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गौरवपूर्ण लोकतांत्रिक मूल्यों का साझा करने का अवसर

राजस्थान विधानसभा के 75 साल पर अमृत महोत्सव का आयोजन इस मायने में महत्वपूर्ण हो जाता है कि दुनिया में हमारे देष की लोकतंत्र की जड़े सबसे गहरी होने के साथ ही आज भी लोकतांत्रिक मूल्यों की दृष्टि से भारत दुनिया के देषों के सामने एक मिसाल है। राजस्थान विधानसभा के अध्यक्ष वासुदेव देवनानी की पहल से जिस तरह से 15 जुलाई, 2026 को आयोजित अमृत महोत्सव के कार्यक्रम में विधानसभा के नए पुराने सदस्यों को एक साझा मंच उपलब्ध कराने और एक दूसरे के अनुभवों को साझा करने का बेहतरीन अवसर उपलब्ध कराया है वहीं उच्च सदन के सभापति उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन और लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को अमृत महोत्सव के इस कार्यक्रम में उद्घाटन सत्र और समापन सत्र में सहभागी बनाकर कार्यक्रम को और अधिक गरिमामय बनाया है। अमृत महोत्सव में राजस्थान विधानसभा के 410 नए पुराने सदस्यों ने हिस्सा लिया वहीं 6 बार या इससे अधिक समय तक सदस्य रहे सम्माननीयों का सम्मान कर लोकतांत्रिक मूल्यों का ही स्वागत सम्मान किया गया है। 

आज जिस तरह से विधायिका की कम बैठकों, सत्रों के दौरान हंगामें के हालात और मतभेद और मनभेद के हालातों में राजस्थान विधानसभा का अमृत महोत्सव केवल एक आयोजन ना होकर नए विधायकों के लिए प्रेरणास्पद भी हो गया है। अमृत महोत्सव के दौरान राजस्थान में सामाजिक राजनीतिक परिवर्तनकारी 24 कानूनों पर चर्चा भी की गई तो नए पुराने सदस्यों के अनुभवों को साझा करने का भी बेहतरीन अवसर प्राप्त हो सका है। कार्यक्रम के दौरान उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन का रिमार्केवल प्रतिक्रिया दी कि चुनाव भले ही वोट के आधार पर जीते जाते हैं पर जनता का दिल तो लोकहितकारी कार्य करके ही जीता जा सकता है। संवैधानिक संस्थाओं की शक्ति गरिमा बनाये रखने में हैं वहीं बहस की गुणवत्ता, गंभीरता और सदन में आचरण की मर्यादा से ही संवैधानिक संस्थाएं मजबूत होती है। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला राजस्थान विधानसभा के भी सदस्य रह चुके हैं और उनका मानना रहा कि विधानसभा उनके लिए संस्कारों की पाठशाला रही है। पूर्व मुख्यमंत्री वसुन्धरा राजे ने कहा कि दुश्मनी जमकर करों पर खिड़की भी खुली रखों। इंसानियत राजनीति की लक्ष्मण रेखा से बड़ी होनी चाहिए। उन्होंने स्व. भैरोसिंह शेखावत और स्व. मोहन लाल सुखाड़िया व स्व. भैरोसिंह शेखावत व स्व. हरिदेव जोशी के बीच सदन और सदन के बाहर के संबंधों की चर्चा करते हुए कहा कि संबंधों की लक्ष्मण रेखा को नहीं लांघा जाना चाहिए। मतभेद भले ही हो पर मनभेद नहीं होना चाहिए। विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी की पहल पर आयोजित अमृत महोत्सव में मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा, प्रतिपक्ष नेता टीकाराम जूली सहित पक्ष विपक्ष के नेताओं ने खुलकर विचार रखते हुए विधायिका की कम बैठकों पर गंभीर चिंता व्यक्त की।

इसे भी पढ़ें: लोकसभा स्पीकर Om Birla ने किया Rajasthan Vidhan Sabha के Amrit Mahotsav का आगाज, 75 साल का सफर बेमिसाल

