Jharkhand News: 77वां वन महोत्सव में शामिल हुए सीएम सोरेन, पर्यावरण संरक्षण को लेकर की बड़ी अपील!
Jharkhand News: झारखंड के रांची में वन महोत्सव 2026 के कार्यक्रम में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने पर्यावरण संरक्षण को लेकर लोगों से बड़ा संकल्प लेने की अपील की. उन्होंने कहा कि पर्यावरण से खिलवाड़ करने की कीमत हर व्यक्ति को चुकानी पड़ेगी. विकास के नाम पर जंगलों की कटाई और गलत प्रजातियों के पेड़ लगाने से प्रकृति को नुकसान पहुंच रहा है. सीएम सोरेन ने कहा कि कई बड़े शहरों में जंगलों को हटाकर कंक्रीट के जंगल खड़े किए जा रहे हैं. उनकी जगह ऐसे पेड़ लगाए जा रहे हैं, जो इंसानों के साथ-साथ पशु-पक्षियों के भी ज्यादा काम नहीं आते. उन्होंने कहा कि झारखंड में अब ऐसे पेड़ लगाने की अनुमति नहीं दी जाएगी, जिनका उपयोग इंसान, जानवर या पक्षी नहीं कर सकें.
हर व्यक्ति लगाए एक फलदार पेड़
मुख्यमंत्री सोरेन ने कार्यक्रम में मौजूद करीब 2000 लोगों से अपने घर या आसपास कम से कम एक फलदार पेड़ लगाने की अपील की. उन्होंने कहा कि पेड़ पर वन महोत्सव 2026 की तारीख जरूर लिखें और पांच साल बाद वह इन पेड़ों को देखने का प्रयास करेंगे. उन्होंने महुआ, कटहल, जामुन और करंज जैसे पेड़ लगाने की सलाह दी. सीएम ने कहा कि पर्यावरण से ही भोजन, पानी और जीवन की जरूरतें पूरी होती हैं. इसलिए पर्यावरण बचाने की जिम्मेदारी केवल सरकार की नहीं, बल्कि हर नागरिक की है. उन्होंने यह भी बताया कि शहरों में पेड़ लगाने को बढ़ावा देने के लिए एक पेड़ लगाने पर पांच यूनिट मुफ्त बिजली देने की योजना की बात कही गई है. उन्होंने लोगों से ‘एक पेड़ अपनों के नाम’ लगाने का संकल्प लेने की अपील की.
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बांग्लादेश में डेंगू का प्रकोप बढ़ा, अब तक 59 लोगों की मौत, 18,000 के करीब पहुंचे मामले
बांग्लादेश में डेंगू के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं. अब तक 59 लोगों की मौत हो गई है जबकि इस साल अब तक 17,880 मामले सामने आए हैं. स्थानीय मीडिया ने स्वास्थ्य महानिदेशालय यानी डायरेक्टरेट जनरल ऑफ हेल्थ सर्विसेज (डीजीएचएस) के हवाले से इसकी जानकारी दी.
ढाका में डेंगू के सबसे अधिक मामले
डीजीएचएस के अनुसार, ढाका डिवीजन इससे सबसे ज्यादा पीड़ित क्षेत्र है. कुल 6,871 दर्ज मामले रिपोर्ट हुए जिसमें से 4,404 मामले तो शहर के ही थे. 3,647 केस के साथ, बारिशाल डिवीजन दूसरे नंबर पर रहा, इसके बाद चटगांव में 3,082 और खुलना में 2,272 केस दर्ज किए गए. ढाका डिवीजन में मृतकों की संख्या भी सबसे अधिक है. सूची में ये सबसे ऊपर है, कुल 26 में से 25 ढाका में हुईं. बांग्लादेश के जाने-माने अखबार 'द डेली स्टार' की रिपोर्ट के मुताबिक, खुलना में 12 लोगों की मौत हुई, इसके बाद चटगांव और मैमनसिंह में क्रमशः सात और छह लोगों ने बीमारी से जान गंवाई.
