कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट और बेहतर तिमाही नतीजों से घरेलू बाजार ने दर्ज की लगातार दूसरी हफ्ते बढ़त, निवेशकों का भरोसा मजबूत
मुंबई, 8 अगस्त (आईएएनएस)। कच्चे तेल की कीमतों में आई तेज गिरावट और वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही के उम्मीद से बेहतर कॉरपोरेट नतीजों ने निवेशकों का भरोसा मजबूत किया, जिसके चलते भारतीय शेयर बाजार ने लगातार दूसरे सप्ताह बढ़त दर्ज की है। हालांकि सप्ताह के आखिरी कारोबारी दिन मुनाफावसूली देखने को मिली, फिर भी प्रमुख सूचकांक साप्ताहिक आधार पर सकारात्मक बढ़त के साथ बंद हुए।
सप्ताह के दौरान निफ्टी 0.77 प्रतिशत मजबूत हुआ, लेकिन शुक्रवार को इसमें 0.27 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई और यह 24,570 के स्तर पर बंद हुआ। वहीं सेंसेक्स 455 अंक यानी 0.58 प्रतिशत गिरकर 78,499 पर बंद हुआ। इसके बावजूद पूरे सप्ताह में सेंसेक्स ने 0.52 प्रतिशत की बढ़त हासिल की।
वहीं, व्यापक बाजार ने मुख्य सूचकांकों से बेहतर प्रदर्शन किया। सप्ताह के दौरान निफ्टी मिडकैप 100 इंडेक्स में 0.87 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की गई, जबकि निफ्टी स्मॉलकैप 100 इंडेक्स 2.73 प्रतिशत उछल गया। यह दर्शाता है कि निवेशकों का रुझान बड़े शेयरों के साथ-साथ मध्यम और छोटी कंपनियों की ओर भी बढ़ रहा है।
बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, स्मॉल-कैप शेयरों का प्रदर्शन सबसे बेहतर रहा। मजबूत तिमाही नतीजों और कंपनियों से जुड़े सकारात्मक घटनाक्रमों के चलते निवेशकों का रुझान इस श्रेणी की कंपनियों की ओर बना रहा। दूसरी ओर, पीएसयू बैंकिंग शेयरों में बेहतर बुनियादी स्थिति और मजबूत वित्तीय प्रदर्शन के कारण अच्छी खरीदारी देखने को मिली।
मेटल सेक्टर को देश में मजबूत मांग और आर्थिक विकास की बेहतर संभावनाओं का फायदा मिला। वहीं ऑटोमोबाइल कंपनियों के शेयरों में भी तेजी रही, क्योंकि बाजार को उम्मीद है कि आगामी त्योहारी सीजन में वाहनों की मांग मजबूत रहेगी।
सप्ताह की शुरुआत कुछ उतार-चढ़ाव के साथ हुई थी, जिसका कारण फ्यूचर्स एंड ऑप्शंस (एफएंडओ) सेगमेंट में नई क्लोजिंग ऑक्शन सेशन (सीएएस) व्यवस्था का लागू होना था। हालांकि निवेशकों और बाजार प्रतिभागियों के नई व्यवस्था के अनुरूप ढलने के बाद बाजार में स्थिरता लौट आई।
विश्लेषकों का कहना है कि बाजार की धारणा को सबसे अधिक समर्थन कच्चे तेल की कीमतों में आई बड़ी गिरावट से मिला। तेल सस्ता होने से भारत के लिए महंगाई और आयात लागत संबंधी चिंताओं में कमी आई है। इससे आर्थिक परिदृश्य बेहतर हुआ और निवेशकों का विश्वास बढ़ा।
वैश्विक स्तर पर भी बाजार को सहारा मिला। अमेरिका के श्रम बाजार से जुड़े अपेक्षाकृत नरम आंकड़ों के बाद निकट भविष्य में अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दर बढ़ाने की संभावना कम हुई है। इसके परिणामस्वरूप अमेरिकी बॉन्ड यील्ड और डॉलर दोनों में नरमी आई, जिससे उभरते बाजारों, विशेषकर भारत, के लिए निवेश माहौल बेहतर हुआ।
घरेलू मोर्चे पर भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने भी निवेशकों का भरोसा बढ़ाया। केंद्रीय बैंक ने अपनी मौद्रिक नीति में कोई बदलाव नहीं किया, साथ ही विकास दर (जीडीपी ग्रोथ) का अनुमान थोड़ा बढ़ाया और महंगाई का अनुमान कुछ कम किया, जिससे यह संदेश गया कि भारतीय अर्थव्यवस्था मजबूत स्थिति में बनी हुई है।
इसके अलावा, जारी तिमाही नतीजों के सीजन ने भी बाजार को मजबूती दी है। अधिकांश कंपनियों के परिणाम बाजार की अपेक्षाओं से बेहतर रहे हैं, जिससे विभिन्न क्षेत्रों में खरीदारी बढ़ी और निवेशकों का विश्वास मजबूत हुआ।
आगे की दिशा को लेकर बाजार की नजर अब अमेरिका के रोजगार और महंगाई आंकड़ों पर रहेगी, जिनसे फेडरल रिजर्व की आगामी नीतियों के बारे में संकेत मिल सकते हैं। वहीं घरेलू स्तर पर उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई), थोक मूल्य सूचकांक (डब्ल्यूपीआई) और बैंक ऋण वृद्धि (क्रेडिट ग्रोथ) के आंकड़े भारतीय अर्थव्यवस्था की स्थिति और महंगाई के रुख को समझने के लिए महत्वपूर्ण होंगे।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि कच्चे तेल की कीमतें नियंत्रित रहती हैं और कंपनियों के नतीजे मजबूत बने रहते हैं, तो आने वाले हफ्तों में भारतीय शेयर बाजार को और समर्थन मिल सकता है।