राजस्थान विधानसभा का अमृत महोत्सव इस मायने में महत्वपूर्ण हो जाता है कि सामान्यतः इस तरह के कार्यक्रम मात्र औपचारिकता बन कर रह जाते हैं पर जिस तरह से अमृत महोत्सव को लोकतंत्र के लिए उपादेय, लोकतांत्रिक मूल्यों की पुनर्स्थापना, सत्र के दौरान बहस के स्तर की गंभीरता, दलगत राजनीति से उठकर साझा मंच पर खुली चर्चा और अनुभवों का साझा करने से यह आयोजन विशिष्ठ आयोजन हो जाता है। जिस तरह से सत्रों के दौरान हंगामें के हालात बनते हैं और आपसी मतभेद और मनभेद की स्थितियां होने लगी है इस पर चिंता व्यक्त करने के साथ ही विधानसभा के पहले के सत्रों में गंभीरता, तथ्यात्मकता, गहन अध्ययन और स्तरीय बहसों के उदाहरण उदृत करते हुए गंभीर और स्तरीय बहस पर जोर दिया गया। यहां तक कहा गया कि हंगामें से नहीं तथ्य और तर्क व संवाद से बड़े नेता बनते हैं। लोकतंत्र की लक्ष्मण रेखा से इंसानियत की भावना पर जोर दिया गया। 

अमृत महोत्सव के बहाने जिस तरह से सदनों में बहस के दौरान प़क्ष-विपक्ष के सदस्यों द्वारा गरिमापूर्ण, गंभीरता परक, गहन अध्ययन, आलोचना के लिए आलोचना ना होने, तथ्यपरक पक्ष रखने और गंभीर बहस से सदन की गरिमा ही बढ़ेगी और इसका लाभ लोकतांत्रिक मूल्यों को और अधिक सुदृढ़ करने में मिल सकेगा। अध्यक्ष वासुदेव देवनानी का यह कहना कि अनुभव और युवा उर्जा का समागम ही लोकतंत्र की असली पूंजी है। देखा जाए तो राजस्थान विधानसभा के अमृत उत्सव का यह आयोजन जहां लोकतंत्र की मजबूती, लोकतांत्रिक मूल्यों के साथ ही लोकतंत्र में अटूट आस्था, गौरवशाली लोकतांत्रिक आस्था का माध्यम बन गया। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा का यह निकश की यह आयोजन अतीत का उत्सव ही नहीं अपितु भविष्य का पथ-प्रदर्शक भी है। राजस्थान विधानसभा के इस अमृत महोत्सव पर जिस तरह से सत्रों के दौरान बहस को स्तरीय बनाने, हंगामें की भेंट नहीं चढ़ाने, गहन अध्ययन और तर्क आधारित बहस और पूरी तैयारी के साथ सदन में हिस्सा लेने पर जिस तरह का एक स्वर में संदेश दिया गया है और जिस तरह से विचारधारा और प्रतिवद्धता भिन्न होने के बावजूद मानवीय संबंधों को बनाये रखने यानी की मतभेद के बावजूद मनभेद नहीं रखने का गंभीर व संदेश दिया गया है। अमृत महोत्सव में अभी चार कार्यक्रम और होने है और कार्यक्रमों पर आमजन की निगाहें इस मायने में हैं कि सदन की गरिमा और लोकतांत्रिक मूल्यों के साथ ही आमनागरिकों केन्द्र में होना चाहिए। आयोजन के लिए साधुवाद इस अर्थ में महत्वपूर्ण हो जाता है कि नए सदस्यों को गरिमापूर्ण इतिहास से रुबरु होने के साथ ही वरिष्ठों के अनुभवों को भी साझा और आत्मसात करने का अवसर मिल रहा है। सही मायने में विधायी परंपरा को समझने, संसदीय मर्यादाओं, लोकतांत्रिक मूल्यों पर अनुभवों को साझा करने का अवसर मिला है। 

- डॉ. राजेन्द्र प्रसाद शर्मा

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Jyestha Purnima 2026: क्यों है यह साल की सबसे खास पूर्णिमा, जानें Puja Vidhi और इसका महत्व

