Delhi Rain से जलमग्न हुई राजधानी, IMD ने जारी किया Red Alert; थमा यातायात
नयी दिल्ली, सात अगस्त राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में शुक्रवार को हुई भारी बारिश से जनजीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त हो गया। भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) द्वारा रेड अलर्ट जारी किए जाने के बीच प्रमुख सड़कें चार फुट तक पानी में डूब गईं, गाड़ियां फंस गईं, यातायात थम गया और कई आवासीय कॉलोनियों में पानी भर गया। दक्षिणी दिल्ली के महरौली-बदरपुर रोड से लेकर महिपालपुर, मिंटो रोड, आईटीओ, शकरपुर और छतरपुर तक की सड़कें बारिश के पानी में पूरी तरह डूब गईं।
इस दौरान यात्री घंटों जाम में फंसे रहे, वाहन चालक जलभराव वाले रास्तों पर गाड़ियां छोड़ने को मजबूर हुए और दफ्तर जाने वालों को कैब बुक करने में खासी मशक्कत करनी पड़ी। जलभराव की सबसे विकराल स्थिति दक्षिणी दिल्ली के वायुसेनाबाद (वायु सेना स्टेशन) के पास महरौली-बदरपुर (एमबी) रोड पर देखने को मिली, जहां तीन से चार फुट गहरा पानी भर गया। इसके चलते दक्षिणी दिल्ली के इस सबसे व्यस्त मार्गों में से एक ने एक नदी का रूप ले लिया, जिसे स्थानीय निवासियों ने नदी बहने जैसा करार दिया।
खानपुर से ओखला मोड़ के बीच कई किलोमीटर तक गाड़ियां रेंगती नज़र आईं, वहीं संगम विहार, देवली और आंबेडकर नगर से लगे रास्ते भी पूरी तरह जलमग्न रहे। फतेहपुर बेरी की वाल्मीकि बस्ती में लोग कमर तक भरे पानी से गुजरने को मजबूर दिखे। जलभराव के कारण रास्ता पार करने में असमर्थ स्कूली बच्चों को स्थानीय लोगों ने नीले रंग के बड़े तिरपाल से बनी अस्थायी नाव पर बैठाकर पार कराया।
कई घरों में पानी घुस जाने से परिवारों ने अनाज एवं अन्य राशन और घरेलू सामान के खराब होने की बात कही। मूसलाधार बारिश के बाद पूरी राजधानी में नागरिक सुविधाओं से जुड़ी शिकायतों का अंबार लग गया। प्रशासन को जलभराव, पेड़ उखड़ने और बिजली आपूर्ति बाधित होने जैसी कम से कम 67 शिकायतें मिलीं।
लगातार हो रही बारिश के कारण लाल किला परिसर के आसपास के इलाकों, छतरपुर फार्म, टर्मिनल-1 के पास मेहराम नगर और सैनिक फार्म्स सहित कई बस्तियों में भारी जलभराव हो गया। महिपालपुर टी-प्वॉइंट पर पानी भर जाने से हवाई अड्डे, गुरुग्राम, छतरपुर और वसंत विहार की ओर जाने वाला यातायात बुरी तरह प्रभावित हुआ, वहीं पूसा रोड गोलचक्कर के पास भी यात्रियों को लंबे जाम का सामना करना पड़ा। छतरपुर से सामने आए दृश्यों में स्कूली छात्र घुटनों तक भरे पानी से होकर गुजरते दिखे, जबकि एमबी रोड के जलमग्न हिस्सों पर गाड़ियां रेंगती नज़र आईं।