--आईएएनएस
डीबीपी
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फेसबुक-इंस्टाग्राम की कानूनी सुरक्षा वापस ले सकती है सरकार:रिकमेंडेशन सिस्टम और पैसों के बदले कंटेंट प्रमोशन बड़ा मुद्दा, मेटा को इंसानी निगरानी बढ़ाने को कहा
सोशल मीडिया कंपनी मेटा और भारत सरकार के बीच चल रही बैठकों के बाद एक बड़ा कानूनी और तकनीकी सवाल खड़ा हो गया है। सरकारी सूत्रों के मुताबिक मुख्य मुद्दा यह है कि क्या मेटा के रिकमेंडेशन सिस्टम और पैसों के बदले कंटेंट का प्रमोशन उसे एक साधारण प्लेटफॉर्म बनाए रखते हैं या फिर वह पब्लिशर की भूमिका में आ जाती है। यदि कोई प्लेटफॉर्म यह खुद तय करता है कि किस यूजर को क्या कंटेंट दिखाया जाएगा और पैसे लेकर कंटेंट को प्रमोट करता है, तो उसे पब्लिशर माना जा सकता है। ऐसा होने पर कंपनी को अपने प्लेटफॉर्म पर पोस्ट होने वाले कंटेंट की पूरी जिम्मेदारी लेनी होगी और IT एक्ट के तहत मिलने वाली कानूनी छूट यानी सेफ हार्बर स्टेटस गंवाना पड़ सकता है। क्या है 'सेफ हार्बर' प्रोटेक्शन और क्यों खतरे में है मेटा का स्टेटस? IT एक्ट की धारा 79 सोशल मीडिया कंपनियों को 'सेफ हार्बर' यानी कानूनी सुरक्षा कवच देती है। इसके तहत किसी यूजर द्वारा पोस्ट की गई विवादित या गलत जानकारी के लिए प्लेटफॉर्म जैसे फेसबुक या इंस्टाग्राम को सीधे जिम्मेदार नहीं ठहराया जाता। हालांकि, यह छूट तभी तक मिलती है जब तक कंपनी पूरी तरह 'ड्यू डिलिजेंस' यानी कानूनी नियमों और सावधानियों का पालन करे। सरकारी सूत्रों का कहना है कि अगर प्लेटफॉर्म खुद एल्गोरिदम के जरिए यह तय कर रहा है कि क्या कंटेंट किसको दिखेगा, तो यह पब्लिशिंग यानी प्रकाशन के दायरे में आता है। नियमों का पालन न करने पर आईटी एक्ट और भारतीय न्याय संहिता के तहत कंपनी पर सीधी कार्रवाई की जा सकती है। पीएम मोदी की पोस्ट हटाने पर मार्क जुकरबर्ग की तरफ से मांगी गई माफी हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की एक फेसबुक पोस्ट को अस्थायी रूप से हटाने यानी रिस्ट्रिक्ट करने के बाद सरकार ने मेटा के ग्लोबल अफेयर्स हेड जोएल कपलान को समन भेजा था। इसके बाद कपलान की टीम ने आईटी मंत्री अश्विनी वैष्णव और आईटी सचिव एस. कृष्णन से मुलाकात की। सूत्रों के मुताबिक, पीएम की पोस्ट हटने और प्लेटफॉर्म पर डीपफेक व अन्य गड़बड़ियों को लेकर मेटा प्रमुख मार्क जुकरबर्ग की ओर से माफी मांगी गई है। संसदीय स्थायी समिति ने भी इस घटना पर नाराजगी जताते हुए जुकरबर्ग से 3 दिनों के भीतर माफी मांगने को कहा था और ऐसा न करने पर कानूनी सुरक्षा वापस लेने की चेतावनी दी थी। डीपफेक और चाइल्ड अब्यूज कंटेंट पर सरकार का सख्त रुख दो दिनों तक चले कड़े सवालों-जवाबों के बाद शुक्रवार को सरकार और मेटा के अधिकारियों के बीच तकनीकी चर्चा हुई। सरकार ने मेटा से पूछा कि फ्लैग (रिपोर्ट) किए जाने के बाद भी एआई-जनरेटेड हानिकारक कंटेंट और डीपफेक वीडियो बार-बार प्लेटफॉर्म पर क्यों दिखने लगते हैं। साथ ही, आईटी नियमों के तहत एआई या सिंथेटिक कंटेंट पर 'लेबल' लगाना अनिवार्य है, लेकिन बिना लेबल वाले एआई वीडियो अभी भी कैसे सर्कुलेट हो रहे हैं? मेटा ने माना कि ये गंभीर मुद्दे हैं और इन्हें सुलझाने के लिए लगातार काम करने का भरोसा दिया है। भारतीय भाषाओं को समझने के लिए 'ह्यूमन ओवरसाइट' बढ़ाने के निर्देश बैठक के दौरान सरकार ने मेटा से स्पष्ट शब्दों में कहा कि वह केवल ऑटोमेटेड या एआई सिस्टम पर निर्भर न रहे। कंटेंट मॉडरेशन के लिए इंसानी निगरानी यानी ह्यूमन ओवरसाइ को बढ़ाया जाए। सरकार ने कहा कि मेटा को भारत की स्थानीय बारीकियों, संस्कृतियों और विभिन्न भारतीय भाषाओं की बेहतर समझ रखने वाली टीमों को तैनात करना होगा, ताकि सही समय पर आपत्तिजनक कंटेंट को हटाया जा सके।
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