'अपने कपड़े उतारो...', अनाया बांगड़ ने सुनाया भयानक किस्सा, बोलीं- 'सरकारी अस्पताल में डॉक्टर्स ने की बदसलूकी!'
Anaya Bangar Shared Horrifying Experience: क्रिकेटर आर्यन बांगड़ के नाम से पहचानी जाने वाली अनाया बांगड़ ने अपनी जेंडर ट्रांजिशन की जर्नी को लेकर कई बार खुलकर बात की है. अनाया ने अपनी पहचान को स्वीकार करने से लेकर सर्जरी और इसके बाद की जिंदगी तक कई मुश्किलों का सामना किया है. उन्होंने बताया है कि अपनी पहचान को दुनिया के सामने रखना उनके लिए बिल्कुल आसान नहीं था. परिवार, समाज और आसपास के लोगों के बिहेवियर का सामना करने के साथ-साथ उन्हें सरकारी डाक्यूमेंट्स में अपनी पहचान बदलवाने के दौरान भी कथित तौर पर बेहद परेशान करने वाले अनुभव से गुजरना पड़ा.
हाल ही में हॉटरफ्लाई को दिए इंटरव्यू में अनाया ने अपनी जिंदगी के ऐसे कई अनुभव साझा किए, जिन्हें याद करते हुए वो भावुक हो गईं. उन्होंने बताया कि अपनी सेक्शुअलिटी और जेंडर आइडेंटिटी को लेकर खुलकर सामने आने के बाद उनकी जिंदगी में कई चीजें बदल गईं. उन्हें अकेलापन महसूस होने लगा और कई लोगों के बिहेवियर में भी बदलाव देखने को मिला.
बदल गया लोगों का रवैया
अनाया ने बताया कि जब उन्होंने अपनी पहचान के बारे में लोगों को बताया तो कई लोग शॉक्ड रह गए थे. उनके लिए ये एक ऐसा दौर था जब उन्हें अपने आसपास के लोगों के सवालों, तानों और अजीब बिहेवियर का सामना करना पड़ा. अनाया के मुताबिक, उन्हें कई बार ऐसा महसूस हुआ कि लोग उन्हें नार्मल इंसान की तरह नहीं बल्कि किसी अलग नजर से देख रहे हैं. इस वजह से वो काफी अकेली पड़ गई थीं. उनका कहना है कि अपनी पहचान को स्वीकार करना एक बात है, लेकिन समाज के सामने उसी पहचान के साथ जिंदगी जीना बिल्कुल अलग चुनौती है. लोगों की नजरें, सवाल और बिहेवियर कई बार उनके लिए मानसिक तौर पर काफी मुश्किल साबित हुए.
पार्टी में एक शख्स ने की अजीब हरकत
अनाया ने इंटरव्यू के दौरान अपने साथ हुई कुछ ऐसी घटनाओं का भी जिक्र किया, जिन्होंने उन्हें अंदर तक परेशान कर दिया था. उन्होंने बताया कि एक बार वो एक पार्टी में गई थीं. वहां एक अंकल ने कथित तौर पर उनके शरीर के निचले हिस्से की तरफ झुककर देखने की कोशिश की. अनाया के लिए ये अनुभव बेहद असहज और चौंकाने वाला था. उन्होंने कहा कि उस समय उन्हें समझ नहीं आया कि सामने वाला व्यक्ति आखिर ऐसा क्यों कर रहा है. उन्हें महसूस हुआ कि उनकी निजी सीमाओं और सम्मान का ध्यान नहीं रखा जा रहा है. अनाया ने ये भी बताया कि उनके एक दोस्त ने उनके प्राइवेट पार्ट को लेकर सच जानने की कोशिश की थी. कथित तौर पर उस दोस्त ने उनके प्राइवेट पार्ट पर टैप किया था. अनाया के लिए ये घटना भी बेहद परेशान करने वाली थी.