इसके अलावा, दक्षिणी दिल्ली स्थित दिल्ली पुलिस के स्वापक कार्यालय में भी भारी जलभराव की खबर है। पूर्वी दिल्ली के जीटी रोड, जीटीबी एन्क्लेव और दिलशाद गार्डन इलाकों में भी वाहनों की रफ्तार प्रभावित हुई। शकरपुर और आसपास के मंडावली इलाके में ई-रिक्शा चालकों ने कहा कि नालियों का पानी सड़कों पर आ जाने, गड्ढों में पानी भरने और सड़कों पर जलभराव के कारण दुर्घटनाएं हुईं तथा उनकी आजीविका प्रभावित हुई।
इस संबंध में एक ई-रिक्शा चालक ने कहा, ‘‘कई तरह की परेशानियां हैं। गड्ढे पानी से भर जाते हैं और सीवर के गड्ढों का पता नहीं चलता। आज कम से कम तीन-चार वाहन पलट गए, जिनमें ई-रिक्शा, स्कूटर और मोटरसाइकिल शामिल हैं।’’ उन्होंने कहा कि इलाके की नालियां ठीक तरीके से नहीं बनाई गई हैं और उनमें मलबा जमा होने के कारण बारिश के बाद पानी जल्दी नहीं निकल पाता।
ई-रिक्शा चालक ने कहा, ‘‘हमारी कमाई काफी घट गई है। पहले अगर हम एक दिन में 600 रुपये कमा लेते थे तो अब 200 या 300 रुपये ही कमा पा रहे हैं। बैटरी में पानी चला जाता है।
अगर ई-रिक्शा पलट जाए, तो 60 हजार से 80 हजार रुपये तक का नुकसान हो सकता है।’’ फतेहपुर बेरी के निवासियों का कहना है कि जलभराव की यह समस्या पिछले कई दशकों से लगातार बनी हुई है। एमसीडी के केंद्रीय नियंत्रण कक्ष के अनुसार, केशवपुरम, दक्षिण, मध्य, पश्चिम और सिविल लाइंस क्षेत्रों से पेड़ गिरने की घटनाएं सामने आईं। वहीं, नयी दिल्ली नगरपालिका परिषद (एनडीएमसी) को बारिश से जुड़ी 34 शिकायतें मिलीं, जिनमें जलभराव के 15, पेड़ गिरने के पांच और बिजली गुल होने के 14 मामले शामिल हैं।
दूसरी ओर, लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) को जलभराव की 22 शिकायतें दर्ज कराई गईं। एनडीएमसी क्षेत्र में लोधी रोड, सुनहरी बाग रोड, आरके आश्रम मार्ग, मिंटो रोड ब्रिज, राजीव चौक मेट्रो स्टेशन, सफदरजंग फ्लाईओवर, लेडी हार्डिंग मेडिकल कॉलेज, मोती बाग, तालकटोरा गार्डन, रेस कोर्स रोड और सरोजिनी नगर से जलभराव की शिकायतें मिलीं। वहीं, लेडी हार्डिंग मेडिकल कॉलेज, चाणक्यपुरी के यशवंत प्लेस, आरएमएल अस्पताल और जामनगर हाउस से पेड़ गिरने की सूचनाएं प्राप्त हुईं।
मूसलाधार बारिश के बाद अब इस पर राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हो गई है। दिल्ली कांग्रेस ने शहर भर में हुए भीषण जलभराव के लिए भारतीय जनता पार्टी नीत केंद्र सरकार, दिल्ली सरकार और दिल्ली नगर निगम (एमसीडी) को जिम्मेदार ठहराया है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व विधायक मुकेश शर्मा ने आरोप लगाया कि नालों की सफाई सिर्फ कागजों तक ही सीमित रही।
उन्होंने कहा कि बार-बार दिए गए आश्वासनों के बावजूद यह ट्रिपल-इंजन सरकार जलभराव रोकने में पूरी तरह नाकाम साबित हुई है। शर्मा ने कहा, ‘‘दिल्ली की शायद ही कोई ऐसी सड़क हो -चाहे वह सघन आबादी वाली कॉलोनियां हों, आवासीय इलाके हों, गांव हों या शहरी क्षेत्र- जो जलभराव से अछूती हो। दिल्ली को जलभराव से मुक्त रखने के सरकार के दावे पूरी तरह खोखले साबित हुए हैं।’’ उधर, आम आदमी पार्टी (आप) ने एक्स पर एक पोस्ट में कहा कि भाजपा मिंटो ब्रिज पर जलभराव की समस्या खत्म करने का श्रेय लेने से तो पीछे नहीं हटती, लेकिन शहर के बाकी हिस्सों में बने बाढ़ जैसे हालात को नजरअंदाज कर देती है।
