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बांग्लादेश: ईरान संघर्ष का असर, ईंधन और खाद्य पदार्थों की कीमतें बढ़ीं

नई दिल्ली, 5 अप्रैल (आईएएनएस)। ईरान संघर्ष का असर बांग्लादेश की अर्थव्यवस्था पर भी दिखने लगा है। द डेली स्टार की एक रिपोर्ट के मुताबिक, ईंधन, उर्वरक, माल ढुलाई और विदेशी मुद्रा जैसे अहम क्षेत्रों पर दबाव बढ़ रहा है।

भले ही बांग्लादेश इस संघर्ष क्षेत्र से भौगोलिक रूप से दूर है, लेकिन वैश्विक अर्थव्यवस्था से गहरे जुड़ाव के कारण इसका असर तेजी से महसूस हो रहा है।

इस व्यवधान का सबसे बड़ा कारण स्ट्रेट ऑफ होर्मुज है, जहां से दुनिया के लगभग पांचवें हिस्से का तेल और एलएनजी गुजरता है। इस मार्ग में किसी भी तरह की बाधा ऊर्जा आपूर्ति, शिपिंग और उर्वरक की उपलब्धता को प्रभावित करती है, जो कृषि के लिए बेहद जरूरी हैं।

वैश्विक बाजार में इसका असर दिखने लगा है। कच्चे तेल की कीमत 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच चुकी है, एलएनजी की आपूर्ति में देरी हो रही है और माल ढुलाई की लागत बढ़ रही है। उर्वरकों की कीमतों में भी उछाल देखा जा रहा है, जिससे खाद्य उत्पादन पर खतरा मंडरा रहा है।

बांग्लादेश के लिए ये सभी झटके एक साथ आ रहे हैं। ऊर्जा की बढ़ती लागत बिजली और परिवहन की कीमतों को ऊपर ले जा रही है, जबकि महंगे उर्वरक कृषि लागत को बढ़ा रहे हैं। इसके साथ ही माल ढुलाई महंगी होने से आयात लागत में भी इजाफा हो रहा है। रिपोर्ट में कहा गया है कि समस्या सिर्फ कीमतों में वृद्धि की नहीं है, बल्कि इन जरूरी वस्तुओं की उपलब्धता भी चिंता का विषय बनती जा रही है।

ईंधन, उर्वरक या शिपिंग में किसी भी तरह की कमी अर्थव्यवस्था को कीमतों से भी ज्यादा नुकसान पहुंचा सकती है। आयात महंगा हो रहा है, इससे निर्यात और प्रवासी आय (रिमिटेंस) पर भी दबाव पड़ सकता है, खासकर अगर खाड़ी देशों के श्रम बाजार कमजोर होते हैं।

सरकार पर वित्तीय दबाव भी बढ़ रहा है। वैश्विक ईंधन कीमतों का पूरा असर जनता तक न पहुंचे, इसके लिए सब्सिडी दी जा रही है, जिससे सरकारी खजाने पर बोझ बढ़ रहा है। वहीं, कमजोर कर संग्रह के कारण अतिरिक्त राहत देने की गुंजाइश सीमित हो गई है।

ऊर्जा और उर्वरक की बढ़ती लागत का असर परिवहन और खाद्य कीमतों पर पड़ रहा है, जिससे “कॉस्ट-पुश” महंगाई की स्थिति बन रही है। ऐसी स्थिति में केवल मौद्रिक नीति से महंगाई को नियंत्रित करना मुश्किल हो जाता है और सरकार को महंगाई तथा आर्थिक विकास के बीच संतुलन बनाना पड़ता है।

रिपोर्ट के अनुसार, वित्तीय क्षेत्र पर भी इसका असर पड़ सकता है। यदि आर्थिक गतिविधियां धीमी होती हैं तो पहले से कमजोर बैंकिंग व्यवस्था पर और दबाव बढ़ सकता है, जिससे व्यापक आर्थिक स्थिरता के लिए नई चुनौतियां खड़ी हो सकती हैं।

--आईएएनएस

केआर/

डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.

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ऐसे अमेरिका ने अपने पायलट मौत से मुंह से बाहर निकाला! ट्रंप बोले- ईरान को रोकने के लिए झोंक दी पूरी ताकत

ईरान के दुर्गम पहाड़ो में 48 घंटे तक छिपे अमेरिकी एयरफोर्स अधिकारी को बड़ी जद्दोजहद के बाद बचाया जा सका. अमेरिका ने अपनी पूरी ताकत उसे बचाने में झोंक दी. इस अभियान में एयरस्ट्राइक, कमांडो और जेट्स के जरिए अंजाम दिया गया. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने मिशन की सफलता की जानकारी दी और कहा, हमने उसे ढूंढ लिया!' यह ऑफिसर उस F-15E फाइटर जेट का हिस्सा था. इसे ईरानी सेना ने मार गिराया था.

