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कारगिल के दुर्गम पर्वतों पर अदम्य साहस की अमर कहानी

देश कारगिल विजय दिवस की 27वीं वर्षगांठ मना रहा है। भारतीय सेना ने 26 जुलाई 1999 को कारगिल युद्ध में पाकिस्तानी फौज को बुरी तरह धूल चटाई थी। भारत-पाकिस्तान के बीच जम्मू कश्मीर के कारगिल जिले में हुआ वह युद्ध 60 दिनों तक चला था और पाकिस्तान फौज की करारी शिकस्त के बाद 26 जुलाई 1999 को समाप्त हुआ था। पाकिस्तान पर भारत की इस जीत को याद करते हुए 26 जुलाई को ‘कारगिल विजय दिवस’ के रूप में मनाया जाता है। पाकिस्तानी सैनिकों और भाड़े के आतंकवादियों को मारकर या खदेड़कर कारगिल की चोटियों पर कब्जा करने के लिए चलाए गए ‘ऑपरेशन विजय’ के तहत तमाम बाधाओं को पार करते हुए हमारे वीर जांबाजों ने उन्हें कारगिल से खदेड़कर दुर्गम चोटियों पर जीत का परचम लहराया था लेकिन देश को इसकी बहुत भारी कीमत भी चुकानी पड़ी थी। दरअसल उस युद्ध में भारत को विजय दिलाने में भारतीय सेना के सैंकड़ों जवान शहीद हुए थे। कारगिल युद्ध में न केवल भारतीय सेना के 527 सैनिक शहीद हुए थे बल्कि दो महीने तक चले उस युद्ध के दौरान 453 आम नागरिक भी मारे गए थे। इसीलिए भारतीय सेना की उस विजय के बाद सरकार द्वारा प्रतिवर्ष 26 जुलाई को भारतीय सेना के शौर्य दिवस के रूप में कारगिल विजय दिवस मनाए जाने का फैसला लिया गया। सही मायनों में कारगिल विजय दिवस भारतीय सैनिकों के साहस और बलिदान को स्मरण करने तथा उनके बलिदान को सम्मान देने का दिन है और 26 जुलाई का दिन विशेष रूप से देश के इन्हीं वीर सपूतों को समर्पित है। देश के जन-जन तक कारगिल युद्ध के इन्हीं नायकों के शौर्य और पराक्रम की गाथा पहुंचाने के लिए ही यह दिवस मनाया जाता है।

1971 के भारत-पाकिस्तान युद्ध के बाद पहली बार कारगिल युद्ध हुआ था, जब दोनों देश सीधे तौर पर सैन्य संघर्ष में शामिल हुए थे। कारगिल युद्ध भारतीय सीमा क्षेत्र में पाकिस्तानी सैनिकों और कश्मीरी आतंकवादियों की घुसपैठ का ही परिणाम था। उस भीषण युद्ध में वायु शक्ति, तोपखाने और पैदल सेना के संचालन का व्यापक उपयोग किया गया था। युद्ध की खास बात यह थी कि वह युद्ध काफी ऊंचाई पर लड़ा गया था, जिसमें कुछ सैन्य चौकियां तो 18 हजार फुट से भी ज्यादा ऊंचाई पर स्थित थी। ऐसे में भारतीय सैनिकों के लिए वह लड़ाई बेहद चुनौतीपूर्ण थी लेकिन हमारे जांबाजों ने देश की आन-बान और शान के लिए अपने प्राणों की आहूति देकर न केवल पाकिस्तान को उसकी असली औकात दिखाई बल्कि 700 से भी ज्यादा पाकिस्तानी सैनिकों को मौत के घाट भी उतारा। दुश्मन को रणनीतिक स्थानों से हटाने के लिए महत्वपूर्ण हवाई हमले करते हुए भारतीय वायुसेना ने उस युद्ध के दौरान बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। भारतीय सेना ने युद्ध के दौरान टोलोलिंग, टाइगर हिल, प्वाइंट 4875 सहित अन्य रणनीतिक चोटियों पर फिर से कब्जा कर लिया था।

