वैभव सूर्यवंशी ने बनाया 'छक्कों' का एक खास रिकॉर्ड, IPL में कोई भी नहीं कर पाया था कभी ऐसा
Vaibhav Suryavanshi: स्टार ओपनर वैभव सूर्यवंशी जब-जब मैदान पर उतरते हैं, तब-तब हर किसी की नजरें उन्हीं पर टिकी रहती हैं और वह कोई न कोई बड़ा कारनामा करके ही वापस लौटते हैं. शनिवार को गुजरात टाइटंस के खिलाफ खेले गए मैच में भी वैभव ने भले ही 31 रनों की पारी खेली, लेकिन इस दौरान उन्होंने एक बड़ा कारनामा किया, जो एक बार फिर साबित करता है कि वह सबसे तूफानी बल्लेबाजों में शुमार हैं.
Vaibhav Suryavanshi ने किया बड़ा कारनामा
IPL 2026 में अहमदाबाद के नरेंद्र मोदी स्टेडियम में गुजरात टाइटंस के सामने बल्लेबाजी करने उतरे वैभव सूर्यवंशी 18 गेंद पर 31 रन बनाकर पवेलियन लौट गए, जिसमें उन्होंने 5 चौके और 1 छक्का लगाया. अपनी पारी में एक सिक्स लगाते ही वैभव ने आईपीएल में 30 छक्के पूरे कर लिए और वह आईपीएल इतिहास में सबसे तेज 30 छक्के लगाने वाले बल्लेबाज बन गए हैं.
जहां, वैभव ने 157 गेंदों पर 30 छक्के पूरे कर लिए. वहीं, लिस्ट में मौजूद ऋषभ पंत ने 373 गेंदों पर, ईशान किशन ने 431 गेंदों में आईपीएल में 30 छक्के लगाए थे.
IPL में ऐसे हैं वैभव सूर्यवंशी के रिकॉर्ड
वैभव सूर्यवंशी ने आईपीएल में अब तक कुल 9 मुकाबले खेले, जिसमें उन्होंने 213.38 की स्ट्राइक रेट और 37.22 के औसत से 335 रन बनाए हैं. इस दौरान उन्होंने 1 शतक और 2 अर्धशतक लगाए हैं. वहीं, वैभव ने इस सीजन में अब तक 2 मैच खेले हैं, जिसमें 237.14 की स्ट्राइक रेट और 41.50 के औसत से 83 रन बनाए.
Never give up ???? pic.twitter.com/kjLdRQE8TM
— Vaibhav Sooryavanshi (@Vaibhavsooryava) April 4, 2026
वैभव और यशस्वी ने मिलकर बनाया महारिकॉर्ड
वैभव सूर्यवंशी ने मोहम्मद सिराज की पहली ओवर की दूसरी गेंद पर फाइन लेग की ओर ग्लांस करके चौका मारते ही रिकॉर्ड बना दिया. उन्होंने अपने साथ यशस्वी जायसवाल का नाम भी इतिहास में दर्ज कर दिया. इस बाउंड्री के साथ ही वैभव और जायसवाल आईपीएल के इतिहास में सबसे तेज 500 रन बनाने वाली पहली जोड़ी बन गए. इससे पहले यह रिकॉर्ड वीरेंद्र सहवाग और गौतम गंभीर के नाम था.
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रेखा का जीजा है बॉलीवुड का ये खूंखार विलेन, क्रिकेटर बनने का था देखा सपना, फिर ऐसे पलटी किस्मत
Birthday Special: बॉलीवुड की फिल्मों में हीरो जितना अहम होता है उतना ही जरूरी एक मजबूत विलेन भी होता है, जो कहानी को और ज्यादा मजेदार बनाता है और दर्शकों पर गहरा असर छोड़ता है. इसी कड़ी में बॉलीवुड के विलेन कलाकारों में तेज सप्रू (Tej Sapru) का नाम खास तौर पर लिया जाता है. जी हां, अमरीश पुरी, शक्ति कपूर, परेश रावल जैसे शानदार खलनायकों की परंपरा को आगे बढ़ाने वाले एक्ट्रेस रेखा के जीजाजी यानी एक्टर तेज सप्रू ही हैं. ऐसे में चलिए आज उनके बर्थडे पर जानते हैं उनसे जुडी कुछ खास बातें...
शुरुआती जीवन और सपना
तेज सप्रू का जन्म 5 अप्रैल 1955 को मुंबई में एक फिल्मी परिवार में हुआ. उनके पिता D.K. Sapru हिंदी सिनेमा के जाने-माने अभिनेता थे. हालांकि, तेज का सपना फिल्मों में आने का नहीं था, वो क्रिकेट और बैडमिंटन के शौकीन थे और एक प्रोफेशनल क्रिकेटर बनना चाहते थे. लेकिन किस्मत ने उनके लिए अलग राह चुन रखी थी. एक दिन उनके पिता ने बताया कि फिल्म 'सुरक्क्षा' के निर्देशक Ravikant Nagaich को एक नए हीरो की तलाश है. जब तेज उनसे मिलने पहुंचे, तो निर्देशक ने उन्हें देखते ही फिल्म का हीरो चुन लिया. यहीं से उनके फिल्मी करियर की शुरुआत हुई.
करियर की शुरुआत और संघर्ष
साल 1979 में ‘सुरक्षा’ से बतौर हीरो डेब्यू करने के बाद उनकी जिंदगी में बड़ा झटका आया. फिल्म रिलीज के कुछ समय बाद ही दिवाली के दिन उनके पिता का निधन हो गया. इस घटना ने पूरे परिवार की जिम्मेदारी तेज सप्रू के कंधों पर डाल दी. आर्थिक दबाव के चलते उन्होंने हर तरह के रोल स्वीकार किए. इसी दौरान उन्हें विलेन के किरदार ज्यादा मिलने लगे और उन्होंने अपनी दमदार आवाज और तीखे हाव-भाव से इन किरदारों को यादगार बना दिया.
निजी जीवन
वहीं बता दें कि तेज सप्रू का बॉलीवुड की मशहूर एक्ट्रेस रेखा से पारिवारिक रिश्ता भी है. उन्होंने रेखा की छोटी बहन धनलक्ष्मी से शादी की, इस नाते वो रेखा के जीजा हैं.
करियर का टर्निंग पॉइंट
तेज सप्रू के करियर में असली मोड़ 1989 में फिल्म 'त्रिदेव' से आया. इस फिल्म में उन्होंने अमरीश पुरी के बेटे ‘गोगा’ का किरदार निभाया, जिसने उन्हें जबरदस्त पहचान दिलाई. इसके बाद उन्होंने कई हिट फिल्मों में यादगार विलेन के रोल निभाए, जैसे- Mohra में ‘इरफान’, घायल,
विश्वात्मा.
उपलब्धियां और विरासत
तेज सप्रू ने 80 से ज्यादा फिल्मों में काम किया और बाद में टीवी इंडस्ट्री में भी अपनी अलग पहचान बनाई. उनकी कड़क आवाज, भूरी आंखें और स्क्रीन प्रेजेंस ने उन्हें बॉलीवुड के सबसे प्रभावशाली विलेन्स में शामिल कर दिया. क्रिकेटर बनने का सपना भले ही अधूरा रह गया, लेकिन उन्होंने फिल्म इंडस्ट्री में जो मुकाम हासिल किया, वह काबिल-ए-तारीफ है. तेज सप्रू की कहानी इस बात का बेहतरीन उदाहरण है कि हालात चाहे जैसे भी हों, मेहनत और समर्पण से हर किरदार को यादगार बनाया जा सकता है.
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