मध्य पूर्व में जारी संघर्ष के बीच एक और बड़ा घटनाक्रम सामने आया है, जहां अमेरिका का एक लड़ाकू विमान ईरान के ऊपर मार गिराए जाने की खबर ने हालात को और तनावपूर्ण बना दिया है। मौजूद जानकारी के अनुसार, यह विमान एफ-15ई स्ट्राइक ईगल था, जिसमें दो सदस्यीय चालक दल सवार था और अब दोनों की तलाश के लिए अमेरिकी सेना ने बचाव अभियान तेज कर दिया है।
बता दें कि शुरुआती रिपोर्ट में ईरानी मीडिया ने दावा किया था कि उसने एफ‑35 लड़ाकू विमान को गिराया है, लेकिन बाद में विशेषज्ञों ने साफ किया कि मलबा दरअसल एफ-15ई का है। गौरतलब है कि यह इस युद्ध के शुरू होने के बाद पहली बार है जब अमेरिकी लड़ाकू विमान को इस तरह निशाना बनाया गया है।
मौजूद जानकारी के अनुसार, घटना के बाद अमेरिकी सेना ने तत्काल खोज और बचाव अभियान शुरू किया है। ईरान में सामने आए वीडियो में सी‑130 हरक्यूलिस और एचएच‑60 पावेहॉक जैसे विशेष विमान और हेलीकॉप्टर कम ऊंचाई पर उड़ान भरते दिखाई दिए, जिससे संकेत मिलता है कि चालक दल को सुरक्षित निकालने की कोशिश की जा रही है।
विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह के हेलीकॉप्टरों का इस्तेमाल आमतौर पर युद्ध क्षेत्र में फंसे सैनिकों को निकालने के लिए किया जाता है। मौजूद जानकारी के अनुसार, कुछ तस्वीरों में रेगिस्तानी इलाके में एक इजेक्शन सीट भी देखी गई है, जिससे यह आशंका जताई जा रही है कि चालक दल के सदस्य विमान से कूदकर बचने में सफल हो सकते हैं।
दूसरी ओर, ईरानी मीडिया के कुछ दावों में यह भी कहा गया है कि पायलट को हिरासत में लिया गया है, हालांकि इस पर अभी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। गौरतलब है कि अमेरिकी सेना ने इस पूरे मामले पर अभी तक औपचारिक बयान जारी नहीं किया है, जिससे स्थिति को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है।
बताते चलें कि यह घटना ऐसे समय पर हुई है जब अमेरिका और ईरान के बीच टकराव लगातार बढ़ता जा रहा है और क्षेत्र में सैन्य गतिविधियां तेज हैं। इससे पहले भी कुछ सैन्य घटनाएं सामने आई थीं, लेकिन इस तरह किसी लड़ाकू विमान के गिराए जाने की पुष्टि पहली बार हुई है।
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अमेरिका की राजनीति और आर्थिक दिशा को लेकर एक बड़ा संकेत सामने आया है, जहां डोनाल्ड ट्रंप ने रक्षा क्षेत्र के लिए बेहद बड़े बजट का प्रस्ताव रखा है। बता दें कि ट्रंप ने संसद से करीब 1.5 ट्रिलियन डॉलर के रक्षा बजट को मंजूरी देने की अपील की है, जो अब तक के सबसे बड़े सैन्य खर्चों में से एक माना जा रहा है।
मौजूद जानकारी के अनुसार, यह प्रस्ताव अगले वित्त वर्ष के लिए तैयार किया गया है, जिसकी शुरुआत अक्टूबर से होगी। गौरतलब है कि इस बजट में रक्षा खर्च में 40 प्रतिशत से अधिक की बढ़ोतरी का प्रस्ताव है, जबकि दूसरी ओर घरेलू योजनाओं में भारी कटौती की बात कही गई है।
बताया जा रहा है कि प्रशासन का लक्ष्य लगभग 350 अरब डॉलर अतिरिक्त खर्च को विशेष प्रक्रिया के जरिए पारित कराना है, जिससे विपक्ष की सहमति के बिना भी इसे लागू किया जा सके। हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि यह रणनीति राजनीतिक रूप से जोखिम भरी हो सकती है, क्योंकि सत्तारूढ़ दल के भीतर ही वित्तीय अनुशासन को लेकर मतभेद सामने आ सकते हैं।
गौरतलब है कि यह प्रस्ताव ऐसे समय में आया है जब अमेरिका मध्य पूर्व में जारी तनाव और संघर्ष के बीच अपनी सैन्य क्षमता को मजबूत करने की कोशिश कर रहा है। ट्रंप प्रशासन का दावा है कि यह बजट वैश्विक खतरों को ध्यान में रखते हुए तैयार किया गया है और इससे सेना की तैयारी और ताकत दोनों में सुधार होगा।
मौजूद जानकारी के अनुसार, इस बजट के तहत नौसेना के लिए बड़े स्तर पर निवेश का प्रस्ताव है, जिसमें 34 नए युद्धपोत और सहायक जहाज शामिल हैं। साथ ही, जवानों के वेतन में भी बढ़ोतरी का प्रावधान किया गया है, जो कुछ श्रेणियों में 7 प्रतिशत तक जा सकता है।
दूसरी तरफ, गैर-रक्षा क्षेत्रों में लगभग 10 प्रतिशत कटौती का प्रस्ताव है, जिसमें पर्यावरण, नवीकरणीय ऊर्जा और बुनियादी ढांचा योजनाएं प्रमुख रूप से प्रभावित हो सकती हैं। बता दें कि कई योजनाओं के लिए दी जाने वाली अनुदान राशि में भारी कमी करने की बात कही गई है, जिससे सामाजिक और विकास से जुड़े कार्यक्रमों पर असर पड़ सकता है।
इसके अलावा, सरकार ने कर प्रणाली और सामाजिक सुरक्षा योजनाओं में कथित अनियमितताओं को रोकने के लिए एक राष्ट्रीय धोखाधड़ी प्रकोष्ठ बनाने का भी प्रस्ताव रखा है। मौजूद जानकारी के अनुसार, यह कदम वित्तीय पारदर्शिता बढ़ाने के उद्देश्य से उठाया जा रहा है।
हालांकि, इस पूरे बजट प्रस्ताव को लेकर राजनीतिक माहौल काफी गर्म है। विशेषज्ञों का मानना है कि रक्षा खर्च बढ़ाने और घरेलू योजनाओं में कटौती करने का फैसला आगामी चुनावों में सत्तारूढ़ दल के लिए चुनौती बन सकता है।
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