Devendra Fadnavis ने Siddhivinayak Temple जांच के दिए आदेश, खंगाला जाएगा 5 साल का रिकॉर्ड
महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने मुंबई के प्रसिद्ध सिद्धिविनायक मंदिर में कथित दान अनियमितताओं की व्यापक जांच के आदेश दिए हैं। एक अधिकारी ने शनिवार को यह जानकारी दी। अधिकारियों ने बताया कि मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को मंदिर के पिछले पांच वर्षों के रिकॉर्ड की जांच करने का निर्देश दिया है।
यह निर्देश महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) प्रमुख राज ठाकरे के उस आरोप के बाद आया है, जिसमें उन्होंने दावा किया था कि मंदिर से हर साल करीब 18 करोड़ रुपये की हेराफेरी की गई। इसके बाद नौ कर्मचारियों की गिरफ्तारी हुई थी और उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने स्वतंत्र जांच की मांग की थी। अधिकारियों के अनुसार, सिद्धिविनायक मंदिर न्यास के एक प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री फडणवीस से मुलाकात कर वर्ष 2023 से 2026 के बीच हुए चढ़ावे और आय का विस्तृत ब्योरा दिया।
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इसके बाद मुख्यमंत्री ने जांच के आदेश दिए। उन्होंने बताया कि फडणवीस ने जल्द से जल्द जांच रिपोर्ट सौंपने को कहा है। पिछले महीने उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने भी मामले में स्वतंत्र जांच की मांग करते हुए अधिकारियों को प्रक्रिया शुरू करने के निर्देश दिए थे।
Mathura Janmabhoomi विवाद में दोनों पक्षों की बात नहीं बनी, 18 अगस्त को फिर होगी वार्ता
उत्तर प्रदेश के मथुरा स्थित श्रीकृष्ण जन्मभूमि-शाही ईदगाह विवाद में उच्चतम न्यायालय के निर्देश पर दोनों पक्षों के बीच स्थानीय स्तर पर शुक्रवार को हुई वार्ता बेनतीजा रही। अधिवक्ताओं ने शनिवार को यह जानकारी दी। अधिवक्ताओं के अनुसार, दोनों पक्षों ने अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश (चतुर्थ) की अदालत में अपनी-अपनी दलीलें रखीं हालांकि, किसी सहमति पर नहीं पहुंचा जा सका।
अब दोनों पक्षों के बीच 18 अगस्त को फिर वार्ता होगी। उन्होंने बताया कि अगर इस बार भी कोई सकारात्मक समाधान नहीं निकलता है तो मामले में उच्चतम न्यायालय से ही निर्णय की उम्मीद होगी। मथुरा में भगवान श्रीकृष्ण के जन्मस्थान और मंदिर परिसर स्थित शाही ईदगाह को लेकर पिछले कई साल से विवाद बना हुआ है।
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करीब डेढ़ दर्जन वादकारियों ने खुद को भगवान श्रीकृष्ण का अनन्य भक्त बताते हुए दावा किया कि शाही ईदगाह श्रीकृष्ण जन्मभूमि ट्रस्ट के स्वामित्व वाली 13.37 एकड़ भूमि पर स्थित है। उन्होंने उक्त भूमि हिंदू पक्ष को वापस सौंपने का अनुरोध किया है। इन दावों से संबंधित कई मामले इलाहाबाद उच्च न्यायालय और उच्चतम न्यायालय में विचाराधीन हैं।
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अधिवक्ताओं ने बताया कि इन मामलों को सुलह के माध्यम से हल करने के लिए उच्चतम न्यायालय ने दोनों पक्षों को जिला विधिक सेवा प्राधिकरण जरिये आपसी वार्ता कर समाधान निकालने का निर्देश दिया था। अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश (चतुर्थ) की अदालत में चार जुलाई को हिंदू पक्ष ने मुस्लिम पक्ष को उक्त भूमि से ईदगाह हटाकर किसी अन्य स्थान पर निर्माण के लिए भूमि उपलब्ध कराने का प्रस्ताव दिया था हालांकि, मुस्लिम पक्ष का कोई प्रतिनिधि वहां नहीं पहुंचा था। इसके बाद शुक्रवार को फिर वार्ता की तारीख तय की गई थी।
हिंदू पक्ष के अधिवक्ता महेंद्र प्रताप सिंह ने बताया कि इस बार भी उनकी ओर से मुस्लिम पक्ष को अन्यत्र भूमि उपलब्ध कराने और विवादित भूमि मंदिर न्यास को सौंपने का सुझाव दिया गया। वहीं, मुस्लिम पक्ष के प्रतिनिधि और शाही ईदगाह इंतजामिया कमेटी के सचिव अधिवक्ता तनवीर अहमद ने हिंदू पक्ष के प्रस्ताव को खारिज करते हुए वर्ष 1968 में श्रीकृष्ण जन्मस्थान सेवा संघ और इंतजामिया कमेटी के बीच हुए समझौते पर कायम रहने की बात कही। उन्होंने कहा कि जब मामला उच्चतम न्यायालय में विचाराधीन है तो अदालत को ही तथ्यों पर विचार कर यह तय करना चाहिए कि किस पक्ष का दावा सही है।
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उन्होंने कहा कि ऐसे में समझौता वार्ता की आवश्यकता नहीं है। अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश (चतुर्थ) अरविंद कुमार ने अंतिम प्रयास के तौर पर एक अन्य विशेष लोक अदालत आयोजित करने का निर्णय लिया है, जिसके लिए दोनों पक्षों को 18 अगस्त को उपस्थित होकर मामले का समाधान निकालने का अवसर दिया गया है।
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