वैश्विक प्रयास धीमे, नवजात मृत्युदर चिंता का विषय: यूएन रिपोर्ट
नई दिल्ली, 6 अप्रैल (आईएएनएस)। संयुक्त राष्ट्र (यूएन) की एक हालिया रिपोर्ट नवजात मृत्युदर की दुखद तस्वीर पेश करती है। ये कहती है कि नवजात मौतों को कम करने की वैश्विक मुहिम अब धीमी पड़ती जा रही है, जिससे लाखों बच्चों की जान पर खतरा बना हुआ है। यह रिपोर्ट 17 मार्च 2026 को जारी की गई।
रिपोर्ट के अनुसार, 2024 में करीब 23 लाख नवजातों की मौत हुई (एक अनुमान के अनुसार स्थिति अब भी बदली नहीं है)। ये वे बच्चे हैं जो मात्र 28 दिन या उससे कम के होते हैं। पिछले दो दशकों में पांच साल से कम उम्र के बच्चों की मौतों में कमी आई थी, लेकिन नवजातों के मामले में यह गिरावट उतनी तेज नहीं रही। यही वजह है कि अब कुल बाल मृत्यु दर में नवजातों की हिस्सेदारी बढ़ती जा रही है।
विशेषज्ञों का मानना है कि नवजात मृत्यु दर को कम करना एक जटिल चुनौती है, क्योंकि इसमें स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता, समय पर देखभाल और संसाधनों की उपलब्धता जैसे कई कारक शामिल होते हैं। खासकर निम्न और मध्यम आय वाले देशों में स्थिति ज्यादा गंभीर है, जहां स्वास्थ्य ढांचा पहले से ही कमजोर है।
अफ्रीकी देशों में हालात सबसे ज्यादा चिंताजनक हैं, जहां हर साल लगभग 11 लाख नवजात अपनी जान गंवा देते हैं। मौतों के पीछे प्रमुख कारणों में समय से पहले जन्म, प्रसव संबंधी जटिलताएं और संक्रमण शामिल हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि इनमें से बड़ी संख्या में मौत रोकी जा सकती है, अगर गर्भावस्था और जन्म के समय उचित देखभाल सुनिश्चित की जाए।
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि पिछले कुछ वर्षों में इस क्षेत्र में अंतरराष्ट्रीय फंडिंग में कमी आई है। साथ ही कई देशों में राजनीतिक प्राथमिकताओं में बदलाव के चलते मातृ और शिशु स्वास्थ्य को उतना महत्व नहीं मिल पा रहा है। कोविड-19 महामारी और वैश्विक आर्थिक दबाव ने भी स्वास्थ्य सेवाओं पर अतिरिक्त असर डाला, जिससे प्रगति और धीमी हो गई।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, नवजातों की जान बचाने के लिए बड़े और जटिल उपायों की जरूरत नहीं है, बल्कि बुनियादी स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करना ही सबसे प्रभावी कदम हो सकता है। इसमें प्रशिक्षित स्वास्थ्यकर्मियों की मौजूदगी में सुरक्षित प्रसव, जन्म के तुरंत बाद शिशु की देखभाल और संक्रमण से बचाव के उपाय शामिल हैं।
रिपोर्ट ने चेतावनी दी है कि अगर सरकारें और अंतरराष्ट्रीय संस्थाएं इस दिशा में तुरंत ठोस कदम नहीं उठातीं, तो 2030 तक शिशु मृत्यु दर घटाने के वैश्विक लक्ष्य हासिल करना मुश्किल हो सकता है।
--आईएएनएस
केआर/
डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.
