अमृतसर, आठ अगस्त अकाल तख्त द्वारा नियुक्त विशेषज्ञ समिति ने शुक्रवार को पंजाब सरकार से कहा कि बेअदबी के खिलाफ प्रस्तावित कानून पर आगे कोई भी चर्चा करने से पहले, सिखों की सर्वोच्च धार्मिक संस्था द्वारा उठायी गयी आपत्तियों पर अनुपालन रिपोर्ट सौंपी जाए। राज्य सरकार के साथ ‘जागत जोत श्री गुरु ग्रंथ साहिब सत्कार (संशोधन) अधिनियम, 2026’ से जुड़े मुद्दों पर चर्चा करने के लिए बनाई गई समिति ने बृहस्पतिवार को अपनी पहली बैठक की। उसने बताया कि सरकार का 29 जुलाई का जवाब अकाल तख्त की ओर से उठाई गईं बुनियादी आपत्तियों का समाधान करने में नाकाम रहा है, खासकर उन प्रावधानों के संबंध में जो सिखों के धार्मिक मामलों में दखल से जुड़े हैं।
अकाल तख्त के जत्थेदार ज्ञानी कुलदीप सिंह गड़गज ने 29 जून को राज्य सरकार को निर्देश दिया था कि वे बेअदबी विरोधी कानून से जुड़ी उनकी आपत्तियों पर एक महीने के भीतर कार्रवाई करें। शुक्रवार को जारी एक बयान में अकाल तख्त सचिवालय ने कहा, ‘‘एक महीने की समय-सीमा खत्म होने से ठीक एक दिन पहले पंजाब सरकार से मिला जवाब साफ तौर पर तथ्यों को छिपाने और मामले से बचने की कोशिश है। ‘खालसा पंथ’ की चिंताओं के बारे में 31 जुलाई, 2026 को पंजाब विधानसभा के अध्यक्ष और पंजाब मंत्रिमंडल के सदस्यों को साफ तौर पर बता दिया गया था।’’ इसमें कहा गया, ‘‘बेअदबी के गंभीर और संवेदनशील मुद्दे का समाधान खोजने के मामले में सरकार का अब तक का रवैया सकारात्मक नहीं रहा है।
अकाल तख्त की ओर से काफी समय दिए जाने के बावजूद, पंजाब सरकार ने इस मुद्दे पर विचार-विमर्श करने के लिए अभी तक अपनी समिति नहीं बनायी है।’’ करीब एक हफ्ते पहले, जत्थेदार गड़गज ने बेअदबी-रोधी कानून के बारे में पंजाब सरकार के जवाब को ‘‘असंतोषजनक’’ बताते हुए खारिज कर दिया था और इस मुद्दे पर आम आदमी पार्टी सरकार से बातचीत करने के लिए विशेषज्ञों की पांच-सदस्यीय समिति बनाने की घोषणा की थी।
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अमेरिकी सीनेट ने रूस और उसके पेट्रोलियम उत्पादों (तेल और प्राकृतिक गैस) को खरीदने वाले देशों पर कड़े प्रतिबंध लगाने से जुड़ा एक महत्वपूर्ण विधेयक (Bill) पास कर दिया है। 86-11 के भारी बहुमत से पारित इस बिल के दायरे में भारत और चीन जैसे बड़े देश भी सीधे तौर पर आ सकते हैं। बिल के समर्थकों का तर्क है कि रूस से ऊर्जा खरीद जारी रखने वाले देश अप्रत्यक्ष रूप से मॉस्को को यूक्रेन के खिलाफ युद्ध जारी रखने के लिए फंड दे रहे हैं।
इस बिल का नाम बदलकर 'लिंडसे ओ. ग्राहम सैंक्शनिंग रशिया एंड ईरान एक्ट ऑफ 2026' कर दिया गया है और अब इसे हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स (अमेरिकी संसद का निचला सदन) में भेजा जाएगा। ग्राहम एक रिपब्लिकन सीनेटर थे जिनका 11 जुलाई को निधन हो गया था; उन्होंने यूक्रेन युद्ध के कारण रूस पर प्रतिबंध लगाने की पुरजोर वकालत की थी।
हालांकि, हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स में इस पर वोटिंग सितंबर में ही होगी क्योंकि कांग्रेस (अमेरिकी संसद) में गर्मियों की छुट्टियां चल रही हैं।
AFP के अनुसार, सीनेट की विदेश संबंध समिति के चेयरमैन रिपब्लिकन जिम रिस्क ने कहा, "इससे रूस बातचीत की मेज पर आ सकता है और यह संघर्ष खत्म हो सकता है। इसका ऐसा निर्णायक असर होगा जो युद्ध के मैदान में हासिल होने वाले नतीजों से कहीं ज़्यादा होगा। इससे पुतिन की युद्ध मशीन को चलाने वाले कैश का फ्लो रुक जाएगा।"
क्या बिल का निशाना भारत और चीन हैं?
इस बिल का निशाना रूस का एनर्जी सेक्टर है और यह ट्रंप प्रशासन को रूस से होने वाले आयात (जिसमें गैस और तेल शामिल हैं) पर 500 प्रतिशत तक टैरिफ लगाने की इजाज़त देगा। यह US को रूसी कच्चे तेल के पांच बड़े आयातकों पर 100 प्रतिशत टैरिफ लगाने की भी इजाज़त देता है। फिलहाल, रूसी तेल और गैस के पांच मुख्य आयातक चीन, भारत, अज़रबैजान, हंगरी और स्लोवाकिया हैं।
एनर्जी सेक्टर के अलावा, यह बिल रूसी नेताओं और अधिकारियों (जिनमें राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन शामिल हैं), साथ ही रईस कारोबारियों (ओलिगार्क्स) और वित्तीय संस्थानों को भी निशाना बनाएगा। यह 'ईरान सैंक्शन एक्ट ऑफ 1996' की समय-सीमा को भी 2031 तक बढ़ा देगा; यह कानून उन कंपनियों को दंडित करता है जो ईरान के एनर्जी सेक्टर में निवेश करती हैं।
हालांकि, डेमोक्रेट्स ने इस बिल की आलोचना की है और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पर टैरिफ का इस्तेमाल एक हथियार के तौर पर करने का आरोप लगाया है। न्यूज़ एजेंसी PTI के अनुसार, डेमोक्रेट कांग्रेस सदस्य ग्रेगरी मीक्स और डॉन बेयर ने कहा, "हम यूक्रेन का समर्थन करने और रूस के लगातार गैर-कानूनी युद्ध के लिए उसे सज़ा देने की दिशा में सीनेट में अपने सहयोगियों की तत्काल कोशिशों का स्वागत करते हैं, लेकिन यह बिल उन लक्ष्यों को हासिल नहीं कर पाएगा। इसके बजाय, यह राष्ट्रपति ट्रंप को रूस को जवाबदेह ठहराने से बचने और अपने विनाशकारी व्यापार युद्धों में और अधिक टैरिफ लगाने की छूट देगा, जिसका खामियाजा अमेरिकियों को भुगतना पड़ेगा।"
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