LPG कालाबाजारी पर लगने वाला है ब्रेक, सरकार ने लागू की ये नई व्यवस्था, जानिए कैसे उठाएं फायदा
LPG New Delivery Rules 2026: देशभर में एलपीजी गैस सिलेंडरों की कालाबाजारी की शिकायतें लंबे समय से सामने आ रही थीं. कई उपभोक्ताओं का कहना था कि उन्होंने पहले ही गैस बुक कर रखी है, फिर भी उन्हें समय पर सिलेंडर नहीं मिल रहा. वहीं कुछ लोग अतिरिक्त पैसे देकर अर्जेंट में सिलेंडर हासिल कर लेते थे. इस असमानता को खत्म करने के लिए पेट्रोलियम कंपनियों ने अब एक बड़ा और सकारात्मक बदलाव किया है.
FIFO नियम सख्ती से लागू
इस नई व्यवस्था के तहत अब गैस वितरण में FIFO (First In, First Out) नियम को सख्ती से लागू किया गया है. इसका मतलब है कि जिसने पहले गैस बुक की है, उसे पहले सिलेंडर मिलेगा. इससे उन लोगों को राहत मिलेगी जो कई दिनों या हफ्तों से अपनी बुकिंग का इंतजार कर रहे थे.
पारदर्शिता बढ़ाने के लिए नया नियम
अब हर गैस एजेंसी को अपने काउंटर पर एक सूची लगानी होगी. इस सूची में साफ-साफ लिखा होगा कि आज किस तारीख तक की बुकिंग वाले उपभोक्ताओं को सिलेंडर दिया जा रहा है. इससे उपभोक्ताओं को यह पता चल सकेगा कि उनकी बारी कब आएगी. पहले कई जगहों पर यह जानकारी छुपाई जाती थी, जिससे भ्रम और शिकायतें बढ़ती थीं. लेकिन अब यह अनिवार्य कर दिया गया है, ताकि पूरी प्रक्रिया पारदर्शी बनी रहे.
अर्जेंट सिलेंडर की सुविधा खत्म
नई व्यवस्था के तहत अब अतिरिक्त पैसे देकर जल्दी सिलेंडर लेने की सुविधा पूरी तरह बंद कर दी गई है. यानी अब कोई भी व्यक्ति नियम तोड़कर या पैसे देकर अपनी बारी आगे नहीं बढ़ा सकता. यह कदम खासतौर पर उन लोगों के लिए राहत भरा है जो ईमानदारी से अपनी बारी का इंतजार करते थे, लेकिन सिस्टम की खामियों के कारण पीछे रह जाते थे.
कालाबाजारी पर सख्ती
गैस सिलेंडरों की कालाबाजारी रोकने के लिए भी कड़े नियम लागू किए गए हैं. अब गैस एजेंसियों को सिर्फ 1.5 दिन का ही बफर स्टॉक रखने की अनुमति होगी. इससे एजेंसी मालिक सिलेंडर छिपाकर ऊंचे दामों पर बेच नहीं पाएंगे. पहले कुछ एजेंसियों पर आरोप लगते थे कि वे जानबूझकर स्टॉक रोककर रखते हैं और बाद में ज्यादा पैसे लेकर बेचते हैं. अब इस पर रोक लगाने के लिए यह कदम उठाया गया है.
कंपनियां रखेंगी कड़ी नजर
पेट्रोलियम कंपनियां अब एजेंसियों पर नजर रखने के लिए डिजिटल और फिजिकल दोनों तरीके अपनाएंगी. हर एजेंसी को रोजाना यह जानकारी देनी होगी कि उनके पास कितने सिलेंडर आए और कितने वितरित किए गए. इस डेटा को रियल-टाइम में मॉनिटर किया जाएगा, जिससे किसी भी गड़बड़ी को तुरंत पकड़ा जा सके. जरूरत पड़ने पर कंपनियां अचानक जांच भी कर सकती हैं.
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आम उपभोक्ताओं को क्या फायदा?