पायलट के पास अपनी सुरक्षा के लिए सिर्फ एक पिस्टल थी. वह अपने आपको आसाहय समझ कर छिपा हुआ था. मगर एक उम्मीद थी कि ईरान के हत्थे चढ़ने से पहले ही रेस्क्यू टीम वहां पर पहुंच जाएगी. यह अधिकारी एक कर्नल और वेपन सिस्टम स्पेशलिस्ट थ. यह F-15E Strike Eagle विमान को ईरानी बलों की ओर से मार गिराए जाने के बाद से वह लापता हो चुका था. एक पायलट को पहले बचा लिया गया था. मगर दूसरा क्रू मेंबर अभी भी लापता था. वह ईरान के पहाड़ी इलाकों में छिपा हुआ था. इसके बाद बड़े स्तर पर रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया गया. 

दुश्मन की सरजमीं पर खौफनाक रातें 

विमान के क्रैश होने के बाद पायलट पैराशूट से सुरक्षित लैंडिंग की मगर वह सीधे दुश्मन के इलाके में गिरा. अमेरिकी अधिकारियों ने न्यूयॉक टाइम्स को जानकारी दी कि पायलट दो दिनों तक भूखे प्यासे दुश्मन के इलाके में छिपा था. उसकी तलाशा लगातार ईरानी बल कर रहे थे. 

लोकेशन से अवगत करा रहा था

पायलट के पास मात्र एक पिस्टल, एक डिस्टेस बीकन, GPS ट्रैकर और सिक्योर कम्युनिकेशन डिवाइस मौजूद थी. इनकी सहायता से वह अमेरिकी सेना से लगातार संपर्क कर रहा था. इसके साथ उन्हें अपनी लोकेशन से अवगत करा रहा था. इस दौरान ईरानी सेना ने उसकी तलाश में इनाम का ऐलान किया था. वह स्थानीय लोगों को भी उसे ढूंढ़ने में लगा रही थी. अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, कर्नल ने ऊंचाई वाले इलाकों में छिपकर और अपनी लोकेशन को गुप्त रखा. दो दिनों तक गिरफ्तारी को टाल दिया. 

रिपोर्ट्स के तहत जिस इलाके में वह उतरा था, वहां पर ईरान सरकार के विरोधी समूह का दबदबा था. यहां पर ईरान सरकार के विरोधी समूह मौजूद थे. ऐसे में यह कयास लगाए जा रहे थे कि एयरमैन को स्था​नीय लोगों का साथ मिल रहा था. दूसरी ओर अमेरिकी सेना ने उसे बचाने के लिए पूरी तैयारी कर ली थी ताकि वह ईरान के हत्थे न लग जाए. 

दर्जनों विमानों की तैनाती की गई

उसे बचाने के लिए अमेरिका ने पूरी ताकत लगा दी. ट्रंप के आदेश पर दुनिया के सबसे घातक हथियारों से लैस दर्जनों विमानों की तैनाती की गई. इस मिशन के लिए स्पेशल ऑपरेशन फोर्स, कई फाइटर जेट, हेलीकॉप्टर, साइबर, स्पेस और इंटेलिजेंस सिस्टम का उपयोग किया गया.  

ये भी पढ़ें: US Iran Conflict: एक गलती और तबाही शुरू! ईरान-अमेरिका जंग का न्यूक्लियर मोड़; खाड़ी देशों में बढ़ी चिंता

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  Sports

नजफगढ़ का ‘प्रिंस’: जिसने आईपीएल का सपना पूरा करने के लिए कांस्टेबल की परीक्षा छोड़ दी थी

 कुछ साल पहले तक नजफगढ़ में रहने वाले रेलवे सुरक्षा बल के सहायक सब इंस्पेक्टर (एएसआई) राम निवास यादव अपने सबसे छोटे बेटे प्रिंस के भविष्य को लेकर बेहद चिंतित थे, जिसकी दिलचस्पी केवल टेनिस बॉल टूर्नामेंट में यॉर्कर गेंदबाजी करने में थी। लेकिन इस युवा क्रिकेटर को खुद पर भरोसा था और उसने अपने पिता से सीधे शब्दों में कह दिया, ‘‘आप मेरी चिंता करना छोड़ दो। मैं अपने से कुछ कर लूंगा।’’ अब बात करते हैं 2026 की। वह बेपरवाह दिखने वाला लड़का अपने वादे पर खरा उतर चुका है।