'मैं खुद में बंधी हुई महसूस करती थी'
अपनी जेंडर आइडेंटिटी को लेकर बात करते हुए अनाया ने बताया कि एक समय ऐसा था जब उन्हें लगता था कि वो अपने ही शरीर के भीतर बंधी हुई हैं. उनके मुताबिक, उनका दिमाग और दिल अलग-अलग दिशाओं में जा रहे थे. वो जिस तरह खुद को अंदर से महसूस करती थीं, उनका शरीर और समाज उन्हें जिस पहचान से देखता था, उसमें उन्हें काफी अंतर महसूस होता था. अनाया के लिए ये सिर्फ बाहरी बदलाव का मामला नहीं था. ये उनकी पहचान, आत्मसम्मान और अपनी जिंदगी को अपने तरीके से जीने से जुड़ा हुआ था. उन्होंने धीरे-धीरे अपनी पहचान को स्वीकार किया और इसके बाद जेंडर ट्रांजिशन की प्रक्रिया से गुजरने का फैसला किया. हालांकि, उनका कहना है कि इस पूरी प्रक्रिया के दौरान उन्हें कई मुश्किलों का सामना करना पड़ा.
परेशान करने वाला अनुभव
अनाया ने इंटरव्यू में अपने सबसे दर्दनाक अनुभवों में से एक का जिक्र किया. उन्होंने बताया कि जेंडर ट्रांजिशन के बाद उन्हें अपने सरकारी डॉक्यूमेंट में बदलाव करवाने की जरूरत थी. इसी सिलसिले में उन्हें एक सरकारी अस्पताल जाना पड़ा. अनाया के मुताबिक, उनके पास अपनी सर्जरी से जुड़े सभी जरूरी डॉक्यूमेंट मौजूद थे. उन्होंने बताया कि अस्पताल में डॉक्टरों का एक पैनल बैठा था. अनाया के मुताबिक, उस पैनल में छह मेल डॉक्टर और तीन महिला डॉक्टर शामिल थीं. इन डॉक्टरों को कथित तौर पर उनकी पहचान और सर्जरी से संबंधित जानकारी को प्रमाणित करना था. लेकिन अनाया का आरोप है कि इस प्रक्रिया के दौरान उनसे कहा गया कि उन्हें अपने पूरे कपड़े उतारने होंगे और डॉक्टरों को उनके शरीर की जांच करनी होगी, ताकि ये देखा जा सके कि वो रियल में महिला हैं या नहीं और उनकी सर्जरी हुई है या नहीं. ये अनुभव अनाया के लिए बेहद असहज था.
'मैं नहीं चाहती थी कि मेल डॉक्टर्स वहां हों'
अनाया ने बताया कि उन्होंने डॉक्टरों के सामने अपनी आपत्ति भी जताई थी. उन्होंने कहा कि वो नहीं चाहती थीं कि पुरुष डॉक्टर उनके टेस्ट्स के दौरान वहां मौजूद रहें. लेकिन उनके मुताबिक, उन्हें जवाब दिया गया कि डाक्यूमेंट्स के वेरिफिकेशन के लिए ये जरूरी है. इस घटना को याद करते हुए अनाया भावुक हो गईं. उन्होंने बताया कि उनके लिए ये अनुभव इतना मुश्किल था कि वो इसे शब्दों में बयान करते हुए भी परेशान हो जाती हैं. उन्होंने स्त्री रोग विशेषज्ञ द्वारा किए जाने वाले मेडिकल टेस्ट का उदाहरण देते हुए कहा कि उनके साथ भी कथित तौर पर उसी तरह की जांच सबके सामने की गई.
बाद में पता चला कि कथित प्रक्रिया गैर-कानूनी थी
अनाया ने बताया कि इस घटना के बाद उन्होंने अपने अनुभव को लेकर सोशल मीडिया पर एक वीडियो भी पोस्ट किया था. इसके बाद उन्हें जानकारी मिली कि उनके साथ जिस तरह की प्रक्रिया अपनाई गई, वो कथित तौर पर गैर-कानूनी थी. अनाया के मुताबिक, इस घटना ने उन्हें ये सोचने पर मजबूर कर दिया कि अपनी पहचान को कानूनी डाक्यूमेंट्स में बदलवाने की प्रक्रिया में किसी व्यक्ति की गरिमा और निजता का भी ध्यान रखा जाना चाहिए. उनका कहना है कि किसी व्यक्ति को अपनी पहचान साबित करने के लिए इस तरह के अनुभव से गुजरना पड़े, ये बेहद तकलीफदेह हो सकता है.
