UP Top News Today: शिक्षामित्रों-अनुदेशकों का मानदेय बढ़ा, 22 प्रस्तावों पर योगी कैबिनेट की लगी मुहर
आज कैबिनेट ने बहुत परिवहन विभाग के लिए एक बहुत बड़ा कर्मकारी विषय परिवर्तन आएगा. 49 जन बस अड्डों को आज हवाई अड्डा की तरह बनाने के लिए पीपीपी मॉडल पर स्वीकृति प्राप्त हो गई है. हम लोग बहुत जल्द इसका जो है टेंडर जो है फ्लोट कर देंगे और टेंडर होने के बाद जो भी विकासकर्ता आएंगे उसकी फिर से स्वीकृति हम लोग कैबिनेट में ले जाएंगे. जो भी चयन जिनका होगा यह टेंडर के बेस पर होगा. करीब करोड़ से ज्यादा इसमें निवेश आएगा. पहला जो हमने किया था उसमें 2500 करोड़ का निवेश था और इस बार वाले में मिनिमम 4000 करोड़ का निवेश आने का प्रस्ताव है.
10 हेक्टेयर जमीन में से दो हेक्टेयर जमीन
यह पहला प्रस्ताव था. दूसरा दूसरा प्रस्ताव था हमारा सिकंद हाथरस डिस्ट्रिक्ट में सिकंदरा राऊ जगह पर कृषि विभाग का दो हेक्टेयर जमीन हमने जो बस अड्डा के लिए निशुल्क जो है कैबिनेट में ले गए थे और जिसमें कृषि विभाग के 10 हेक्टेयर जमीन में से दो हेक्टेयर जमीन हमको निशुल्क प्राप्त हुआ और तीसरा एक नरोरा बुलंदशहर में डिवाई में सिंचाई
विभाग की जमीन में से एक पॉइंट 12 हेक्टेयर जमीन हम ले रहे हैं.
23 लाख तक लोग प्रतिदिन यात्रा करते हैं
ऐसे उनके पास जमीन 43 हेक्टेयर थी. लेकिन हमको उतने ही बस अड्डे की जरूरत थी. उसके लिए हमने निशुल्क लिया है. और तीसरा तुलसीपुर बलरामपुर में हरैया तराहा और देवी पाटन मंदिर के बीच की जमीन है. ये राजस्व की भूमि थी जो अभी पिरोडी के पास थी. उसमें हमने दो हेक्टेयर जमीन बस अड्डा बनाने के लिए हम लिए हैं और यह सब होने से अब जो जनपद हमारे अभी जहां बस अड्डे नहीं थे वहां पर भी बस अड्डे हमारे बन जाएंगे. ये तीन प्रस्ताव हमारे जो बात है वीवीआई जनता वो तो आपके जनता यार बन के रह जाएंगे या कुछ और स्थिति होगी मुझे लगता नहीं है वो जनता वो वीवीआईपी में है. वीवीआई देखिए क्या है कि जैसे हम लोग ये चाहते हैं कि यदि कोई हमारा यात्री आए प्रतिदिन अभी हमारे परिवहन विभाग से मिनिमम 15 लाख और मैक्सिमम 23 लाख तक लोग प्रतिदिन यात्रा करते हैं. कभी-कभी जब त्यौहार होता है दिवाली, होली इस तरह के तो 30 लाख, 35 लाख की भी संख्या हो जाती है उनकी यात्रा करने के लिए. हम लोग चाहते हैं कि कोई आए.
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अब आसमान से भी होगा बिहार भ्रमण, सरकार शुरू करने जा रही 'हेली टूरिज्म सेवा'; जानिए क्या है पूरा प्लान
बिहार अपने ऐतिहासिक, धार्मिक और प्राकृतिक पर्यटन स्थलों के लिए देशभर में जाना जाता है. बोधगया में महात्मा बुद्ध से जुड़ी sites, नालंदा में प्राचीन विश्वविद्यालय, राजगीर की प्राकृतिक खूबसूरती और विक्रमशिला के बौद्ध इतिहास से यहां हर साल लाखों लोग जुड़ते हैं. लेकिन इन जगहों तक पहुंचने में अक्सर लंबा समय लगता है. सड़क यातायात, ट्रेन कनेक्टिविटी और दूरी की वजह से पर्यटकों को यात्रा करते‑करते थकावट महसूस होती है.
क्या है इस योजना का मकसद
अब इस समस्या को ध्यान में रखते हुए बिहार सरकार और केंद्रीय नागरिक उड्डयन विभाग ने एक बहुत बड़ा कदम उठाया है. राज्य में हेली टूरिज्म सेवा शुरू करने की योजना लाई जा रही है. इसका मकसद न केवल प्रमुख पर्यटन स्थलों को जोड़ना है, बल्कि यात्रा को तेज, आरामदायक और अधिक सुरक्षित बनाना भी है.
क्या है हेली टूरिज्म योजना?