हिंदू धर्म में पूर्णिमा तिथि को बेहद शुभ और पुण्यदायी तिथि माना जाता है। हर महीने की आने वाली पूर्णिमा पूजा-पाठ, आध्यात्मिक साधना, स्नान और दान के लिए विशेष महत्व रखती है। ज्येष्ठ माह की पूर्णिमा का महत्व कई गुना अधिक माना जाता है। इस दिन जगत के पालनहार भगवान विष्णु, मां लक्ष्मी और चंद्रदेव की पूजा करने से जीवन में सुख-शांति और समृद्धि आती है। इस दिए किए गए दान-पुण्य और व्रत का फल गई गुना अधिक मिलता है। तो आइए जानते हैं ज्येष्ठ पूर्णिमा की तिथि, शुभ मुहूर्त और महत्व आदि के बारे में...

ज्येष्ठ पूर्णिमा 2026

वैदिक पंचांग के मुताबिक ज्येष्ठ माह के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि की शुरूआत 29 जून की सुबह 03:06 मिनट पर शुरू हुई है। वहीं अगले दिन यानी की 30 जून 2026 की सुबह 05:26 मिनट पर इस तिथि की समाप्ति होगी। उदयातिथि के मुताबिक 29 जून 2026 को ज्येष्ठ पूर्णिमा को मनाई जा रही है।

स्नान-दान का मुहूर्त

इस बार 29 जून 2026 को ज्येष्ठ पूर्णिमा मनाई जा रही है। यह सूर्योदय से लेकर रात में चंद्र दर्शन तक प्रभावी रहेगी। इसलिए इस दिन पूजा-पाठ, व्रत, स्नान और दान-पुण्य के धार्मिक कार्य किए जा सकते हैं। इस दिन पवित्र नदी या फिर नहाने के पानी में गंगाजल मिलाकर स्नान करना चाहिए। इसके अलावा इस दिन जरूरतमंदों को वस्त्र, अन्न, जल और अन्य उपयोगी वस्तुओं का दान करना चाहिए। इससे व्यक्ति पर मां लक्ष्मी और श्रीहरि की कृपा बनी रहती है।

महत्व

हिंदू धर्म में ज्येष्ठ पूर्णिमा को बेहद शुभ और पुण्यदायी माना जाता है। इस दिन भगवान विष्णु, मां लक्ष्मी और चंद्र देव की पूजा करने से जीवन में सुख-समृद्धि और मानसिक शांति आती है। वहीं इस दिन सत्यनारायण की पूजा और कथा करना चाहिए। इससे परिवार में सौभाग्य, खुशहाली और सकारात्मकता बनी रहती है। इस दिन संध्या काल में मां लक्ष्मी की पूजा और प्रिय भोग अर्पित करने से उन्नति के मार्ग खुलते हैं। वहीं चंद्र देव को अर्घ्य देने से मानसिक शांति मिलती है।

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  Sports

टेस्ट इतिहास के 5 मैच, जहां 1 दिन में बने 500 से ज्यादा रन, 90 साल से अटूट है विश्व कीर्तिमान

5 teams Most runs in one day in Test: टेस्ट क्रिकेट को धीमा और रक्षात्मक खेल मानने वालों के लिए ये 5 मुकाबले किसी झटके से कम नहीं हैं. इतिहास के इन 5 ऐतिहासिक मैचों में बल्लेबाजों ने ऐसी तबाही मचाई कि गेंदबाजों के पास छिपने की जगह नहीं बची. मैनचेस्टर में बने 588 रनों के वर्ल्ड रिकॉर्ड से लेकर रावलपिंडी में इंग्लैंड के बैज़बॉल धमाके तक, जब-जब एक ही दिन में 500 से अधिक रन बने, तब-तब क्रिकेट के पन्ने नए रिकॉर्ड्स से रंग गए. Sun, 9 Aug 2026 20:00:48 +0530

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Atique Ahmed News: माफिया अतीक की कब्र के पास बेटे अबान को किया दफन #shorts #atiqueahmed #prayagraj #tmktech #vivo #v29pro
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