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Arjun Tendulkar की नेट्स में दिखी शानदार फॉर्म, घातक यॉर्कर से कप्तान ऋषभ पंत को किया परेशान- Video

महान क्रिकेटर सचिन तेंदुलकर के बेटे अर्जुन तेंदुलकर बेहतरीन फॉर्म में नजर आ रहे हैं। वह आईपीएल 2026 में लखनऊ सुपर जाएंट्स का हिस्सा हैं। जहां वह नेट्स पर लगातार प्रैक्टिस करते हुए देखे जाते हैं हालांकि, उन्हें अभी तक प्लेइंग इलेवन में खेलने का मौका नहीं मिला है। वहीं उनका एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है जिसे लखनऊ सुपर जाएंट्स ने X पर शेयर किया है। इस वीडियो में देखा जा सकता है कि अर्जुन कप्तान ऋषभ पंत को अपनी घातक यॉर्कर से परेशान कर रहे हैं। फिलहाल, 9 अप्रैल को लखनऊ का सामना केकेआर के खिलाफ होगा। 

अर्जुन तेंदुलकर केकेआर के खिलाफ मुकाबले से पहले अपने प्रदर्शन से सबका दिल जीत रहे हैं। ऐसे में उन्हें लखनऊ के लिए डेब्यू का मौका मिलने की उम्मीद जताई जा रही है। 

दरअसल 26 वर्षीय अर्जुन तेंदुलकर लखनऊ सुपर जाएंट्स के ट्रेनिंग सेशन में शानदार गेंदबाजी करते हुए दिख रहे हैं। इस दौरान अर्जुन लगातार 6 गेंद पर 6 खतरनाक यॉर्कर फेंकते हुए भी दिख रहे हैं। जहां उनकी यॉर्कर इतनी घातक रही कि कप्तान ऋषभ पंत अपना पैर बचाते हुए नजर आए। उनके अलावा अब्दुल समद भी उनकी यॉर्कर का सामना करते हुए संघर्ष करते दिखे। इंटरनेशनल क्रिकेट में ऐसी यॉर्कर जसप्रीत बुमराह को फेंकते हुए देखा गया है। ऐसे में अर्जुन तेंदुलकर को बुमराह की परछाई कहा जा रहा है। 
 
बता दें कि, मुंबई इंडियंस के साथ आईपीएल में कई सालों तक जुड़े रहने के बाद अर्जुन मौजूदा सीजन में लखनऊ सुपर जाएंट्स का हिस्सा हैं। नवंबर 2025 में हुए ट्रेड डील के तहत लखनऊ ने अर्जुन को उनकी मौजूदा फीस 30 लाख रुपये में अपनी टीम में शामिल किया था। अब तक अर्जुन ने आईपीएल के कुल 5 मैच खेले और 3 विकेट लिए हैं।  

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राहुल गांधी ने केरल की नर्सों से की बातचीत, स्वास्थ्यकर्मियों को आने वाली चुनौतियों पर चर्चा

नई दिल्ली, 7 अप्रैल (आईएएनएस)। लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने मंगलवार को केरल की नर्सों के साथ बातचीत की। इस दौरान राहुल गांधी ने उन्हें स्वास्थ्य सेवा प्रणाली का नींव बताया। उन्होंने आगे कहा कि उनका समर्पण, निस्वार्थ भाव और सहानुभूति ही वह चीज है, जिसके कारण परिवार अपने प्रियजनों को उनकी देखभाल में छोड़कर सुरक्षित महसूस करते हैं।

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट में राहुल गांधी ने कहा, नर्सें हमारी स्वास्थ्य सेवा प्रणाली की नींव हैं। उनका समर्पण, निस्वार्थ भाव और सहानुभूति ही वह वजह है जिससे परिवार अपने प्रियजनों को उनकी देखभाल में सौंपते हुए सुरक्षित महसूस करते हैं। केरल की नर्सें पूरी निष्ठा के साथ इस भावना को दर्शाती हैं। हाल ही में, उनमें से कुछ के साथ बातचीत करना मेरे लिए सौभाग्य की बात थी। हमारे लोगों और हमारे देश के लिए वे जो कुछ भी करती हैं, उसके लिए मैं उनका तहे दिल से आभारी हूं।