हेली टूरिज्म यानी हेलीकॉप्टर से पर्यटन. इस योजना के तहत बिहार के आठ प्रमुख पर्यटन स्थलों को हेलीकॉप्टर सेवाओं से जोड़ा जाएगा. हेलीकॉप्टर सेवा से अब यात्रियों को सड़कों पर घंटों व्यतीत नहीं करना पड़ेगा. यह सुविधा विशेष रूप से उन लोगों के लिए फायदेमंद होगी, जो लंबी यात्रा से बचना चाहते हैं जैसे सीनियर सिटिजन (बुजुर्ग लोग), विदेशी पर्यटक, और वीआईपी यात्री.
इस सेवा की खास बात यह है कि यात्री 5 से 6 लोग एक हेलीकॉप्टर में आसानी से बैठ सकते हैं. इसका मतलब यह हुआ कि छोटी‑छोटी यात्राएं भी आराम से और छोटी अवधि में पूरी की जा सकेंगी.
इन प्रमुख पर्यटन स्थलों को जोड़ा जाएगा:
हेली टूरिज्म के तहत बिहार के ये मुख्य स्थान शामिल होंगे —
1. बोधगया: बुद्ध धर्म का सबसे पवित्र स्थल
2. नालंदा: प्राचीन नालंदा विश्वविद्यालय
3. वैशाली: ऐतिहासिक संघस्थान
4. राजगीर: प्रकृति और संस्कृति का मेल
5. पटना साहिब: सिख धर्म का प्रमुख तीर्थ
6. पावापुरी: जैन धर्म का पवित्र स्थल
7. वाल्मीकि टाइगर रिज़र्व: वन्य जीवन और रोमांच
8. विक्रमशिला विश्वविद्यालय: बौद्ध शिक्षा की अनूठी पहचान
इन स्थानों को हवाई मार्ग से जोड़ने के कारण न केवल यात्रा सरल होगी, बल्कि पर्यटकों का अनुभव भी पहले से कहीं बेहतर और यादगार होगा.
यात्रा में कैसे बदलाव आएगा?
अगर आप सोचें कि सड़क मार्ग से 6‑8 घंटे में पहुंचना मुश्किल है, तो हेली से वह यात्रा केवल कुछ मिनटों में पूरी हो सकती है. इससे पर्यटक अपने समय का बेहतर उपयोग करेंगे और एक ही दिन में ज़्यादा से ज़्यादा स्थलों को आसानी से देख पाएंगे. बुजुर्ग यात्री और विदेशी पर्यटक अब थकान, लंबी यात्राओं और कठिन रास्तों से मुक्त होंगे. जब यात्रा कम समय में होगी, तो पर्यटकों की संख्या बढ़ेगी और बिहार पर्यटन के नए मानचित्र पर और ऊंचे पायदान पर पहुंच सकता है.
सरकार की तैयारी और बुनियादी ढांचा
नागरिक उड्डयन विभाग ने इस परियोजना के लिए एक्सप्रेशन ऑफ इंटरेस्ट (EOI) जारी कर दिया है. मतलब यह हुआ कि हेलीकॉप्टर ऑपरेटर कंपनियों से प्रस्ताव आमंत्रित किये जा चुके हैं. जिन कंपनियों को चुना जाएगा, उनके साथ 5 साल के अनुबंध किये जाएंगे. अगर यह सेवा अच्छा प्रदर्शन करती है, तो इसे और आगे भी बढ़ाया जा सकेगा.
सिर्फ हेलीकॉप्टर की सेवा ही नहीं, बल्कि नई हेलीपैड्स का निर्माण, हवाई सुरक्षा और अन्य आवश्यक बुनियादी ढांचे का विकास भी किया जाएगा. इससे एयर कनेक्टिविटी बेहतर होगी और भविष्य में छोटे‑छोटे शहरों तथा पर्यटन स्थलों तक सीधी हवाई पहुंच संभव हो सकेगी.
अर्थव्यवस्था और रोजगार पर असर
हेली टूरिज्म से न केवल यात्रा और पर्यटन को सुविधा मिलेगी, बल्कि बिहार की अर्थव्यवस्था को भी लाभ मिलेगा. स्थानीय मार्गदर्शक, ड्राइवर, होटल उद्योग, रेस्टोरेंट और होमस्टे संचालन को लाभ मिलेगा. पर्यटन की संख्या बढ़ने से स्थानीय व्यवसाय और छोटे कारोबार आगे बढेंगे. इस पहल से नए रोजगार के अवसर उत्पन्न होंगे जैसे हेलीकॉप्टर कर्मचारियों, सुरक्षा कर्मियों और परिचालन स्टाफ की मांग बढ़ेगी.
भविष्य का परिदृश्य
विशेषज्ञ मानते हैं कि अगर हेली टूरिज्म को सफलतापूर्वक लागू किया जाता है, तो यह बिहार को अंतरराष्ट्रीय पर्यटन मानचित्र पर एक नई पहचान देगा. सिर्फ भारत ही नहीं, बल्कि विदेशों से आने वाले पर्यटक भी अब बिहार को चुनेगें अपने यात्रा गंतव्य के रूप में. हेली टूरिज्म सेवा न केवल यात्रा को तेज और आरामदायक बनाएगी, बल्कि यह बिहार के पर्यटन उद्योग का चेहरा बदलने वाली एक बड़ी और महत्वपूर्ण पहल साबित होगी.
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