आज भी डाक्यूमेंट्स में पुराना नाम और फोटो
अनाया की मुश्किलें यहीं खत्म नहीं हुईं. उन्होंने बताया कि आज भी उनके कई दस्तावेजों पर उनकी पुरानी फोटो और पुराना नाम मौजूद है. यानी वो अपनी जिंदगी में अनाया के रूप में आगे बढ़ चुकी हैं, लेकिन कागजों पर अब भी उनकी पुरानी पहचान दिखाई देती है. यही स्थिति उनके लिए कई बार परेशानी और असहजता पैदा करती है. अनाया ने बताया कि जब वो कहीं जाती हैं और अपना डॉक्यूमेंट दिखाती हैं, तो सामने वाला व्यक्ति उनकी फोटो और नाम देखकर उन्हें शक की नजर से देखने लगता है. कई बार उनसे सवाल किया जाता है कि आखिर वो कौन हैं और दस्तावेजों पर किसी और का नाम क्यों है.
'लोग मुझे देखकर पूछते हैं- तुम कौन हो?'
अनाया ने बताया कि उनकी पुरानी फोटो और नाम वाले दस्तावेज उनके लिए लगातार परेशानी का कारण बने हुए हैं. वो एक तरफ अपनी नई पहचान के साथ जिंदगी जीना चाहती हैं, लेकिन दूसरी तरफ सरकारी कागजों में मौजूद पुरानी जानकारी उन्हें बार-बार उसी पुराने दौर में वापस ले जाती है. उनके लिए सबसे मुश्किल स्थिति तब बनती है जब उन्हें किसी जगह अपनी पहचान साबित करनी पड़ती है. सामने मौजूद व्यक्ति को जब दस्तावेजों पर पुराना नाम और फोटो दिखाई देता है, तो वो सवाल करने लगता है. अनाया के मुताबिक, ऐसे समय में उन्हें लोगों के सवालों और उनकी नजरों का सामना करना पड़ता है.
'मैंने कहीं जाना ही छोड़ दिया है'
इस पूरे अनुभव ने अनाया के मन में एक गहरा डर पैदा कर दिया है. उन्होंने बताया कि अब उन्होंने कई जगहों पर जाना तक कम कर दिया है. अनाया को डर रहता है कि अगर वो कहीं गईं और वहां उनके साथ कोई घटना हो गई तो उनकी पहचान कैसे साबित होगी. अगर किसी आपात स्थिति में उन्हें अस्पताल ले जाया गया या किसी सरकारी प्रक्रिया से गुजरना पड़ा तो डाक्यूमेंट्स में मौजूद पुराना नाम और फोटो उनके लिए और मुश्किल खड़ी कर सकते हैं. उन्होंने बताया कि ये डर अब उनके मन में बैठ चुका है.
क्या है कॉमन फैसिलिटी सेंटर योजना, यूपी के कारीगरों और छोटे उद्योग कैसे उठा रहे इसका लाभ ?
उत्तर प्रदेश में पारंपरिक कारोबार, स्थानीय कारीगरों और छोटे उद्योगों को आधुनिक सुविधाओं से जोड़ने के लिए कॉमन फैसिलिटी सेंटर यानी CFC योजना चलाई जा रही है. यह योजना राज्य के वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट (ODOP) कार्यक्रम का अहम हिस्सा है. इसका उद्देश्य ऐसे उत्पादों से जुड़े कारीगरों, MSME इकाइयों और उत्पादक समूहों को साझा तकनीकी एवं उत्पादन सुविधाएं उपलब्ध कराना है, जिनका इस्तेमाल अकेले किसी छोटे उद्यम के लिए करना महंगा या मुश्किल हो सकता है.
क्या है कॉमन फैसिलिटी सेंटर?
कॉमन फैसिलिटी सेंटर को एक तरह के साझा औद्योगिक केंद्र के रूप में समझा जा सकता है. इसमें एक ही जिले या उत्पाद से जुड़े कई कारीगर और उद्यम एक साथ आधुनिक मशीनों, परीक्षण सुविधाओं, डिजाइन सेवाओं और दूसरी जरूरी व्यवस्थाओं का इस्तेमाल कर सकते हैं.