राहुल गांधी की यह टिप्पणी एक वीडियो बातचीत के दौरान सामने आई, जिसमें राहुल गांधी ने नर्सों के एक समूह के साथ बातचीत की और भारत में स्वास्थ्य सेवा से जुड़े पेशेवरों को पेश आने वाली वास्तविकताओं और चुनौतियों पर चर्चा की। इस बातचीत के दौरान, नर्सों ने कई व्यवस्थागत मुद्दों को उजागर किया, जिनमें समय की कमी, कर्मचारियों की कमी और करियर में आगे बढ़ने के सीमित अवसर शामिल थे।

एक नर्स ने बताया कि काम की भारी जिम्मेदारियों की वजह से अक्सर मरीजों के साथ ठीक से बातचीत करने के लिए बहुत कम समय मिल पाता है। उन्होंने कहा कि मरीजों की मुश्किलों को समझना जरूरी है, लेकिन काम के बोझ की वजह से हमारे पास अक्सर ऐसा करने के लिए काफी समय नहीं होता।

विदेश में मिलने वाले मौकों से जुड़े एक सवाल के जवाब में कुछ नर्सों ने बताया कि भले ही कई लोग भारत छोड़कर नहीं जाना चाहते, लेकिन यूके जैसे देशों में काम करने के बेहतर हालात और व्यवस्थित सिस्टम पेशेवरों को अपनी ओर खींचते हैं। एक नर्स ने बताया कि यूके में भारत के टुकड़ों में बंटे शेड्यूल के मुकाबले, लंबे लेकिन लगातार शिफ्ट और हर घंटे के हिसाब से मिलने वाली सैलरी का सिस्टम ज्यादा बेहतर आर्थिक और पेशेवर स्थिरता देता है।

एक अन्य नर्स ने भारत में करियर में आगे बढ़ने के सीमित अवसरों की ओर ध्यान दिलाया और कहा कि विशेषज्ञता हासिल करने के लिए अक्सर उच्च योग्यताओं, जैसे कि मास्टर डिग्री, की आवश्यकता होती है, जिससे करियर में आगे बढ़ना और भी चुनौतीपूर्ण हो जाता है।

जब भारत की स्वास्थ्य सेवा प्रणाली में मुख्य समस्याओं के बारे में पूछा गया, तो नर्सों ने कर्मचारियों की भारी कमी पर जोर दिया। एक नर्स ने कहा कि अनुपात बहुत ज्यादा है। अक्सर लगभग 20 नर्सों को ही करीब 100 मरीजों को संभालना पड़ता है और संसाधनों पर पड़ रहे दबाव को रेखांकित किया।

कोविड-19 महामारी के दौरान के अपने अनुभव साझा करते हुए नर्सों ने याद किया कि आपात स्थितियों में उन्होंने अपनी सामान्य भूमिकाओं से बढ़कर काम किया। एक नर्स ने कहा कि संकट के कारण कोविड के दौरान हमने सर्जरी भी कीं। हमने कभी कल्पना भी नहीं की थी कि स्थिति इतनी गंभीर हो जाएगी।

उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि भारत में इस पेशे के विकास के लिए नर्सिंग शिक्षा में सुधार बहुत जरूरी है। केरल के नर्सिंग समुदाय की खूबियों पर प्रकाश डालते हुए, प्रतिभागियों ने अपनी प्रतिष्ठा के पीछे मुख्य कारकों के रूप में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, कड़ी मेहनत और सहानुभूति को श्रेय दिया।

--आईएएनएस

पीएसके

डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.

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  Sports

नजफगढ़ का ‘प्रिंस’: जिसने आईपीएल का सपना पूरा करने के लिए कांस्टेबल की परीक्षा छोड़ दी थी

 कुछ साल पहले तक नजफगढ़ में रहने वाले रेलवे सुरक्षा बल के सहायक सब इंस्पेक्टर (एएसआई) राम निवास यादव अपने सबसे छोटे बेटे प्रिंस के भविष्य को लेकर बेहद चिंतित थे, जिसकी दिलचस्पी केवल टेनिस बॉल टूर्नामेंट में यॉर्कर गेंदबाजी करने में थी। लेकिन इस युवा क्रिकेटर को खुद पर भरोसा था और उसने अपने पिता से सीधे शब्दों में कह दिया, ‘‘आप मेरी चिंता करना छोड़ दो। मैं अपने से कुछ कर लूंगा।’’ अब बात करते हैं 2026 की। वह बेपरवाह दिखने वाला लड़का अपने वादे पर खरा उतर चुका है।