इस नई व्यवस्था से आम लोगों को कई बड़े फायदे मिलेंगे. सबसे पहले जो लोग पहले से बुकिंग कर चुके हैं, उन्हें समय पर सिलेंडर मिलने की संभावना बढ़ेगी. दूसरा ये कि वितरण में पारदर्शिता आएगी. कालाबाजारी और भ्रष्टाचार में भी कमी देखने को मिलेगी. साथ ही सभी उपभोक्ताओं को समान अधिकार मिलेगा. अब गैस की कमी के समय भी सिस्टम ज्यादा व्यवस्थित और निष्पक्ष रहेगा.
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शिकायत करने का अधिकार
अगर कोई गैस एजेंसी इन नियमों का पालन नहीं करती या काउंटर पर सूची नहीं लगाती, तो उपभोक्ता इसकी शिकायत कर सकते हैं. यह कदम उपभोक्ता अधिकारों को मजबूत करने की दिशा में भी काफी अहम है.
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अबू धाबी के पेट्रोकेमिकल्स प्लांट में आग, रोका गया काम
अबू धाबी, 5 अप्रैल (आईएएनएस)। संयुक्त अरब अमीरात की राजधानी अबू धाबी स्थित बोरूज पेट्रोकेमिकल्स प्लांट के कई हिस्सों में लगी आग की वजह से काम रोक दिया गया है।
अबू धाबी मीडिया ऑफिस ने एक्स प्लेटफॉर्म पर इसकी जानकारी दी। बताया कि एयर डिफेंस फोर्स ने एयर स्ट्राइक का सफल बचाव किया लेकिन इस दौरान जो मलबा गिरा उसकी वजह से प्लांट के कई हिस्सों में आग लग गई।
आग बुझाने की कोशिश के बीच प्लांट में काम तुरंत रोक दिया गया है और ऐसा नुकसान का अंदाजा लगाने तक जारी रहेगा। किसी के घायल होने की खबर नहीं है। कार्यालय के अनुसार मामले का अपडेट लोगों को दिया जाता रहेगा। लोगों से अपील की गई है कि वे अफवाहों पर विश्वास न करें और सरकार की ओर से मुहैया कराई सूचना पर नजर बनाए रखें, साथ ही बिना वेरिफिकेशन वाली जानकारी फैलाने से बचें।
दूसरी ओर, बहरीन की गल्फ पेट्रोकेमिकल इंडस्ट्रीज कंपनी के कई ऑपरेशनल यूनिट्स पर ड्रोन हमला किया गया। बहरीन न्यूज एजेंसी के मुताबिक, ईरानी ड्रोन हमले से यूनिट्स में आग लग गई, लेकिन बाद में उस पर काबू पा लिया गया।
रिपोर्ट के मुताबिक, किसी के हताहत होने की खबर नहीं है, और स्पेशल टीमें अभी इस घटना से हुए नुकसान का पूरा आकलन कर रही हैं।
वहीं, कुवैत में भी रातभर ड्रोन हमले की जानकारी स्थानीय मीडिया ने दी है। इन हमलों में बिजली-पानी प्लांट और तेल परिसर को भारी नुकसान पहुंचा है।
रिपोर्ट के अनुसार, पिछले कुछ दिनों से कुवैत और यूएई ईरानी हमलों का मुख्य निशाना बने हुए हैं।
अधिकारियों ने बताया कि ड्रोन हमलों में दो बिजली और पानी के डिसैलिनेशन प्लांट को निशाना बनाया गया, जिससे उन्हें काफी नुकसान हुआ है।
इसके अलावा, कुवैत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन ने बताया कि ड्रोन हमले के बाद शुवैख ऑयल सेक्टर कॉम्प्लेक्स में आग लग गई।
28 फरवरी से यूएस-इजरायल के संयुक्त हमले के बाद से ही खाड़ी देश निशाने पर हैं। ईरान जवाबी कार्रवाई के तहत इन देशों में मौजूद अमेरिकी सैन्य बेस पर मिसाइल या ड्रोन से हमले कर रहा है।
--आईएएनएस
केआर/
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