ईरान में अमेरिकी पायलट का हाई-रिस्क रेस्क्यू, मिशन के पीछे यूरेनियम चोरी की साजिश या सिर्फ बचाव अभियान?
अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव के बीच एक हाई-प्रोफाइल सैन्य ऑपरेशन ने नई बहस छेड़ दी है. अमेरिकी फाइटर जेट F-15E के गिरने के बाद अमेरिका ने अपने पायलट को दुश्मन के इलाके से सुरक्षित निकाल लिया. लेकिन अब सवाल उठ रहा है क्या यह सिर्फ एक रेस्क्यू मिशन था या इसके पीछे कोई बड़ा मकसद छिपा था? दरअसल इस सवाल उठने के पीछे जो बड़ी वजह है वो ये कि ईरान ने दावा किया है कि अमेरिका सिर्फ अपने पायलट का रेस्क्यू करने नहीं आया था बल्कि यूरेनियम चुराना चाहता था.
फिल्मी अंदाज में हुआ रेस्क्यू
रविवार को अमेरिका ने बेहद जोखिम भरा ऑपरेशन चलाकर अपने पायलट को बचाया. यह मिशन आसान नहीं था, क्योंकि ईरानी सेना और स्थानीय लोग भी पायलट की तलाश में जुटे थे. IRGC ने पायलट को पकड़ने पर इनाम तक घोषित कर दिया था. इसके बावजूद अमेरिकी सेना ने हाईटेक तकनीक और सटीक रणनीति के जरिए अपने सैनिक को सुरक्षित निकाल लिया.
ईरान का आरोप, यूरेनियम चोरी की साजिश
इस ऑपरेशन के बाद ईरान ने गंभीर आरोप लगाए हैं. इस्माइल बघाई ने दावा किया कि यह मिशन केवल पायलट को बचाने के लिए नहीं था, बल्कि इसका उद्देश्य ईरान के संवर्धित यूरेनियम को हासिल करना भी हो सकता था. उनका कहना है कि इस्फहान प्रांत में हुए इस अभियान को 'डिसेप्शन ऑपरेशन' यानी धोखे की रणनीति के तौर पर देखा जाना चाहिए. भारी सैन्य तैनाती ने बढ़ाए सवाल इस मिशन में इस्तेमाल किए गए संसाधनों ने भी शक को और गहरा कर दिया है.
रिपोर्ट्स के मुताबिक ऑपरेशन में ये विमान थे शामिल
- 4-6 रेस्क्यू हेलिकॉप्टर
- 12-20 फाइटर जेट्स
- 2-3 AWACS निगरानी विमान
- 6-8 टैंकर विमान
- भारी परिवहन विमान जैसे C-130
इतने बड़े स्तर की तैनाती आमतौर पर सिर्फ एक पायलट के रेस्क्यू के लिए नहीं की जाती, जिससे इस मिशन के पीछे किसी बड़े उद्देश्य की संभावना जताई जा रही है.
ट्रंप का बयान और अमेरिकी पक्ष
डोनाल्ड ट्रंप ने इस मिशन को 'साहसी और ऐतिहासिक' बताया. उन्होंने कहा कि दर्जनों विमान और सैकड़ों सैनिक इस ऑपरेशन में शामिल थे. अमेरिकी पक्ष इसे एक सफल कॉम्बैट सर्च एंड रेस्क्यू मिशन बता रहा है, जिसमें हर संसाधन का इस्तेमाल पायलट की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए किया गया.
रणनीतिक खेल या गलतफहमी?
ईरान का दावा है कि यह ऑपरेशन उसके लिए विफल नहीं बल्कि अमेरिका के लिए अपमान साबित हुआ. वहीं, अमेरिका इसे अपनी सैन्य क्षमता और तकनीकी श्रेष्ठता का उदाहरण मानता है. दोनों देशों के दावों के बीच सच्चाई क्या है, यह अभी भी साफ नहीं है.
रहस्य अभी बाकी है
यह घटना केवल एक सैन्य ऑपरेशन नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय राजनीति और रणनीति का जटिल उदाहरण बन गई है. क्या अमेरिका का उद्देश्य सिर्फ अपने पायलट को बचाना था, या इसके पीछे कोई और बड़ा मिशन छिपा था यह सवाल अभी भी अनुत्तरित है. आने वाले समय में इस घटना से जुड़े और खुलासे इस रहस्य को और गहरा या साफ कर सकते हैं.