लखनऊ सुपर जायंट्स के इस स्विंग गेंदबाज का नाम है प्रिंस यादव, जो इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल) में अक्षर पटेल और ईशान किशन जैसे अनुभवी भारतीय बल्लेबाजों के डिफेंस को भेदने में सफल रहा। प्रिंस के पिता रामनिवास ने कहा, ‘‘कोई भी पिता अपने बच्चों के भविष्य को लेकर चिंतित होगा और मैं भी था। 18 साल की उम्र तक उसने चमड़े की गेंद से एक बार भी गेंदबाजी नहीं की थी। मैंने उसे दिल्ली पुलिस के कांस्टेबल की परीक्षा में बैठने के लिए मजबूर किया। वह शारीरिक रूप से फिट था, लेकिन लिखित परीक्षा के लिए अच्छी तरह से तैयार नहीं था क्योंकि उसका ध्यान कहीं और था।’’

रामनिवास ने आखिर अपने बेटे की जिद मान ली क्योंकि उनके पास अपने बेटे का साथ देने के अलावा कोई और विकल्प नहीं था। उन्होंने कहा, ‘‘बेटे की ज़िद है और हमें पूरा करना था। एक एएसआई के वेतन में कितना ही गुज़ारा हो पाता है। लेकिन मुझे खुशी है कि मैंने उसे अपनी इच्छा पूरी करने दी।’’ प्रिंस के शानदार प्रदर्शन के बाद अब नजफगढ़ के खेड़ा डाबर गांव से भी लोग उनके घर पर बधाई देने के लिए आने लगे हैं।

उन्होंने कहा, ‘‘पहले हमारे इस इलाके को लोग इसलिए जानते थे क्योंकि पूर्व राष्ट्रपति साहिबा (प्रतिभा पाटिल) चौधरी ब्रह्म प्रकाश आयुर्वेदिक संस्थान का उद्घाटन करने (2012में) यहां आई थी। अब हमारा इलाका क्रिकेट के लिए फेमस हो गया है।’’ राम निवास के अनुसार प्रिंस के पहले और अब तक के एकमात्र कोच अमित वशिष्ठ और भारत के अंडर-19 विश्व कप विजेता तेज गेंदबाज प्रदीप सांगवान ने उनके खेल में निखार लाने में अहम भूमिका निभाई।

उन्होंने कहा, “मैं अमित सर का जितना भी शुक्रिया अदा करूं, कम है। उन्होंने प्रिंस को टेनिस टूर्नामेंट खेलते हुए देखा और उसे नजफगढ़ स्थित अपनी अकादमी से जुड़ने के लिए कहा। प्रदीप जी (सांगवान) भी अमित सर के शिष्य थे और उन्होंने प्रिंस को फिटनेस में मदद की।’’ एक समय ऐसा भी था जब प्रिंस अपनी पीठ पर रेत की बोरी बांधकर धान के खेतों में दौड़ते थे ताकि उनके शरीर का ऊपरी हिस्सा मजबूत बन जाए।

रामनिवास ने कहा, ‘‘प्रदीप ने उसका बहुत मार्गदर्शन किया और अमित सर ने उसके खेल में सुधार किया। मैं डीपीएल (दिल्ली प्रीमियर लीग) और नयी दिल्ली टीम को कैसे भूल सकता हूं। अगर डीपीएल नहीं होता, तो मुझे नहीं लगता कि मेरे बेटे की प्रगति इतनी तेज़ होती। इसलिए मैं डीडीसीए और विजय दहिया सर का भी आभारी हूं।’’

प्रिंस के कोच वशिष्ठ ने कहा,‘‘वह यॉर्कर गेंदें फेंक सकता था और टेनिस बॉल को भी अच्छी गति से स्विंग करा सकता था। जब मैंने उसे देखा तो मैंने उसके दोस्तों से कहा कि वे उसे मुझसे मिलने के लिए कहें। वह पहले से ही 18 साल का था और उसके पास अपनी काबिलियत साबित करने के लिए बहुत कम समय था।’’ वशिष्ठ को लगता है कि प्रिंस की कड़ी मेहनत करने की क्षमता ही उन्हें दूसरों से अलग बनाती है।

उन्होंने कहा, ‘‘वह कड़ी मेहनत करने से पीछे नहीं हटा। वह दिल्ली की भीषण गर्मी में भी दो घंटे गेंदबाजी कर सकता है। प्रदीप के साथ काम करने से उसकी फिटनेस में सुधार हुआ है। वह जहीर खान और भरत अरुण से भी टिप्स ले चुका है। अब उसकी सफलता की कोई सीमा नहीं है।

Tue, 07 Apr 2026 17:17:33 +0530

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