बांग्लादेश में गंभीर समस्या का रूप ले रहा डेंगू
डेंगू, मच्छर से होने वाली वायरल बीमारी है, जो बांग्लादेश में एक गंभीर स्वास्थ्य समस्या का रूप लेती जा रही है. यह मुख्य रूप से एडीज एजिप्टी मच्छर के काटने से फैलने वाली बीमारी है. नेशनल यूनिवर्सिटी ऑफ बांग्लादेश में जूलॉजी डिपार्टमेंट (प्राणीशास्त्र विभाग) में एसोसिएट प्रोफेसर, जीएम सैफुर रहमान ने कहा कि नवीनतम आंकड़े ढाका के उच्च जनसंख्या घनत्व, लगातार एडीज मच्छर प्रजनन और अपर्याप्त वेक्टर नियंत्रण उपायों के संयोजन को दर्शाते हैं.
महिला कॉलेज में कंटेनर में पाए गए एडीज मच्छर के लार्वा
ज्यादा आबादी, गर्म मौसम और बहुत ज्यादा ब्रीडिंग ग्राउंड का मेल एडीज मच्छरों और डेंगू वायरस दोनों के लिए साल भर फैलने के लिए सही हालात पैदा करता है. यही कारण है कि ढाका एक बड़ा डेंगू हॉटस्पॉट बन गया है. द डेली स्टार ने सैफुर के हवाले से कहा, “कुछ ही दिन पहले, सेंट्रल मेट्रोपॉलिटन विमेंस कॉलेज में जांच के दौरान हमने पाया कि पानी के एक छोटे कंटेनर में एडीज मच्छर के लार्वा मौजूद थे. ऐसी ब्रीडिंग साइट्स पूरे शहर में आम हैं, जिससे पता चलता है कि एडीज मच्छर रिहायशी इलाकों में लगातार बढ़ रहे हैं.”
इस बात पर जोर देते हुए कि मच्छरों को नियंत्रित करने के उपाय बचाव के बजाय ज्यादातर प्रतिक्रिया के रूप में सामने आते रहे हैं, उन्होंने आगे कहा, “सबसे असरदार स्ट्रेटेजी यह होगी कि जब डेंगू का फैलाव काफी कम हो, तब मच्छरों को कंट्रोल करना तेज किया जाए. उस समय, ब्रीडिंग साइट्स कम होते हैं, और ऐसे में उन्हें नियंत्रित करना आसान होता है. हालांकि देखा ये जाता है कि, मच्छरों को कंट्रोल करने की कोशिश आमतौर पर डेंगू सीजन शुरू होने के बाद ही तेज होता है, तब तक संक्रमण काफी तेजी से फैल चुका होता है. ”
लगातार खराब हो रही डेंगू की स्थिति
सैफुर के मुताबिक, बांग्लादेश का एक असरदार, केंद्रीकृत मच्छर नियंत्रण तंत्र बनाने में नाकामयाबी ने देश में डेंगू की स्थिति को और खराब कर दिया है. उन्होंने एक राष्ट्रीय मच्छर नियंत्रण प्राधिकरण बनाने की मांग की, जिसमें एक्सपर्ट एंटोमोलॉजिस्ट हों, जो देश भर में वेक्टर कंट्रोल के तरीकों की निगरानी कर सकें.
उन्होंने चेतावनी दी, "जब तक हम एक समन्वित राष्ट्रीय नियंत्रण प्रणाली नहीं बनाते, डेंगू के मामले बढ़ते रहेंगे." जहांगीरनगर यूनिवर्सिटी में जूलॉजी डिपार्टमेंट के प्रोफेसर कबीरुल बशर ने चेतावनी दी कि अगस्त तक डेंगू के और बढ़ने की आशंका है और सितंबर तक यह बढ़ता रह सकता है. उन्होंने कहा, "हो सकता है कि अगस्त में ये चरम पर न हो. हो सकता है कि इस साल का पीक सितंबर में आए. हम यह कह सकते हैं कि अगस्त और सितंबर तक यह बढ़ता रहेगा."
स्रोत- आईएएनएस
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