US Tariff Bill: "देश को अमेरिका के हाथों...," ट्रंप के टैरिफ बिल पर अरविंद केजरीवाल का केंद्र सरकार पर तंज
Arvind Kejriwal on Tariff Bill: अमेरिकी सीनेट ने 86-11 के बहुमत से भारत समेत 5 देशों पर 100 प्रतिशत तक का टैरिफ लगाने वाला बिल पास कर दिया है। इस बिल को लेकर AAP संयोजक अरविंद केजरीवाल ने केंद्र सरकार पर निशाना साधा है। केजरीवाल ने पोस्ट के माध्यम से कहा है कि "देश को अमेरिका के हाथों गिरवी रखने के बाद, ट्रंप की ग़ुलामी करने के बाद और भारत का अपमान करवाने के बाद पीएम मोदी देश के लिए ये लाए हैं।
केजरीवाल का कहना है कि देश के हर छोटे बड़े फैसले में ट्रंप का हस्तक्षेप है। पीएम मोदी ट्रंप की हर बात मानते हैं। भले सही हो या गलत ट्रंप हर क्षेत्र में भारत के खिलाफ फैसला लेता है। अमेरिकी सीनेट ने रूस तथा उसके पेट्रोलियम उत्पादों के चीन एवं भारत जैसे प्रमुख खरीदार देशों को दंडित करने के उद्देश्य से लाए गए एक विधेयक को भारी बहुमत से मंजूरी दे दी है। विधेयक में दावा किया गया है कि रूस के साथ इस तरह का व्यापार यूक्रेन युद्ध को जारी रखने में सहायता कर रहा है।
86 मतों से मिली मंजूरी
सीनेट ने ‘लिंडसे ओ. ग्राहम सैंक्शनिंग रूस एंड ईरान एक्ट ऑफ 2026’ नाम के इस विधेयक को 11 के मुकाबले 86 मतों से मंजूरी दी। यह विधेयक अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को रूस से तेल और गैस का सबसे अधिक आयात करने वाले 5 देशों से आने वाले सामान पर 100 प्रतिशत शुल्क लगाने का अधिकार देता है। इस बिल के पास हो जाने से भारत में राजनीतिक माहौल गर्म हो गया है। विपक्ष द्वारा मोदी सरकार पर निशाना साधा जा रहा है।
देश को अमेरिका के हाथों गिरवी रखने के बाद, ट्रम्प की ग़ुलामी करने के बाद और भारत का अपमान करवाने के बाद मोदी जी देश के लिए ये लाए हैं। आज देश के हर छोटे बड़े निर्णय में ट्रम्प का हस्तक्षेप है। मोदी जी ट्रम्प की हर बात मानते हैं - चाहे सही हो या ग़लत। और ट्रम्प हर क्षेत्र में भारत… https://t.co/Ycvh2jmMwl
— Arvind Kejriwal (@ArvindKejriwal) August 8, 2026
बिल में क्या-क्या प्रावधान हैं ?
- चीन, भारत, अजरबैजान, हंगरी और स्लोवाकिया रूस से तेल और गैस का सबसे अधिक आयात करने वाले पांच देश हैं।
- रूस पर प्रतिबंधों के अलावा विधेयक में 1996 के ‘ईरान प्रतिबंध अधिनियम’ की अवधि 2031 तक बढ़ाने का भी प्रावधान है।
- कानून के तहत ईरान के ऊर्जा क्षेत्र में निवेश करने वाली कंपनियों पर दंडात्मक कार्रवाई की जाती है।
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