर पहचान
अली घमसारी ने सिर्फ ईरान ही नहीं, बल्कि अमेरिका, यूरोप और अफ्रीका के कई देशों में भी अपनी प्रस्तुति दी है. उन्होंने कई अंतरराष्ट्रीय कलाकारों के साथ सहयोग किया और ईरानी संगीत को वैश्विक पहचान दिलाने में अहम भूमिका निभाई.
संगीत के जरिए शांति का संदेश
घमसारी का मानना है कि युद्ध कभी समाधान नहीं होता. उनका यह कदम दुनिया को यह याद दिलाता है कि जब सब कुछ टूट रहा हो, तब भी कला और संगीत इंसानियत को जोड़ने का काम कर सकते हैं.
एक कलाकार, एक उम्मीद
जंग के इस भयावह माहौल में अली घमसारी की पहल एक उम्मीद की किरण है। यह सिर्फ एक संगीत प्रदर्शन नहीं, बल्कि एक संदेश है कि इंसानियत, संवेदना और शांति की आवाज किसी भी हथियार से ज्यादा ताकतवर हो सकती है.
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