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उत्तरी इजरायल में मिसाइल हमले में चार नागरिकों की मौत, नेतन्याहू ने की सुरक्षा निर्देश मानने की अपील
नई दिल्ली, 6 अप्रैल (आईएएनएस)। इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने हाइफा में हुए घातक हमले पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए नागरिकों से सतर्क रहने और सुरक्षा निर्देशों का पालन करने की अपील की है।
उत्तरी इजरायल में हुए बैलिस्टिक मिसाइल हमले में चार लोगों की मौत के बाद हालात तनावपूर्ण बने हुए हैं। सरकार का कहना है कि यह हमला ईरानी शासन और उसके समर्थकों की ओर से रिहायशी इलाकों को निशाना बनाकर किया गया।
प्रधानमंत्री नेतन्याहू ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पोस्ट में कहा, मैंने हाइफा के मेयर योना याहाव से बात की और हाइफा में चार लोगों की जान जाने की भयानक घटना पर अपना गहरा दुख व्यक्त किया। योना याहाव ने कुछ अनुरोध किए, और मैंने तुरंत अपने कार्यालय के डायरेक्टर जनरल को निर्देश दिया कि परिवारों के साथ-साथ नगर पालिका को भी सहायता प्रदान करने के लिए हर संभव प्रयास करें।
नेतन्याहू ने कहा, सबसे महत्वपूर्ण बात ये है कि जो लोग होम फ्रंट कमांड के निर्देशों का पालन करते हैं और सुरक्षित क्षेत्र में रहते हैं, उनके घायल होने की संभावना लगभग न के बराबर होती है। इसलिए मैं इजरायल के सभी नागरिकों से विशेष रूप से उत्तर के उन निवासियों से जो अभी सचमुच इस कठिन अनुभव से गुजर रहे हैं उनसे अनुरोध करता हूं कि आप होम फ्रंट कमांड के निर्देशों का पालन करें। मैं जानता हूं कि यह आपके लिए कितना कठिन है। हम सहायता के लिए अपनी पूरी कोशिश करेंगे।
इजरायल के गवर्नमेंट प्रेस ऑफिस के अनुसार, ईरानी शासन और उसके समर्थक रिहायशी इलाकों में बेगुनाह नागरिकों को निशाना बना रहे हैं। पिछली रात उत्तरी इजरायल पर ईरानी बैलिस्टिक मिसाइल हमले के बाद चार लोगों की मौत हो गई।
वहीं, दूसरी ओर ईरान ने हालिया संघर्ष विराम प्रस्तावों पर अपनी स्थिति और मांगें स्पष्ट कर दी हैं। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने कहा कि प्रवक्ता ने यह भी बताया कि अमेरिका की ओर से पहले पेश की गई तथाकथित 15 सूत्रीय योजना को ईरान ने खारिज कर दिया है, क्योंकि वह उसकी नजर में बहुत ज्यादा और असंतुलित थी। संयुक्त राज्य अमेरिका की इन मांगों को तेहरान ने अपने हितों के खिलाफ बताया है।
मीडिया ब्रीफिंग में विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने स्पष्ट किया कि अल्टीमेटम और युद्ध अपराधों की धमकियों के साथ बातचीत एक-दूसरे के साथ मेल नहीं खाती हैं। उन्होंने कहा कि ईरान किसी भी प्रकार के दबाव में आकर वार्ता नहीं करेगा और उसकी प्राथमिकता अपने रणनीतिक हितों की रक्षा करना है।
ईरान ने डोनाल्ड ट्रंप की उन धमकियों की सख्त निंदा की, जिनमें उन्होंने उसके बिजली घर और पुल जैसे बुनियादी ढांचों पर हमला करने की बात कही है। बघाई ने इसे युद्ध अपराध बताया।
ईरान पर बढ़ते हमलों के बारे में अमेरिकी अधिकारियों की टिप्पणियों और साथ ही बातचीत पर चर्चा करने के जवाब में, बघाई ने कहा कि पिछले एक साल में अमेरिका द्वारा उठाए गए कदमों ने कूटनीति के प्रति उसकी विश्वसनीयता को पूरी तरह से खत्म कर दिया है। उन्होंने अमेरिका पर विश्वासघात और अंतरराष्ट्रीय मानदंडों की अनदेखी करने का आरोप लगाया।
--आईएएनएस
एवाई/डीएससी
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