चीन की वास्तविक आर्थिक वृद्धि आधिकारिक आंकड़ों से आधी, खराब कर्ज और वृद्ध होती आबादी से बढ़ा जोखिम: रिपोर्ट
नई दिल्ली, 2 अप्रैल (आईएएनएस)। चीन की आधिकारिक हेडलाइन आर्थिक वृद्धि के आंकड़े नकली हैं, और देश की अर्थव्यवस्था को उसके बढ़ते खराब कर्ज और तेजी से बढ़ती उम्र वाली जनसंख्या से गंभीर खतरा है, ऐसा एक नई रिपोर्ट में कहा गया है।
जापानी समाचार साइट निप्पॉनडॉटकॉम ने इस रिपोर्ट में अमेरिकी थिंक टैंक रोडियम ग्रुप के अनुमान का हवाला देते हुए कहा कि 2025 में चीन की वास्तविक आर्थिक वृद्धि पांच प्रतिशत के सरकारी जीडीपी आंकड़ों के बजाय करीब 2.5-3.0 प्रतिशत के करीब है।
रिपोर्ट ने कुछ चीन विशेषज्ञों का भी हवाला दिया, जो मानते हैं कि देश फिलहाल मूल रूप से शून्य वृद्धि का सामना कर रहा है।
रिपोर्ट में कहा गया, चीन के आर्थिक भविष्य के रास्ते में दो बड़े अवरोध हैं: विशाल खराब कर्ज और कम जन्मदर और बढ़ती उम्र वाली आबादी के कारण बना उल्टा जनसंख्या पिरामिड।
रिपोर्ट ने मुद्रास्फीति के संकेतों को भी उजागर किया, जो खत्म होने के कोई संकेत नहीं दिखा रही है, और पिछले तीन वर्षों से वास्तविक वृद्धि नाममात्र वृद्धि को पीछे छोड़ रही है।
इसके अलावा 2025 में कुल सरकारी राजस्व में 1.7 प्रतिशत की गिरावट का उल्लेख किया गया, जो कोविड-19 के झटके के बाद 2020 में पहली बार घटा।
रिपोर्ट में सोशल मीडिया और जमीनी स्तर पर इकोनॉमिक स्ट्रेन के दिखने वाले संकेतों का जिक्र किया, जिसमें शॉपिंग स्ट्रीट पर बंद दुकानें, खाली शॉपिंग मॉल और बेघर लोग खाने के लिए भटकते और अंडरपास में सोते हुए लोग शामिल हैं।
रिपोर्ट ने यह भी तर्क दिया गया कि चीन में ऐसे इकोनॉमिस्ट हैं जो युवाओं में बेरोजगारी दर का अनुमान 40 परसेंट से ज्यादा लगाते हैं। चीन की आबादी 2021 में अपने पीक से कम हो गई, 2025 में 7.92 मिलियन बच्चे पैदा होंगे, जबकि 2018 तक यह 15 मिलियन थी।
मीडिया हाउस ने चीन की खराब आर्थिक हालत का दोष राष्ट्रपति शी जिनपिंग के आर्थिक मिसमैनेजमेंट पर लगाया, जिसमें उन्होंने मजबूत, बेहतर और बड़े सरकारी एंटरप्राइज को सपोर्ट किया और इनोवेटर्स को दबाया।
--आईएएनएस
एवाई/डीकेपी
डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.
