पश्चिम बंगाल चुनाव से पहले कटे वोटरों के नाम तो ममता को लगी मिर्ची, 8 अप्रैल को ये कदम उठाएगी TMC
कोलकाता से लेकर दिल्ली तक पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव से पहले राजनीतिक माहौल गर्म हो चुका है. मतदाता सूची से नाम हटाए जाने को लेकर तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) ने गंभीर सवाल उठाए हैं. इस मुद्दे को लेकर पार्टी का एक प्रतिनिधिमंडल दिल्ली में चुनाव आयोग से मुलाकात करने जा रहा है, जिससे यह साफ है कि मामला अब राष्ट्रीय स्तर पर तूल पकड़ चुका है.
दिल्ली में चुनाव आयोग से होगी अहम मुलाकात
टीएमसी का चार सदस्यीय डेलिगेशन चुनाव आयोग से मुलाकात करेगा. इस प्रतिनिधिमंडल में डेरेक ओ'ब्रायन, मेनका गुरुस्वामी, सागरिका घोष और साकेत गोखले शामिल हैं. बैठक का समय सुबह 10 बजे तय किया गया है. पार्टी का कहना है कि वह मतदाता सूची में कथित गड़बड़ियों और नाम हटाने के मुद्दे को जोरदार तरीके से उठाएगी.
डेरेक ओ’ब्रायन का तीखा बयान
टीएमसी सांसद डेरेक ओ'ब्रायन ने चुनाव आयोग पर सीधा हमला बोलते हुए कहा कि यदि 27 लाख मतदाताओं के नाम हटाए जाते हैं तो यह एक गंभीर अपराध माना जाएगा. उन्होंने इसे लोकतंत्र के लिए खतरा बताते हुए आयोग की निष्पक्षता पर सवाल खड़े किए.
सागरिका घोष ने उठाए गंभीर सवाल
टीएमसी सांसद सागरिका घोष ने भी इस मुद्दे पर चिंता जताई. उन्होंने कहा कि लाखों मतदाताओं के नाम हटने से सबसे बड़ा सवाल यह है कि अगर कोई वास्तविक मतदाता सूची से बाहर हो गया है, तो वह दोबारा अपना नाम कैसे दर्ज कराएगा. उन्होंने चुनाव आयोग पर पक्षपातपूर्ण रवैया अपनाने का आरोप लगाया.
चुनाव आयोग की भूमिका पर उठे सवाल
टीएमसी नेताओं का कहना है कि चुनाव आयोग ने उनकी शिकायतों पर समय पर प्रतिक्रिया नहीं दी. पार्टी की वरिष्ठ नेता चंद्रिमा भट्टाचार्य द्वारा समय मांगे जाने के बावजूद जवाब नहीं मिला. हालांकि, जब विरोध और धरने की घोषणा की गई, तब आयोग ने बैठक का समय दिया. इसे टीएमसी ने दबाव में लिया गया फैसला बताया.
चुनाव की तारीखें और बढ़ती चिंता
पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव 23 और 29 अप्रैल को होने हैं, जबकि मतगणना 4 मई 2026 को होगी. चुनाव से पहले पहली बार जिलावार नई मतदाता सूची जारी की गई है, जिसमें करीब 91 लाख नाम हटाए जाने की बात सामने आई है.
लोकतंत्र और पारदर्शिता पर बहस
यह पूरा विवाद सिर्फ राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप तक सीमित नहीं है, बल्कि यह चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता और निष्पक्षता पर भी सवाल खड़ा करता है. आने वाले दिनों में चुनाव आयोग और टीएमसी के बीच यह टकराव और तेज हो सकता है, जिसका सीधा असर चुनावी माहौल पर पड़ना तय है.
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