Middle East War: इजरायल ने ईरान के सबसे बड़े पेट्रोकेमिकल जोन पर किया हमला, 5 लोगों की मौत
Middle East War: मिडिल ईस्ट में चल रही जंग अब और ज्यादा खतरनाक मोड़ लेती जा रही है। हालात ऐसे बन गए हैं कि न तो अमेरिका-इजरायल और न ही ईरान किसी भी कीमत पर सीजफायर के लिए तैयार नजर आ रहे हैं। इसी बीच इजरायल ने ईरान के सबसे बड़े पेट्रोकेमिकल जोन पर बड़ा हमला कर दिया है।
पेट्रोकेमिकल जोन पर बड़ा हमला
रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस हमले में कम से कम पांच लोगों की मौत हो गई है, जबकि कई अन्य घायल बताए जा रहे हैं। हालांकि, पेट्रोकेमिकल जोन को कितना नुकसान पहुंचा है, इसको लेकर अभी तक ईरान की ओर से कोई आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है।
ईरान का पलटवार
इजरायल के हमले के तुरंत बाद ईरान ने भी जवाबी कार्रवाई की। ईरान ने कुवैत के एक पावर प्लांट पर ड्रोन हमला किया, जिससे वहां भारी नुकसान हुआ। बताया जा रहा है कि इस हमले के बाद पावर प्लांट की दो यूनिट्स को बंद करना पड़ा है।
बढ़ती जा रही टेंशन
हालात इतने तनावपूर्ण हो चुके हैं कि अब दोनों पक्ष खुलकर एक-दूसरे को चेतावनी दे रहे हैं। ईरान के एक शीर्ष कमांडर ने साफ कहा है कि अगर अमेरिका या इजरायल ने ईरान के बुनियादी ढांचे को निशाना बनाया, तो उसका जवाब बेहद विनाशकारी होगा।
ईरान की सख्त चेतावनी
ईरान के खातम अल-अनबिया केंद्रीय मुख्यालय के कमांडर अली अब्दुल्लाही ने कड़े शब्दों में कहा कि ईरानी सेना देश की सुरक्षा और राष्ट्रीय संपत्तियों की रक्षा के लिए पूरी तरह तैयार है और किसी भी हमले का मुंहतोड़ जवाब दिया जाएगा।
US-Iran War Update: ईरान ने ठुकराया ट्रम्प का 48 घंटे का अल्टीमेटम, कहा- 'तुम्हारे लिए नरक के दरवाजे खोल देंगे'
Middle East Conflict: ईरान के केंद्रीय सैन्य मुख्यालय 'खातम अल-अनबिया' के जनरल अली अब्दोल्लाही अलीअबादी ने डोनाल्ड ट्रम्प की 48 घंटे की समय-सीमा को सिरे से खारिज कर दिया है। ईरान ने चेतावनी देते हुए कहा कि अमेरिका अपनी बेबसी को धमकियों के पीछे छिपा रहा है।
ईरानी नेतृत्व का कहना है कि यदि उनके ऊर्जा ठिकानों पर हमला हुआ, तो वे पूरे क्षेत्र को अमेरिका के लिए 'नरक' बना देंगे। बता दें कि ट्रम्प ने होर्मुज स्ट्रेट को न खोलने पर ईरान के ऊर्जा ठिकानों को तबाह करने की चेतावनी दी थी।
इजरायल का 'एयर कैंपेन': ऊर्जा और स्टील सेक्टर निशाने पर
इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतनयाहू ने एक वीडियो जारी कर पुष्टि की है कि उनकी सेना अब ईरान के सामान्य बुनियादी ढांचे को निशाना बनाने के लिए तैयार है। इस अभियान के अगले चरण में ईरान के बिजली घरों, ऊर्जा संयंत्रों और वितरण नेटवर्क पर हमले होंगे।
ממשיכים לכתוש את משטר הטרור. שבוע טוב! pic.twitter.com/QTKUEcneol
— Benjamin Netanyahu - בנימין נתניהו (@netanyahu) April 4, 2026
इजरायल ने अपने हमलों का दायरा बढ़ाकर स्टील जैसे 'ड्यूअल-यूज' सेक्टर को भी शामिल किया है। जॉर्डन की राजधानी अम्मान से मिली रिपोर्ट्स के मुताबिक, इजरायल केवल अमेरिका की अंतिम मंजूरी का इंतजार कर रहा है ताकि वह ईरान के ऊर्जा क्षेत्र को पंगु बना सके।
परमाणु साइट्स पर हमला: बुशहर में 4 बार धमाके
ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अरागची ने दावा किया है कि अमेरिका और इजरायल ने 'बुशहर न्यूक्लियर साइट' पर चार बार हमला किया है। अरागची ने सोशल मीडिया पर पोस्ट कर कहा कि न्यूक्लियर साइट के पास ये हमले बेहद जोखिम भरे हैं और इनसे न केवल ईरान, बल्कि पूरे खाड़ी क्षेत्र के लिए गंभीर खतरा पैदा हो गया है।
उन्होंने इसकी तुलना यूक्रेन के जापोरीज्जिया न्यूक्लियर प्लांट के संकट से करते हुए अंतरराष्ट्रीय समुदाय से दखल देने की अपील की है।
लापता अमेरिकी पायलट और हेलीकॉप्टर पर फायरिंग
ईरान के कोहगिलुयेह और खुजेस्तान के पहाड़ी इलाकों में एक लापता अमेरिकी पायलट की तलाश कर रहे अमेरिकी हेलीकॉप्टरों पर स्थानीय आदिवासी कबीलों ने फायरिंग की है। ईरान की 'इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स' (IRGC) ने इन कबीलों की सराहना करते हुए उन्हें 'सीमा का रक्षक' बताया है।
इसके साथ ही, ईरान ने लापता अमेरिकी पायलट को पकड़ने वाले के लिए भारी इनाम की घोषणा की है और दावा किया है कि उनका नया एयर डिफेंस सिस्टम अमेरिकी विमानों को गिराने में पूरी तरह सक्षम है।
वैश्विक अर्थव्यवस्था पर असर: बिजली और ईंधन संकट
ईरान-अमेरिका युद्ध का असर अब पड़ोसी देशों की अर्थव्यवस्था पर भी दिखने लगा है। मिस्र में बढ़ते ईंधन संकट के कारण सरकार ने बिजली की कीमतों में 16 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी का ऐलान किया है, जो अप्रैल से लागू होगी।
वहीं, कुवैत में ईरानी ड्रोन हमले के बाद सरकारी दफ्तरों को नुकसान पहुँचा है, जिसके बाद कर्मचारियों को घर से काम करने के निर्देश दिए गए हैं।
दूसरी ओर, अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) के पूर्व प्रमुख मोहम्मद अलबेदेई ने ट्रम्प की नीतियों की कड़ी निंदा करते हुए खाड़ी देशों और संयुक्त राष्ट्र से तुरंत हस्तक्षेप करने की अपील की है ताकि पूरे क्षेत्र को 'आग का गोला' बनने से बचाया जा सके।
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