नेपाल संसद की पहली बैठक में पूर्व प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली की गिरफ्तारी पर हुई बहस
काठमांडू, 2 मार्च (आईएएनएस)। नेपाल में पांच मार्च को हुए संसदीय चुनाव के बाद गुरुवार को संघीय संसद की पहली बैठक हुई। इस बैठक में पिछले साल सितंबर में जेन-जी विरोध प्रदर्शन को दबाने के मामले में पूर्व प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली और पूर्व गृह मंत्री रमेश लेखक की गिरफ्तारी का मुद्दे पर जमकर बहस हुई।
ओली, कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ नेपाल (यूनिफाइड मार्क्सिस्ट-लेनिनिस्ट, सीपीएन-यूएमएल) के चेयरपर्सन हैं, और लेखक रमेश, नेपाली कांग्रेस के नेता को 28 मार्च को पिछले साल सितंबर की शुरुआत में प्रोटेस्ट को दबाने से जुड़े एक गैर-इरादतन हत्या के मामले में गिरफ्तार किया गया था। इस प्रदर्शन में कई लोग मारे गए थे। इस बगावत के दौरान 77 लोगों की जान चली गई थी, जबकि एनपीआर 84 बिलियन से ज्यादा की सरकारी और प्राइवेट प्रॉपर्टी को नुकसान हुआ था।
सीपीएन-यूएमएल और नेपाली कांग्रेस के नेताओं ने गिरफ्तारी पर सरकार की आलोचना की। वहीं, सत्तारूढ़ राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी (आरएसपी) के अध्यक्ष रबी लामिछाने ने इस कदम का समर्थन किया और कहा कि यह शहीदों के परिवारों के लिए न्याय सुनिश्चित करता है। उन्होंने कहा कि शहीदों की माताओं को न्याय का पहला अधिकार है, और इसे प्रतिशोध नहीं माना जाना चाहिए।
आरीएसपी ने मार्च पांच के चुनावों में प्रतिनिधि सभा में 275 में से 182 सीटें जीतकर सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरी, जबकि पारंपरिक राजनीतिक पार्टियों को भारी हार का सामना करना पड़ा।
लामिछाने ने कहा कि सत्ताधारी पार्टी संसद में अपनी संख्या के बावजूद विपक्षी पार्टियों के खिलाफ बदला लेने का अभियान नहीं चलाएगी। उन्होंने कहा कि अब किसी के साथ विचारधारा के आधार पर अलग व्यवहार नहीं किया जाएगा।
उन्होंने कहा कि सत्ता में बैठे लोगों को बचाने और विपक्ष को फंसाने के लिए पहले भी कानूनों में बदलाव किए गए थे। ऐसी गलत आदतों को जल्द से जल्द ठीक किया जाएगा। विपक्ष के खिलाफ घमंड और बदले की कोई जगह नहीं होगी।
मीटिंग के दौरान, सीपीएन-यूएमएल नेताओं ने ओली और लेखक की गिरफ्तारी की आलोचना की और कहा कि यह एक बड़ी साजिश का हिस्सा है। यूएमएल के पार्लियामेंट्री पार्टी के नेता राम बहादुर थापा बादल ने सवाल किया कि उन्हें गैर-कानूनी तरीके से क्यों गिरफ्तार किया गया और इसे एक बड़ी साज़िश का हिस्सा बताया।
उन्होंने आरएसपी की भारी जीत के लिए सरकारी मशीनरी के साथ-साथ बारबरा फाउंडेशन की गतिविधियों और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, एल्गोरिदम और गोएबल्स-स्टाइल प्रोपेगैंडा के जरिए गलत जानकारी और गलत जानकारी के इस्तेमाल को भी जिम्मेदार ठहराया।
नेपाली कांग्रेस के सांसद भीष्म राज अमदेन्गे ने हाई-लेवल कमीशन की निष्पक्षता पर सवाल उठाया, और 9 सितंबर की घटनाओं पर चुप्पी के लिए लीक हुई रिपोर्ट की आलोचना की, जब पब्लिक और प्राइवेट प्रॉपर्टी को भारी नुकसान पहुंचाया गया था। पिछले साल 8 और 9 सितंबर को दो दिन के विरोध प्रदर्शन के दौरान, पुलिस की गोलीबारी में कई लोग मारे गए थे, जबकि अगले दिन प्रदर्शनकारियों ने पब्लिक और प्राइवेट प्रॉपर्टी को भारी नुकसान पहुंचाया था।
उन्होंने पूछा कि संसद की बिल्डिंग राख में क्यों बदल गई? नेपाल सरकार का मुख्य एडमिनिस्ट्रेटिव सेंटर, सिंघा दरबार क्यों जला दिया गया? उन्हें किसने आग लगाई? उन्होंने कहा कि 8 और 9 सितंबर की घटनाओं की एक-एक करके डिटेल में जांच होनी चाहिए।
संसद की बैठक में आरएसपी प्रेसिडेंट लामिछाने ने दलित कम्युनिटी से सदियों से उनके साथ हुए भेदभाव के लिए माफी भी मांगी।
--आईएएनएस
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