विपक्ष के इन आरोपों पर फिलहाल रेखा गुप्ता के नेतृत्व वाली दिल्ली सरकार की ओर से कोई तत्काल प्रतिक्रिया नहीं आई थी। आईएमडी ने कहा कि अगले कुछ घंटों के दौरान दिल्ली के कई इलाकों में मध्यम बारिश और कुछ स्थानों पर गरज-चमक व बिजली गिरने के साथ भारी बारिश होने की संभावना है। मौसम विभाग के आंकड़ों के अनुसार, सुबह 8:30 बजे से शाम 5:30 बजे के बीच सबसे अधिक 111.5 मिमी बारिश पुष्प विहार में दर्ज की गई।
इसके बाद छतरपुर में 104.5 मिमी, आयानगर में 87.4 मिमी, पालम में 73.5 मिमी, जनकपुरी में 68 मिमी, झरोदा कलां में 67 मिमी, पूसा में 59.5 मिमी, सफदरजंग में 57.3 मिमी, नारायणा में 53 मिमी, रिज में 49.6 मिमी, लोधी रोड में 49.3 मिमी, मयूर विहार में 36 मिमी, नजफगढ़ में 24 मिमी और जाफरपुर में 13.5 मिमी बारिश दर्ज की गई। आईएमडी के आंकड़ों के मुताबिक, दिल्ली में अगस्त के पहले सप्ताह में 127 मिमी बारिश दर्ज की गई है, जिससे यह वर्ष 2011 के बाद से इस महीने का सबसे अधिक बारिश वाला पहला सप्ताह बन गया है।
Defense Budget में पूंजीगत आवंटन बढ़ाएं, Parliamentary Panel की सिफारिश
नयी दिल्ली, सात अगस्त संसद की एक समिति ने सिफारिश की है कि मौजूदा भू-राजनीतिक स्थिति और “हर समय विश्वसनीय युद्धक क्षमताओं को बनाए रखने” की आवश्यकता को देखते हुए रक्षा क्षेत्र के लिए पूंजीगत मद में बजट आवंटन बढ़ाया जाना चाहिए। रक्षा संबंधी संसदीय स्थायी समिति की यह रिपोर्ट शुक्रवार को संसद में प्रस्तुत की गई। समिति ने अपनी इस रिपोर्ट में यह भी कहा है कि वह “मंत्रालय (रक्षा मंत्रालय) की इस बात से सर्वसम्मति से सहमत है कि रक्षा बलों के कर्मियों को दी जाने वाली दिव्यांगता पेंशन पर आयकर से छूट का मामला वित्त मंत्रालय के दायरे में आता है।” हालांकि, समिति ने सशस्त्र बलों के कर्मियों को दी जाने वाली दिव्यांगता पेंशन पर आयकर छूट से जुड़े संशोधनों पर “चिंता” व्यक्त की है।
रिपोर्ट में कहा गया, “समिति अपनी पिछली सिफारिश को दोहराना चाहेगी कि हितधारक होने के नाते रक्षा मंत्रालय उचित स्तर पर वित्त मंत्रालय के साथ इस मामले को उठाए, ताकि पूर्व सैनिकों, विशेष रूप से दिव्यांग कर्मियों की वित्तीय चिंताओं का उचित तरीके से समाधान किया जा सके।” समिति ने कहा कि रक्षा बलों का आधुनिकीकरण रक्षा बजट के पूंजीगत खंड के माध्यम से वित्तपोषित होता है। आधुनिकीकरण में रक्षा क्षमताओं को बढ़ाने के लिए अत्याधुनिक प्रौद्योगिकियों और हथियार प्रणालियों की खरीद शामिल है। रिपोर्ट में कहा गया, “वर्तमान