गुजरात ने मार्च में 68 लाख एलपीजी सिलेंडरों की मांग पूरी की
अहमदाबाद, 6 अप्रैल (आईएएनएस)। अफवाहों के चलते मची अफरा-तफरी में बुकिंग बढ़ने के बावजूद गुजरात ने मार्च में अपनी 68 लाख एलपीजी सिलेंडरों की मासिक मांग पूरी कर ली। उन्होंने यह भी कहा कि राज्य भर में पेट्रोल, डीजल और कुकिंग गैस की आपूर्ति स्थिर बनी हुई है।
राज्य स्तरीय ब्रीफिंग को संबोधित करते हुए इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन लिमिटेड (आईओसीएल) के राज्य प्रमुख और कार्यकारी निदेशक संजीव कुमार बेहरा ने कहा कि पिछले महीने एलपीजी की मांग में तेजी से वृद्धि हुई और 75 लाख बुकिंग दर्ज की गईं।
उन्होंने कहा कि वितरण में कोई बाधा नहीं आई। यह वृद्धि अफवाहों के चलते मची अफरा-तफरी में बुकिंग और अग्रिम ऑर्डर के कारण हुई, लेकिन आपूर्ति राज्य की आवश्यकता के अनुरूप बनी रही।
उन्होंने आगे बताया कि गुजरात में 1.27 करोड़ सक्रिय एलपीजी कनेक्शन हैं, जिनमें से 88 प्रतिशत बुकिंग और 85 प्रतिशत डिलीवरी की पुष्टि डिजिटल माध्यम से की गई है।
इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन, भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड और हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड जैसी तेल विपणन कंपनियां मिलकर राज्य में 5,133 खुदरा आउटलेट संचालित करती हैं। इन सभी आउटलेट्स पर पेट्रोल और डीजल का पर्याप्त स्टॉक है, साथ ही 17 आपूर्ति केंद्रों पर भी पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध है।
बेहेरा ने कहा कि घबराने की कोई जरूरत नहीं है। 23 और 24 मार्च को जो लंबी कतारें देखी गईं, वे अफवाहों के कारण थीं। उन दिनों बिक्री दोगुनी हो गई थी और कुछ आउटलेट्स पर तो सामान्य से चार से पांच गुना अधिक हो गई थी, लेकिन वास्तव में कोई कमी नहीं थी।
अधिकारियों ने बताया कि राज्य सरकार बढ़ती मांग को नियंत्रित करने के लिए लगातार प्रयास कर रही है। हाल के आंकड़ों के अनुसार, 4 अप्रैल को 2.43 लाख सिलेंडरों की आपूर्ति के मुकाबले 1.76 लाख एलपीजी की बुकिंग हुई, जो बैकलॉग को खत्म करने के प्रयासों का संकेत है।
23 मार्च से अप्रैल की शुरुआत तक विशेष रूप से सूरत अंकलेश्वर और जामनगर जैसे औद्योगिक क्षेत्रों में 5 किलोग्राम के छोटे सिलेंडरों का वितरण बढ़ाया गया।
इस अवधि के दौरान लगभग 74,000 सिलेंडरों की आपूर्ति की गई, जिनमें से 25,000 सिलेंडर मांग में अचानक वृद्धि के कुछ ही दिनों के भीतर बिक गए।
खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग के संयुक्त निदेशक चेतन गांधी ने बताया कि जमाखोरी और कालाबाजारी पर अंकुश लगाने के लिए निगरानी तेज कर दी गई है।
उन्होंने कहा कि सरकार ने प्रत्येक गैस वितरण एजेंसी पर एक राजस्व अधिकारी और एक पुलिस अधिकारी तैनात किया है। दैनिक निगरानी के लिए कुल 1,029 कर्मियों को तैनात किया गया है।
5 मार्च से अब तक 11,300 से अधिक शिकायतें प्राप्त हुई हैं जिन पर कार्रवाई की गई है, और 2,451 छापे मारे गए हैं, जिसके परिणामस्वरूप 215 सिलेंडर जब्त किए गए हैं।
उन्होंने कहा कि घरेलू उपभोक्ताओं और आवश्यक सेवाओं को प्राथमिकता सुनिश्चित करने के लिए सभी क्षेत्रों में एलपीजी आवंटन को विनियमित किया जा रहा है।
--आईएएनएस
एमएस/
डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.
होम
जॉब
पॉलिटिक्स
बिजनेस
ऑटोमोबाइल
गैजेट
लाइफस्टाइल
फोटो गैलरी
Others
News Nation
















.jpg)