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कारगिल युद्ध की शुरूआत 26 मई 1999 को भारतीय सेना के हवाई हमले के साथ हुई थी। दरअसल भारतीय सेना को 3 मई 1999 को कारगिल में स्थानीय चरवाहों द्वारा पाकिस्तानी सैनिकों और आतंकवादियों के बारे में सतर्क किया गया था और उसके दो ही दिन बाद 5 मई 1999 को पाकिस्तानी सैनिकों ने भारतीय सेना के कम से कम 5 जवानों को मार डाला था। उसके बाद 10 मई 1999 को भारतीय सेना द्वारा ‘ऑपरेशन विजय’ की शुरूआत की गई। उस दौरान कारगिल में पाकिस्तानी सेना ने भारतीय सेना के गोला-बारूद भंडार को निशाना बनाया। 26 मई को भारतीय सेना ने पाकिस्तानी सैनिकों पर हवाई हमला किया। 27 मई को भारतीय वायुसेना का एक मिग-27 गिर गया, जिसमें चार क्रू सदस्यों की मौत हो गई लेकिन विमान से बाहर निकलने वाले पायलट को पाकिस्तानी सैनिकों ने युद्धबंदी के रूप में पकड़ लिया। तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने 31 मई 1999 को घोषणा की कि कारगिल में युद्ध जैसी स्थिति है, जिसके बाद अमेरिका, फ्रांस सहित कुछ देशों ने अगले ही दिन भारत के खिलाफ सैन्य कार्रवाई के लिए पाकिस्तान को जिम्मेदार ठहराया। भारतीय सेना ने 5 जून 1999 को कुछ महत्वपूर्ण दस्तावेज जारी किए, जिनसे पूरी दुनिया के समक्ष पाकिस्तान की करतूत का खुलासा हुआ।

भारतीय सेना ने 9 जून 1999 को कारगिल के बटालिक सेक्टर में दो महत्वपूर्ण ठिकानों पर कब्जा कर लिया। अगले ही दिन पाकिस्तान ने जाट रेजिमेंट के 6 सैनिकों के शव क्षत-विक्षत हालत में भारत को लौटाए। 13 जून 1999 को भारत ने युद्ध की दिशा बदलते हुए महत्वपूर्ण टोलोलिंग चोटी पर भी कब्जा कर लिया और प्रधानमंत्री वाजपेयी ने कारगिल का दौरा किया। अमेरिकी राष्ट्रपति बिल क्लिंटन ने 15 जून 1999 को पाकिस्तान के प्रधानमंत्री नवाज शरीफ से पाकिस्तानी सैनिकों को पीछे हटाने का आग्रह किया लेकिन पाकिस्तान ने उस अपील को अनसुना कर दिया। 11 घंटे के भीषण संघर्ष के बाद भारतीय सेना ने 20 जून 1999 को टाइगर हिल के पास प्वाइंट 5060 और प्वाइंट 5100 पर भी पुनः कब्जा कर लिया। अमेरिकी राष्ट्रपति बिल क्लिंटन ने 5 जुलाई 1999 को नवाज शरीफ से मुलाकात की, जिसके बाद पाकिस्तान ने कारगिल से पाकिस्तानी सैनिकों को हटाने की घोषणा की। 11 जुलाई 1999 को पाकिस्तानी सैनिकों ने पीछे हटना शुरू किया और भारतीय सेना ने बटालिक की प्रमुख चोटियों पर कब्जा कर लिया। भारतीय सेना ने 14 जुलाई 1999 को ‘ऑपरेशन विजय’ की सफलता की घोषणा की और 26 जुलाई 1999 को वीर 527 सैनिकों की शहादत के बाद कारगिल युद्ध समाप्त हुआ।

बहुत ऊंचाई पर लड़े गए उस भीषण युद्ध के दौरान अपनी बहादुरी और साहसिक कार्यों के लिए कई सैन्य अधिकारी राष्ट्रीय नायक बन गए, जिनमें 13 जेएके राइफल्स के कैप्टन विक्रम बत्रा, 18 ग्रेनेडियर्स के ग्रेनेडियर योगेन्द्र सिंह यादव, 1/11 गोरखा राइफल्स के लेफ्टिनेंट मनोज कुमार पांडे, 18 ग्रेनेडियर्स के लेफ्टिनेंट बलवान सिंह, एएससी, 2 राज आरआईएफ के कैप्टन एन केंगुरुसे प्रमुख रूप से शामिल हैं। युद्ध के दौरान भारत सेना के अनेक नायकों ने अपने प्राणों की आहुति इसीलिए दी ताकि पूरा देश चैन की नींद सो सके। कारगिल युद्ध में शौर्य और पराक्रम के लिए ग्रेनेडियर योगेन्द्र सिंह यादव तथा लेफ्टिनेंट मनोज कुमार पांडे को परमवीर चक्र और लेफ्टिनेंट बलवान सिंह को महावीर चक्र से सम्मानित किया गया। कैप्टन एन केंगुरुसे को मरणोपरांत महावीर चक्र और कैप्टन विक्रम बत्रा को मरणोपरांत परमवीर चक्र प्रदान कर उनकी शहादत का सम्मान किया। कारगिल युद्ध के दौरान कैप्टन विक्रम बत्रा के शब्द, ‘ये दिल मांगे मोर’ तो अब भी लोगों के कानों में गूंजते हैं। कारगिल युद्ध के ऐसे ही वीर नायकों की बहादुरी, साहस और जुनून की कहानियां आज भी देश के प्रत्येक नागरिक के दिलोदिमाग में जोश भर देती हैं।