इससे प्रत्येक कारोबारी को अलग से महंगी मशीनरी या तकनीकी ढांचा तैयार करने की जरूरत कम होती है. योजना का लक्ष्य उत्पादन बढ़ाने के साथ-साथ उत्पाद की गुणवत्ता, पैकेजिंग, डिजाइन और बाजार तक पहुंच को बेहतर बनाना है.
किन लोगों को मिल सकता है फायदा?
CFC योजना मुख्य रूप से ODOP उत्पादों से जुड़े कारीगरों, निर्माताओं, MSME इकाइयों और प्रोड्यूसर ग्रुप्स को ध्यान में रखकर तैयार की गई है. खास बात यह है कि योजना व्यक्तिगत कारोबारी के बजाय क्लस्टर आधारित विकास पर जोर देती है.
यानी किसी जिले में अगर कोई खास उत्पाद बड़ी संख्या में कारीगर या छोटे उद्यम बनाते हैं, तो उनके लिए साझा सुविधा केंद्र विकसित किया जा सकता है. इससे स्थानीय उद्योगों को संगठित तरीके से आगे बढ़ाने में मदद मिल सकती है.
सेंटर में मिलेंगी कौन-कौन सी सुविधाएं?
CFC में उत्पाद की जरूरत के अनुसार अलग-अलग सुविधाएं विकसित की जा सकती हैं. इनमें टेस्टिंग लैब, डिजाइन एवं प्रोडक्ट डेवलपमेंट सेंटर, तकनीकी रिसर्च और डेवलपमेंट सुविधा, कॉमन प्रोडक्शन एवं प्रोसेसिंग यूनिट और रॉ मटीरियल बैंक शामिल हो सकते हैं.
इसके अलावा पैकेजिंग, लेबलिंग और बारकोडिंग की सुविधा, उत्पादों की प्रदर्शनी एवं बिक्री केंद्र, लॉजिस्टिक्स और प्रचार-प्रसार से जुड़ी सुविधाएं भी विकसित की जा सकती हैं.
सरकार देगी 90 फीसदी तक वित्तीय सहायता
इस योजना की सबसे महत्वपूर्ण बात इसकी वित्तीय सहायता है. पात्र CFC परियोजनाओं की लागत 15 करोड़ रुपये तक होने पर राज्य सरकार स्वीकृत परियोजना लागत का अधिकतम 90 फीसदी तक वित्तीय सहयोग दे सकती है.
वहीं, परियोजना को लागू करने वाली संस्था यानी SPV को कम से कम 10 फीसदी लागत स्वयं वहन करनी होगी. यदि किसी पात्र परियोजना की लागत 15 करोड़ रुपये से अधिक है, तो सरकारी योगदान की गणना अधिकतम 15 करोड़ रुपये तक ही की जाएगी.
छोटे कारोबारियों के लिए क्यों अहम है योजना?
छोटे कारीगरों और MSME इकाइयों के सामने अक्सर आधुनिक मशीनरी, गुणवत्ता परीक्षण, बेहतर डिजाइन, पैकेजिंग और लॉजिस्टिक्स की लागत बड़ी चुनौती होती है. CFC मॉडल इन सुविधाओं को साझा आधार पर उपलब्ध कराने की कोशिश करता है.
इससे उत्पादन की गुणवत्ता सुधारने, नए उत्पाद विकसित करने और बाजार की मांग के अनुरूप बदलाव करने में मदद मिल सकती है. साथ ही स्थानीय उत्पादों को बड़े बाजारों तक पहुंचाने की संभावनाएं भी बढ़ती हैं.
ODOP को मिल सकता है नया बाजार
कॉमन फैसिलिटी सेंटर का व्यापक उद्देश्य केवल उत्पादन बढ़ाना नहीं, बल्कि ODOP उत्पादों की पूरी वैल्यू चेन को मजबूत करना है. बेहतर तकनीक, गुणवत्ता, पैकेजिंग और मार्केटिंग के जरिए स्थानीय उत्पादों को प्रतिस्पर्धी बनाया जा सकता है.
इस तरह CFC योजना उत्तर प्रदेश के पारंपरिक हुनर को आधुनिक कारोबारी ढांचे से जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है. यदि साझा सुविधाओं का प्रभावी इस्तेमाल होता है, तो इससे कारीगरों और छोटे उद्यमों की लागत घटाने, गुणवत्ता सुधारने और बाजार विस्तार में मदद मिल सकती है.
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