Iltija Mufti से श्रीनगर पुलिस ने 2 घंटे पूछताछ की, बोलीं- Article 370 पर बोलना मेरा अधिकार
श्रीनगर, सात अगस्त पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) की नेता इल्तिजा मुफ्ती ने शुक्रवार को कहा कि वह पुलिस जांच में सहयोग करेंगी, लेकिन अनुच्छेद 370 की बहाली के लिए शांतिपूर्ण तरीके से आवाज उठाना उनका अधिकार है। इल्तिजा से हाल ही में हुए एक विरोध प्रदर्शन के दौरान एक पुलिस अधिकारी पर कथित हमले के सिलसिले में शुक्रवार को पूछताछ की गई। पीडीपी अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती और उनकी बेटी इल्तिजा मुफ्ती के खिलाफ मंगलवार को पार्टी के प्रदर्शन के दौरान एक पुलिस अधिकारी से कथित तौर पर मारपीट को लेकर मामला दर्ज किया गया था।
यह प्रदर्शन पांच अगस्त 2019 को जम्मू कश्मीर का विशेष दर्जा समाप्त किए जाने के विरोध में किया गया था। पुलिस ने दोनों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धाराओं 132, 121 और 191(2) के तहत मामला दर्ज किया है। शुक्रवार को इल्तिजा को कोठीबाग थाने में बुलाया गया और उनसे लगभग दो घंटे तक पूछताछ की गई।
बाद में पत्रकारों से पीडीपी नेता ने कहा कि उन्होंने पुलिस से कहा कि वे जो कुछ भी जानना चाहते हैं, उसमें सहयोग करने में उन्हें खुशी होगी। उन्होंने कहा, अगर मेरे खिलाफ जांच होती है, तो मैं सहयोग करने को तैयार हूं। मैं पहली महिला या आखिरी कश्मीरी नहीं हूं, जिसे पुलिस ने पूछताछ के लिए बुलाया है।
इल्तिजा ने कहा कि उनकी लड़ाई किसी व्यक्तिगत मुद्दे के लिए नहीं, बल्कि हर कश्मीरी की ओर से है और यह गैरकानूनी नहीं है। उन्होंने कहा, अनुच्छेद 370 के बारे में बात करना मेरा कानूनी अधिकार है। एक भारतीय नागरिक के तौर पर मुझे अनुच्छेद 370 को बहाल करने के लिए शांतिपूर्ण ढंग से संघर्ष करने का हक है।
मैं भारत सरकार को बताना चाहती हूं कि मैं जो कर रही हूं, वह गैर-कानूनी नहीं है।
ABVP ने Ranchi में AISA अध्यक्ष पर स्याही फेंकने के आरोपों को बताया निराधार
नयी दिल्ली, सात अगस्त अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) ने शुक्रवार को आइसा के उन आरोपों को खारिज किया, जिनमें रांची में विरोध मार्च के दौरान संगठन की राष्ट्रीय अध्यक्ष नेहा बोरा पर स्याही फेंके जाने की घटना को आरएसएस और भाजपा से जोड़ा गया था। एबीवीपी ने इन आरोपों को ‘‘निराधार, भ्रामक और राजनीतिक मकसद से प्रेरित’’ बताया। इसने आरोप लगाया कि छात्रों से जुड़े वास्तविक मुद्दे उठाने के बजाय ‘ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन’ (आइसा) एक बार फिर मनगढ़ंत विवादों और मीडिया के सहारे चलाए जा रहे राजनीतिक विमर्श के जरिए जनता का ध्यान भटकाने की कोशिश कर रहा है।
झारखंड लोक सेवा आयोग (जेपीएससी) और झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (जेएसएससी) की परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर शुक्रवार को विधानसभा की ओर निकाले गए विरोध मार्च के दौरान एक व्यक्ति ने आइसा की राष्ट्रीय अध्यक्ष पर स्याही फेंक दी। हिरासत में लिए जाने के बाद हमलावर ने बोरा पर ‘‘राष्ट्र विरोधी’’ होने का आरोप लगाया। आइसा ने एक बयान में इस घटना की निंदा की और आरोप लगाया कि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) से जुड़े लोग बोरा के प्रदर्शन में शामिल होने को लेकर उनके खिलाफ ‘‘दुष्प्रचार और नफरत का अभियान’’ चला रहे हैं।
आरोपों पर प्रतिक्रिया देते हुए एबीवीपी ने कहा कि वामपंथी छात्र संगठन स्याही फेंकने की घटना का इस्तेमाल छात्रों के सामने मौजूद वास्तविक मुद्दों को दबाने के लिए कर रहा है। एबीवीपी ने आरोप लगाया कि न्याय की मांग करने के बजाय यह संगठन जानबूझकर राजनीतिक लाभ हासिल करने की कोशिश कर रहा है। इसने कहा कि छात्र आंदोलनों को शैक्षणिक हितों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध रहना चाहिए और राष्ट्र निर्माण में योगदान देना चाहिए, न कि उन्हें दलगत राजनीति का साधन बनना चाहिए।
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