- योगेश कुमार गोयल
(लेखक 36 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय वरिष्ठ पत्रकार और ‘सागर से अंतरिक्ष तक: भारत की रक्षा क्रांति’ सहित कई पुस्तकों के लेखक हैं)

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Devshayani Ekadashi 2026: 25 जुलाई से बदलेगा इन 3 राशियों का भाग्य, करियर में होगा बड़ा उछाल

इस साल देवशयनी एकादशी 25 जुलाई, शनिवार को मनाई जाएगी। मान्यता है कि इसी दिन भगवान विष्णु चार महीने के लिए योगनिद्रा में चले जाते हैं। इसी के साथ चातुर्मास की भी शुरुआत होती है। हालांकि इस दौरान भी भगवान विष्णु की पूजा और एकादशी का व्रत उतना ही शुभ माना जाता है।

ज्योतिष के मुताबिक, इस बार की देवशयनी एकादशी 3 राशियों के लिए खास तौर पर शुभ मानी जा रही है। इन लोगों को करियर, पैसे और रिश्तों में अच्छे बदलाव देखने को मिल सकते हैं।

मेष राशि वालों को करियर में मिल सकती है नई सफलता

देवशयनी एकादशी मेष राशि वालों के लिए अच्छी खबर लेकर आ सकती है। भगवान विष्णु की कृपा से कमाई के नए मौके मिल सकते हैं। अगर आपने पहले कहीं निवेश किया है, तो उससे फायदा होने की संभावना है। हालांकि कोई भी बड़ा फैसला लेने से पहले अच्छी तरह सोच लें।

नौकरी या बिजनेस में आगे बढ़ने के मौके मिल सकते हैं और आपकी मेहनत का अच्छा रिजल्ट देखने को मिलेगा। बस जरूरत से ज्यादा कॉन्फिडेंट होने से बचें, क्योंकि इससे काम बिगड़ भी सकता है। लव लाइफ और शादीशुदा जिंदगी में भी खुशियां बढ़ सकती हैं और पार्टनर के साथ अच्छा समय बिताने का मौका मिलेगा।
शुभ रंग: नीला
 

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वृषभ राशि वालों को मेहनत का मिलेगा पूरा फायदा

वृषभ राशि वालों के लिए यह एकादशी करियर के लिहाज से काफी अच्छी रह सकती है। ऑफिस या काम की जगह पर आपकी मेहनत की तारीफ होगी और अच्छे नतीजे मिल सकते हैं।

भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी की कृपा से आर्थिक स्थिति पहले से बेहतर हो सकती है। पुराने निवेश से अचानक फायदा मिलने के योग हैं, जिससे बचत भी बढ़ सकती है। अगर आप किसी क्रिएटिव फील्ड में हैं, तो आपको नई पहचान और अच्छे मौके मिल सकते हैं।
शुभ रंग: लाल
 

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कन्या राशि वालों को पैसों और परिवार दोनों में मिलेगी खुशियां

कन्या राशि वालों के लिए देवशयनी एकादशी आर्थिक मामलों में शुभ मानी जा रही है। मां लक्ष्मी की कृपा से पैसों से जुड़ी परेशानियां कम हो सकती हैं और आर्थिक स्थिति मजबूत हो सकती है।

अगर आप कोई नया काम शुरू करने की सोच रहे हैं, तो समय आपके पक्ष में रह सकता है। करियर में आगे बढ़ने के अच्छे मौके मिलेंगे। सेहत ठीक रहेगी और परिवार का माहौल भी खुशहाल रहेगा। दोस्तों और करीबियों का साथ मिलेगा। किसी पुराने दोस्त से मुलाकात भी हो सकती है, जो आपको खुशी देगी।
शुभ रंग: सफेद

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  Sports

सरफराज खान से लेकर रजत पाटीदार तक... 3 खिलाड़ी, जो भारत बनाम श्रीलंका टेस्ट सीरीज में साई सुदर्शन की जगह ले सकते हैं

Who will Replace Sai Sudharsan: श्रीलंका के खिलाफ 2 मैचों की टेस्ट सीरीज से पहले भारतीय टीम को बड़ा झटका लगा है. चोट के कारण इन-फॉर्म बल्लेबाज साई सुदर्शन सीरीज से बाहर हो गए हैं. उनकी जगह टीम में शामिल होने के लिए तीन खिलाड़ी सबसे बड़े दावेदार बनकर उभरे हैं. इनमें सरफराज खान सबसे आगे हैं, जिन्होंने रणजी ट्रॉफी 2025-26 और घरेलू टेस्ट मैचों में शानदार प्रदर्शन किया है. वहीं, मध्य प्रदेश के रजत पाटीदार का अनुभव और महाराष्ट्र के कप्तान रुतुराज गायकवाड़ की रेड-बॉल क्रिकेट में निरंतरता चयनकर्ताओं के लिए मजबूत विकल्प पेश कर रही है. Sat, 8 Aug 2026 16:11:03 +0530

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