इमरजेंसी फंड बनाने के लिए काम आएगा 3-6-9 रूल:सैलरीड पर्सन 3 से 6 और फ्रीलांसर्स 9 से 12 महीने का खर्च बचाएं, जानें कैलकुलेशन
किसी भी अचानक आई मुसीबत जैसे मेडिकल इमरजेंसी, कार खराबी या नौकरी जाने की स्थिति में आपकी रोजमर्रा की लाइफस्टाइल और पुरानी सेविंग्स प्रभावित न हों, इसके लिए 'इमरजेंसी फंड' होना बहुत जरूरी है। फाइनेंशियल एक्सपर्ट्स का मानना है कि सही फाइनेंशियल प्लानिंग वही है, जिसमें इमरजेंसी फंड अलग से रखा जाए, ताकि जरूरत पड़ने पर मुख्य सेविंग्स पर असर न पड़े। टैक्स और फाइनेंशियल प्लेटफॉर्म 'क्लियर टैक्स' की रिपोर्ट के मुताबिक सैलरीड क्लास और इरेगुलर इनकम जैसे फ्रीलांसर्स वाले लोग इमरजेंसी फंड तैयार करने के लिए 3-6-9 रूल का इस्तेमाल कर सकते हैं। आइए समझते हैं कि यह रूल कैसे काम करता है और आपको कितना फंड बनाना चाहिए… क्या है इमरजेंसी फंड का 3-6-9 रूल? 3-6-9 रूल एक आसान नियम है, जो आपको अपनी लाइफस्टाइल और जॉब प्रोफाइल के हिसाब से यह बताता है कि आपको कितने महीने का खर्च बचाकर रखना चाहिए: इसके अलावा, अगर परिवार में कोई गंभीर बीमारी है या लोन/ईएमआई चल रही है, तो इमरजेंसी फंड का साइज और बड़ा रखा जा सकता है। एग्जांपल से समझें: कितना पैसा जमा करना होगा? मान लीजिए आपका हर महीने का जरूरी खर्च ₹25,000 है: शुरुआत छोटे से करें, फिर धीरे-धीरे फंड बढ़ाएं अगर एक बार में बड़ा फंड बनाना मुश्किल लग रहा है, तो छोटे टारगेट से शुरुआत करें। समय-समय पर फंड का रिव्यू करना भी जरूरी महंगाई, लोन की किस्तें या जीवनशैली बदलने के साथ हर महीने का खर्च भी बदलता रहता है। इसलिए हर 6 महीने या एक साल में अपने खर्चों का दोबारा हिसाब लगाएं और उसके हिसाब से अपने इमरजेंसी फंड का टारगेट अपडेट करते रहें।
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