भू-राजनीतिक स्थितियों और हर समय विश्वसनीय युद्धक क्षमता बनाए रखने की आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए, समिति पूंजीगत मद के तहत और अधिक बजट आवंटन की सिफारिश करती है।” संसदीय समिति ने यह कहते हुए प्रसन्नता व्यक्त की कि पिछले वर्ष की तुलना में बजट अनुमान 2026-27 में पूंजीगत बजट के तहत आवंटन में काफी वृद्धि की गई है और यदि आवश्यकता हुई, तो पूरक/संशोधित अनुमान चरण में अतिरिक्त धन की मांग की जाएगी।
समिति ने एक अन्य रिपोर्ट में कहा कि रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (डीआरडीओ) महिला कर्मचारियों को समान अवसर प्रदान करता है और इसके पास एक सुस्थापित शिकायत निवारण तंत्र मौजूद है। हालांकि, उसने सिफारिश की कि “शिकायत तंत्र को मजबूत करने के लिए हरसंभव प्रयास किए जाने चाहिए” तथा कार्यस्थल पर महिलाओं का लैंगिक उत्पीड़न निवारण अधिनियम के तहत शिकायतों से निपटने के संबंध में मानक संचालन प्रक्रिया का कड़ाई से पालन सुनिश्चित किया जाना चाहिए। समिति ने कहा कि वह इस अधिनियम के तहत शिकायतों के समय पर निवारण के लिए आंतरिक शिकायत समिति, प्रत्येक लैब में नोडल अधिकारियों की नियुक्ति की भूमिका की सराहना करती है।
रिपोर्ट में समिति ने इच्छा जताई कि परियोजनाओं के समय पर पूरा होने, धन के उचित उपयोग और लागत वृद्धि पर काबू के लिए डीआरडीओ द्वारा उठाए गए कदमों से अवगत कराया जाए। रिपोर्ट में कहा गया कि समिति इस सिफारिश को दोहराती है कि डीआरडीओ को लागत दक्षता, तकनीकी परिपक्वता, लक्ष्य तिथियों, पूर्णता समय और परिचालन प्रभावशीलता को कवर करने वाले प्रमुख निष्पादन संकेतक (केपीआई) को शीघ्रता से अंतिम रूप देकर अधिसूचित करना चाहिए। समिति ने यह भी कहा कि उसने मंत्रालय के जवाब से यह नोट किया है कि पूर्व सैनिकों और उनके आश्रितों के लाभ के लिए पूर्व सैनिक कल्याण विभाग द्वारा विभिन्न कल्याणकारी उपाय और पहल शुरू की गई हैं, जिसमें वित्तीय सहायता में वृद्धि, कानूनी सहायता को मजबूत करना, एकीकृत सैनिक परिसरों की स्थापना और हितधारकों के साथ नियमित परामर्श शामिल हैं।
रिपोर्ट के अनुसार, ये पहल वास्तव में सराहनीय हैं और पूर्व सैनिक समुदाय के लिए कल्याणकारी पारिस्थितिकी तंत्र में सुधार की दिशा में मंत्रालय की प्रतिबद्धता तथा निरंतर प्रयासों को दर्शाती हैं। इसमें कहा गया, “समिति इस संबंध में अपनी पिछली सिफारिश को दोहराती है और चाहती है कि मंत्रालय देश भर के पेशेवर कॉलेजों में रक्षा कर्मियों के बच्चों के लिए आरक्षण बढ़ाने तथा अवसरों के विस्तार की संभावना की जांच करने के लिए शिक्षा मंत्रालय, राज्य सरकारों, पेशेवर नियामक निकायों और अन्य संबंधित हितधारकों के परामर्श से प्रस्तावित व्यापक अध्ययन शुरू कर सकता है।
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