पैर कांप रहे थे, पसीने माथे पे थे। अमेरिका ने ईरान में एक ऐसा ऑपरेशन किया है जो मिलिट्री सर्च एंड रेस्क्यू ऑपरेशन के इतिहास में लिखा जाएगा। जिस तरह से भारत पाकिस्तान से अपने जांबाज पायलट अभिनंदन को बचा लाया था। ठीक वैसे ही अमेरिका फाइटर जेट क्रैश के बाद ईरान में गिरे अपने दो ऑफिसर्स को भी जिंदा बचा लाया है। हालांकि भारत और अमेरिका के ऑपरेशन में एक बहुत बड़ा फर्क है। इस फर्क के बारे में पाकिस्तान के एक सांसद ने अपनी ही संसद में खड़े होकर बताया था। । अमेरिका के इस रेस्क्यू ऑपरेशन ने भारत के उस ऑपरेशन की याद दिला दी है जिसमें उस समय के विंग कमांडर रहे अभिनंदन वर्धमान को बचाया गया था। भारत का ऑपरेशन अमेरिका से भी बेहद शानदार था। क्योंकि अभिनंदन को तो पाकिस्तान ने पकड़ ही लिया था। जबकि अमेरिकी सैनिक ईरान के कब्जे में नहीं आए थे। इस समय ईरान का एयर डिफेंस सिस्टम लगभग बेकार हो चुका है। ऐसे में अमेरिका के लिए रेस्क्यू ऑपरेशन करना थोड़ा आसान हो गया था। लेकिन अभिनंदन के समय पाकिस्तान की स्थिति ईरान जैसी नहीं थी। पाकिस्तान तो अभिनंदन को पकड़ कर टॉर्चर करने की तैयारी कर रहा था। लेकिन भारत ने कुछ ऐसा किया जिसके चलते पाकिस्तान खुद अभिनंदन को भारतीय सीमा पर छोड़ने आया। आपने इतिहास में कभी नहीं देखा होगा कि दुश्मन देश हमारे सैनिक को सही सलामत छोड़ जाए।
मिडिल ईस्ट में जारी तनाव अब बेहद खतरनाक मोड़ पर पहुंच चुका है। जहां एक तरफ अमेरिका और ईरान के बीच का टकराव लगातार बढ़ता जा रहा है। तो वहीं दूसरी तरफ भारत की भूमिका इस युद्ध में बेहद अहम बनी हुई है। जैसे ही अमेरिका की ओर से सब कुछ बर्बाद कर देने की धमकी ईरान को मिली। ईरान ने भारत को फोन घुमाया। दरअसल खबर सामने आई है कि बाद के विदेश मंत्री एस जयशंकर को ईरान के विदेश मंत्री अब्बास सारागाची का फोन आया। जहां दोनों नेताओं के बीच मौजूदा हालात को लेकर अहम बातचीत हुई है। यह बातचीत युद्ध शुरू होने के बाद से अब तक भारत और ईरान की विदेश मंत्रियों के बीच छठी बातचीत है। विदेश मंत्री एस जयशंकर ने खुद इस बातचीत की जानकारी दी। उन्होंने सोशल
वहीं भारत में ईरानी दूतावास ने भी इस बातचीत की पुष्टि की और बताया कि दोनों नेताओं के बीच द्विपक्षीय संबंधों के साथ-साथ क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय हालात पर विस्तार से चर्चा हुई। सबसे ज्यादा ध्यान देने वाली बात जो है वो इस बातचीत की टाइमिंग है। यह बातचीत ऐसे समय में हुई है जब अमेरिका ने ईरान को सीधी और कड़ी चेतावनी दे दी। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को फिर से एक बार 48 घंटों का अल्टीमेटम दे दिया है और कहा है कि अगर स्टेट ऑफ हार्मोस नहीं खुलता है तो अमेरिका ईरान के पावर प्लांट्स और पुलों को निशाना बनाएगा। अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप यहीं नहीं रुके बल्कि उन्होंने अपने बयान में कड़े अपशब्द और विवादित शब्दों का इस्तेमाल करते हुए ईरान को गंभीर सैन्य कारवाही की धमकी दी। ट्रंप ने कहा कि अगर समझौता नहीं हुआ तो अमेरिका सब कुछ उड़ा देगा और तेल पर कब्जा कर लेगा। इस बयान के बाद से ही तनाव एक बार फिर से बढ़ने की आशंका है। इस बढ़ते तनाव के बीच भारत ने ना सिर्फ ईरान से बातचीत की बल्कि मिडिल ईस्ट के अन्य देशों के साथ भी भारत संपर्क में है। दरअसल विदेश मंत्री एस जयशंकर ने संयुक्त अरब अमीरात यानी यूएई के उप प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री अब्दुल्ला बिन जायद अलनहान से भी बातचीत की और मौजूदा हालात पर उनके साथ चर्चा की। इसकी जानकारी भी उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफार्म एक्स पर पोस्ट करते हुए दी।
इसके साथ-साथ विदेश मंत्री एस जयशंकर ने क़तर के प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री से भी फोन पर बातचीत की है। इसकी जानकारी भी उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफार्म एक्स पर पोस्ट करते हुए दी। यानी कि भारत ने मिडिल ईस्ट के तीन देशों के साथ कल शाम को बातचीत की है। जिसमें ईरान, कतर और यूएई शामिल है। एक तरफ जहां ट्रंप ने ईरान को खुलेआम धमकी दी है। ऐसे में भारत के कदम बेहद अहम माना जा रहा है। भारत लगातार यह कहता आया है कि किसी भी संघर्ष का समाधान बातचीत और कूटनीति से होना चाहिए। ऐसे में भारत की यह सक्रियता इस ओर इशारा करती है कि वह संकट को संतुलित और जिम्मेदार तरीके से खत्म करवाना चाहता है।