लखनऊ सुपर जायंट्स के इस स्विंग गेंदबाज का नाम है प्रिंस यादव, जो इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल) में अक्षर पटेल और ईशान किशन जैसे अनुभवी भारतीय बल्लेबाजों के डिफेंस को भेदने में सफल रहा। प्रिंस के पिता रामनिवास ने कहा, ‘‘कोई भी पिता अपने बच्चों के भविष्य को लेकर चिंतित होगा और मैं भी था। 18 साल की उम्र तक उसने चमड़े की गेंद से एक बार भी गेंदबाजी नहीं की थी। मैंने उसे दिल्ली पुलिस के कांस्टेबल की परीक्षा में बैठने के लिए मजबूर किया। वह शारीरिक रूप से फिट था, लेकिन लिखित परीक्षा के लिए अच्छी तरह से तैयार नहीं था क्योंकि उसका ध्यान कहीं और था।’’

रामनिवास ने आखिर अपने बेटे की जिद मान ली क्योंकि उनके पास अपने बेटे का साथ देने के अलावा कोई और विकल्प नहीं था। उन्होंने कहा, ‘‘बेटे की ज़िद है और हमें पूरा करना था। एक एएसआई के वेतन में कितना ही गुज़ारा हो पाता है। लेकिन मुझे खुशी है कि मैंने उसे अपनी इच्छा पूरी करने दी।’’ प्रिंस के शानदार प्रदर्शन के बाद अब नजफगढ़ के खेड़ा डाबर गांव से भी लोग उनके घर पर बधाई देने के लिए आने लगे हैं।

उन्होंने कहा, ‘‘पहले हमारे इस इलाके को लोग इसलिए जानते थे क्योंकि पूर्व राष्ट्रपति साहिबा (प्रतिभा पाटिल) चौधरी ब्रह्म प्रकाश आयुर्वेदिक संस्थान का उद्घाटन करने (2012में) यहां आई थी। अब हमारा इलाका क्रिकेट के लिए फेमस हो गया है।’’ राम निवास के अनुसार प्रिंस के पहले और अब तक के एकमात्र कोच अमित वशिष्ठ और भारत के अंडर-19 विश्व कप विजेता तेज गेंदबाज प्रदीप सांगवान ने उनके खेल में निखार लाने में अहम भूमिका निभाई।

उन्होंने कहा, “मैं अमित सर का जितना भी शुक्रिया अदा करूं, कम है। उन्होंने प्रिंस को टेनिस टूर्नामेंट खेलते हुए देखा और उसे नजफगढ़ स्थित अपनी अकादमी से जुड़ने के लिए कहा। प्रदीप जी (सांगवान) भी अमित सर के शिष्य थे और उन्होंने प्रिंस को फिटनेस में मदद की।’’ एक समय ऐसा भी था जब प्रिंस अपनी पीठ पर रेत की बोरी बांधकर धान के खेतों में दौड़ते थे ताकि उनके शरीर का ऊपरी हिस्सा मजबूत बन जाए।

रामनिवास ने कहा, ‘‘प्रदीप ने उसका बहुत मार्गदर्शन किया और अमित सर ने उसके खेल में सुधार किया। मैं डीपीएल (दिल्ली प्रीमियर लीग) और नयी दिल्ली टीम को कैसे भूल सकता हूं। अगर डीपीएल नहीं होता, तो मुझे नहीं लगता कि मेरे बेटे की प्रगति इतनी तेज़ होती। इसलिए मैं डीडीसीए और विजय दहिया सर का भी आभारी हूं।’’

प्रिंस के कोच वशिष्ठ ने कहा,‘‘वह यॉर्कर गेंदें फेंक सकता था और टेनिस बॉल को भी अच्छी गति से स्विंग करा सकता था। जब मैंने उसे देखा तो मैंने उसके दोस्तों से कहा कि वे उसे मुझसे मिलने के लिए कहें। वह पहले से ही 18 साल का था और उसके पास अपनी काबिलियत साबित करने के लिए बहुत कम समय था।’’ वशिष्ठ को लगता है कि प्रिंस की कड़ी मेहनत करने की क्षमता ही उन्हें दूसरों से अलग बनाती है।

उन्होंने कहा, ‘‘वह कड़ी मेहनत करने से पीछे नहीं हटा। वह दिल्ली की भीषण गर्मी में भी दो घंटे गेंदबाजी कर सकता है। प्रदीप के साथ काम करने से उसकी फिटनेस में सुधार हुआ है। वह जहीर खान और भरत अरुण से भी टिप्स ले चुका है। अब उसकी सफलता की कोई सीमा नहीं है।

Tue, 07 Apr 2026 17:17:33 +0530

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