अमेरिका और ईरान के बीच जारी युद्ध अब एक बेहद खतरनाक मोड़ पर पहुँच गया है। ईरान के रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण B1 पुल के ढहने के कुछ ही घंटों बाद, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने तेहरान की नई सरकार को सीधी और खौफनाक चेतावनी दी है। ट्रंप ने स्पष्ट किया है कि अमेरिकी सैन्य कार्रवाई अभी अपने चरम पर नहीं पहुँची है और ईरान का बचा-कुचा इंफ्रास्ट्रक्चर उनके अगले निशाने पर है।उन्होंने कहा कि अमेरिकी सेना ने अभी तक "ईरान में जो कुछ बचा है, उसे तबाह करना" शुरू भी नहीं किया है। उन्होंने कहा कि देश के और भी पुल और ऊर्जा से जुड़े इंफ्रास्ट्रक्चर उनके निशाने पर हैं।
अगले निशाने पर पुल, फिर बिजली घर: ट्रंप
Truth Social पर एक पोस्ट में US राष्ट्रपति ने कहा, "हमारी सेना, जो दुनिया में कहीं भी सबसे महान और सबसे शक्तिशाली (अब तक की सबसे ज़्यादा!) है, उसने अभी तक ईरान में जो कुछ बचा है, उसे तबाह करना शुरू भी नहीं किया है। अगले निशाने पर पुल हैं, फिर बिजली घर!"
ट्रंप ने बार-बार कहा है कि पिछले एक महीने के युद्ध के दौरान ईरान के ज़्यादातर बड़े सैन्य ठिकाने पहले ही तबाह हो चुके हैं या उन्हें नुकसान पहुँचाया जा चुका है। ट्रंप ने कहा, "ईरान की नई सरकार के नेताओं को पता है कि क्या करना है, और यह काम जल्दी से जल्दी करना है!" ऐसा लग रहा था कि वह तेहरान से वॉशिंगटन के साथ कोई समझौता करने की अपनी अपील का ज़िक्र कर रहे थे, जिससे युद्धविराम हो सके।
US-इज़रायल के हमलों में ईरान का B1 पुल टूटा, 8 की मौत, 95 घायल
यह घटना ट्रंप की उस कड़ी चेतावनी के कुछ ही घंटों बाद हुई, जिसमें उन्होंने ईरान से कहा था कि "इससे पहले कि बहुत देर हो जाए, कोई समझौता कर लो।" इसके साथ ही उन्होंने तेहरान के पास B1 पुल के टूटने का एक वीडियो भी शेयर किया था। यह पुल, जिसे पश्चिमी एशिया के सबसे ऊँचे और सबसे अहम इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स में से एक माना जाता है, हमलों की चपेट में आने के बाद टूटता हुआ दिखाई दिया। यह मौजूदा संघर्ष में एक बड़ी तेज़ी का संकेत है।
ईरान के सरकारी मीडिया 'Press TV' की रिपोर्ट के मुताबिक, US-इज़रायल के हमलों में कम से कम आठ आम नागरिकों की मौत हो गई और 95 अन्य घायल हो गए। इस सैन्य कार्रवाई में खास तौर पर "करज में स्थित B1 पुल" को निशाना बनाया गया था, जिसके चलते आस-पास के इलाके में भारी जान-माल का नुकसान हुआ।
रिपोर्ट के अनुसार, इस हमले में मारे गए लोगों में "ईरानी यात्री" और "स्थानीय गाँव के निवासी" शामिल हैं, जो हमले के समय उस इंफ्रास्ट्रक्चर के पास ही मौजूद थे। 'Press TV' के मुताबिक, मरने वालों में "ऐसे परिवार भी शामिल हैं जो 'नेचर डे' (प्रकृति दिवस) मनाने के लिए उस इलाके में आए हुए थे," क्योंकि इस मौके पर बड़ी संख्या में लोग घरों से बाहर निकले हुए थे। अमेरिकी राष्ट्रपति ने 'ट्रुथ सोशल' पर एक वीडियो भी शेयर किया, जिसमें एक धमाका दिखाया गया था। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि "ईरान का सबसे बड़ा पुल ढह जाएगा और फिर कभी इस्तेमाल नहीं हो पाएगा।" उन्होंने आगे कहा कि तेहरान को "इससे पहले कि बहुत देर हो जाए और उस देश का कुछ भी न बचे, जो अभी भी एक महान देश बन सकता है, एक समझौता कर लेना चाहिए।"
Continue reading on the app
नई दिल्ली, 3 अप्रैल (आईएएनएस)। केंद्र सरकार ने फ्लाइट में कम से कम 60 प्रतिशत सीटें बिना अतिरिक्त शुल्क के देने के अपने पहले के आदेश को फिलहाल स्थगित कर दिया है, जो 20 अप्रैल से लागू होने वाला था।
नागर विमानन मंत्रालय ने नागर विमानन महानिदेशालय (डीजीसीए) को भेजे गए एक पत्र में कहा कि इस फैसले की समीक्षा की गई है। यह समीक्षा फेडरेशन ऑफ इंडियन एयरलाइंस और अकासा एयर द्वारा उठाई गई चिंताओं के बाद की गई, जिसमें इस नियम के ऑपरेशनल और कमर्शियल असर को लेकर सवाल उठाए गए थे।
एयरलाइंस ने कहा था कि यह नियम किराया ढांचे को प्रभावित कर सकता है और मौजूदा डिरेगुलेटेड टैरिफ सिस्टम के अनुरूप नहीं है।
सरकार ने कहा कि इन सभी पहलुओं को देखते हुए और मामले की विस्तृत समीक्षा होने तक 60 प्रतिशत सीटें मुफ्त देने का प्रावधान फिलहाल अगले आदेश तक लागू नहीं किया जाएगा।
वर्तमान में, फ्लाइट की 20 प्रतिशत सीटें बिना किसी अतिरिक्त शुल्क के बुक की जा सकती हैं, जबकि बाकी सीटों के लिए यात्रियों को शुल्क देना पड़ता है।
एयरलाइंस आमतौर पर सीट चयन के लिए 200 रुपए से लेकर 2,100 रुपए तक चार्ज करती हैं, जो सीट की लोकेशन और अतिरिक्त लेगरूम जैसी सुविधाओं पर निर्भर करता है।
18 मार्च को नागर विमानन मंत्रालय द्वारा जारी मूल निर्देश का उद्देश्य यात्रियों की बढ़ती शिकायतों को दूर करना था, खासकर सीट चयन जैसे सेवाओं पर ज्यादा शुल्क को लेकर।
मंत्रालय ने डीजीसीए के जरिए नए दिशा-निर्देश जारी किए थे, जिसमें एक ही पीएनआर पर यात्रा करने वाले यात्रियों को एक साथ बैठाने (अधिमानतः अगल-बगल की सीटों पर बैठाना) जैसे यात्री हित से जुड़े प्रावधान शामिल थे।
यह फैसला ऐसे समय में आया है जब भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा घरेलू विमानन बाजार बन चुका है और भारतीय हवाई अड्डों पर रोजाना 5 लाख से ज्यादा यात्री यात्रा करते हैं।
मंत्रालय ने कहा कि वह यात्रियों की सुविधा, पारदर्शिता और विमानन क्षेत्र में सुरक्षा मानकों को बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध है।
--आईएएनएस
डीबीपी
डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.
Continue reading on the app