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ईरान की पहाड़ियों में मार गिराए गए अमेरिकी F-15E स्ट्राइक ईगल के वेपन सिस्टम ऑफिसर (WSO) को बचाने का मिशन सिर्फ अमेरिकी ताकत का प्रदर्शन नहीं था, बल्कि यह आधुनिक सैन्य इतिहास में इज़राइल और अमेरिका के बीच अब तक के सबसे गहरे सहयोग की मिसाल भी बना। 48 घंटों तक मौत से जूझ रहे अमेरिकी कर्नल को बचाने के लिए इज़राइली स्पेशल फोर्सेज और इंटेलिजेंस ने जो किया, उसने इस मिशन की सफलता सुनिश्चित की।
यह सब एक बहुत ही बारीकी से की गई प्लानिंग के बाद ही मुमकिन हो पाया, जिसमें सेंट्रल इंटेलिजेंस एजेंसी (CIA) द्वारा चलाया गया एक "धोखा देने वाला अभियान" (deception campaign) भी शामिल था। अब, इस "साहसी" बचाव अभियान के बारे में नई जानकारी सामने आई है। रिपोर्टों में दावा किया गया है कि इस अभियान में अमेरिकी सेना को इज़राइल का भी साथ मिला।
द जेरूसलम पोस्ट की एक रिपोर्ट के अनुसार, इज़राइली डिफेंस फोर्सेज (IDF) ने US सेना के "सहयोग" से काम किया और ईरान के ठिकानों पर कई हमले किए। सूत्रों के हवाले से, इज़राइली मीडिया आउटलेट ने बताया कि ये हमले एक "ध्यान भटकाने वाले कदम" (diversion) के तौर पर किए गए थे, ताकि ईरानियों को विमान गिरने की जगह और दूसरे इलाकों से दूर रखा जा सके।
रिपोर्ट में कहा गया है कि IDF का मुख्य मकसद यह पक्का करना था कि गिराए गए क्रू मेंबर तक पहुँचने की ईरान की कोशिश "नाकाम और बाधित" हो जाए। एक अधिकारी ने आउटलेट को बताया कि इस अभियान की सफलता सुनिश्चित करने में इज़राइली इंटेलिजेंस ने अहम भूमिका निभाई।
द जेरूसलम पोस्ट ने एक इज़राइली सैन्य अधिकारी के हवाले से कहा, "यह US का बचाव अभियान था; उन्होंने वह कर दिखाया जिसका कई लोगों को डर था कि शायद न हो पाए। इज़राइल ने वह सब किया जो वह कर सकता था और जो US सेना ने उसे मदद करने और जान बचाने के लिए करने को कहा था।"
इज़राइली स्पेशल फोर्सेज की भागीदारी
ओपन सोर्स इंटेलिजेंस (OSINT) रिपोर्टों के अनुसार, इज़राइली स्पेशल फोर्सेज ने भी इस बचाव अभियान में हिस्सा लिया। रिपोर्टों में दावा किया गया है कि सायेरेट मतकल और शालदाग इस मिशन में शामिल थे और उन्होंने उस इलाके में ईरान के खतरों का मुकाबला करने में US सेना की मदद की।
सायेरेट मतकल IDF की एक आम मकसद वाली कमांडो यूनिट है, जो दुश्मन के इलाके में गहरे तक घुसकर हमले करने और बंधकों को छुड़ाने के अभियानों में माहिर है। दूसरी ओर, शालदाग इज़राइली वायु सेना (IAF) की एक यूनिट है, जो दुश्मन की सीमा के पीछे छिपकर किए जाने वाले अभियानों, जासूसी और लड़ाई के दौरान खोज और बचाव (combat search-and-rescue) अभियानों के लिए जानी जाती है।
'बीबी' ने ट्रंप को बधाई दी
इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू, जिन्हें आम तौर पर 'बीबी' के नाम से जाना जाता है, ने कहा कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बचाव अभियान में तेल अवीव की मदद के लिए उन्हें बधाई दी है। X (पहले Twitter) पर एक पोस्ट में, उन्होंने कहा कि उन्होंने ट्रंप से बात भी की और गिरे हुए पायलट को बचाने के अभियान को "पूरी तरह से अंजाम देने" के उनके "साहसी फैसले" के लिए उन्हें बधाई दी।
नेतन्याहू ने कहा, "मुझे इस बात पर गहरा गर्व है कि युद्ध के मैदान के अंदर और बाहर हमारा सहयोग बेमिसाल है, और यह कि इजरायल एक बहादुर अमेरिकी योद्धा की जान बचाने में योगदान दे सका।"
इस घटना को याद करते हुए, यह शुक्रवार को हुई थी। अमेरिकी सेना विमान दुर्घटना के कुछ घंटों बाद पायलट को बचाने में सफल रही, लेकिन वेपन सिस्टम ऑफिसर (WSO) लापता था। वह रविवार को अमेरिकी सेना द्वारा निकाले जाने से पहले लगभग 48 घंटों तक ईरानियों से बचता रहा। राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा कि WSO कर्नल रैंक का अधिकारी है, जो घायल है लेकिन जल्द ही ठीक हो जाएगा।
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