देवों के देव महादेव का सबसे प्रिय महीना सावन 30 जुलाई से शुरू हो रहा है। सावन का महीना शुरू होते ही पवित्र कांवड़ यात्रा भी आरंभ हो जाएगी। इस बार सावन की शुरुआत 30 जुलाई, गुरुवार से हो रही है, इसलिए इसी दिन से यात्रा शुरू होगी। इस यात्रा का समापन सावन शिवरात्रि के दिन यानी 11 अगस्त, मंगलवार को होगा। मुख्य रूप से कांवड़ यात्रा 30 जुलाई से 11 अगस्त तक चलेगी, हालांकि कई जगह यह पूरे सावन चलती है।
3 से 11 अगस्त का समय रहेगा बेहद खास
3 अगस्त को सावन का पहला सोमवार है और 11 अगस्त को सावन शिवरात्रि है। इसलिए 3 से 11 अगस्त के बीच सड़कों और मंदिरों में भक्तों की भारी भीड़ देखने को मिलेगी। इस दौरान शिव भक्त 'हर हर महादेव' और 'बम बम भोले' के जयकारे लगाते हुए अपने घरों और मंदिरों की ओर बढ़ते हैं। इसे भी पढ़ें: Shravan Month 2026 Rules: सावन व्रत में भगवान शिव के सामने जरूर बोलें ये एक मंत्र, पूरी होगी हर Wish
सावन में कांवड़ यात्रा का धार्मिक महत्व
कांवड़ यात्रा को बहुत ही शुभ और पवित्र माना जाता है। मान्यता है कि इस महीने में भगवान शिव की पूजा करने से जितना पुण्य मिलता है, उससे कहीं ज्यादा पुण्य कांवड़ यात्रा से मिलता है। भक्त नंगे पांव पैदल चलकर या गाड़ियों से पवित्र नदियों का जल लाते हैं और शिवलिंग पर चढ़ाते हैं। माना जाता है कि कांवड़ उठाने और जल चढ़ाने से भोलेनाथ प्रसन्न होते हैं, भक्तों पर अपनी कृपा बनाए रखते हैं और मोक्ष के द्वार खोलते हैं।
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हिंदू धर्म में जया पार्वती के व्रत का खास महत्व होता है। इसमें लगातार 5 दिनों तक व्रत किया जाता है। इस दौरान भगवान शिव और मां पार्वती की जया के रूप में पूजा की जाती है। जया पार्वती व्रत अविवाहित कन्याएं और विवाहित महिलाएं दोनों रखती हैं। कुंवारी लड़कियां योग्य पति के लिए यह व्रत करती हैं। वहीं शादीशुदा महिला पति की लंबी उम्र और खुशहाल वैवाहिक जीवन के लिए यह व्रत करती हैं। इसके साथ ही संतान प्राप्ति के लिए भी जया पार्वती व्रत रखा जाता है। तो आइए जानते हैं जया पार्वती व्रत की तिथि, महूर्त, पूजन विधि और महत्व के बारे में...
तिथि और मुहूर्त
वैदिक पंचांग के मुताबिक हर साल आषाढ़ माह की शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी से जया पार्वती व्रत की शुरूआत होती है। इस बार 26 जुलाई 2026 की दोपहर 01:57 मिनट से त्रयोदशी तिथि की शुरूआत हुई थी। इस तिथि की समाप्ति आज यानी 27 जुलाई की दोपहर 04:14 मिनट पर होगा। ऐसे में जया पार्वती व्रत 27 जुलाई को शुरू हो रहा है।
पूजन विधि
इस दिन सुबह जल्दी स्नान आदि करने के बाद शुद्ध कपड़े पहनें। फिर घर के मंदिर में एक छोटे पात्र में पानी में ज्वार और गेहूं के दाने बोएं। अब पात्र के ऊपर 3 या 7 बार कलावा लपेटें। जिसको कुमकुम से रंग लें। लकड़ी की चौकी पर लाल कपड़ा बिछाकर भगवान शिव और मां पार्वती की मूर्ति को स्थापित करें। फिर हाथ में जल लेकर व्रत रखने का संकल्प लें। इसके बाद भगवान शिव और मां पार्वती को जल, चंदन, अक्षत, वस्त्र, श्रृंगार का सामान, फल, फूल और मिठाई आदि अर्पित करें।
घी का दीपक जलाकर 'ऊँ नम: शिवाय' और 'ऊँ पार्वतीपतये नम:' मंत्र का 11 या 21 बार जाप करें। इसके बाद जया पार्वती व्रत की कथा पढ़ें और आरती करें। वहीं पूजा के अंत में क्षमायाचना करके पूजा का समापन करें।
व्रत के नियम
व्रत के हर दिन गेहूं, ज्वार और शिव-पार्वती की पूजा-अर्चना करें।
5 दिन व्रत के दौरान आप सिर्फ दूध, फल, दही, फलों का जूस और दूध से बनी चीजों का सेवन करें।
इस व्रत में नमक वाला भोजन नहीं किया जाता है।
वहीं 5 दिनों तक अनाज नहीं खाना चाहिए।
व्रत में सभी तरह की सब्जियों का सेवन नहीं करना चाहिए।
दोपहर के समय सोना नहीं चाहिए।
बाल और नाखून नहीं काटने चाहिए।
5वें दिन रात में सोने के बजाय जागरण करना चाहिए।
व्रत की समापन तिथि
हर साल आषाढ़ माह की कृष्ण पक्ष की तृतीया तिथि पर जया पार्वती व्रत की समाप्ति होती है। इस बार 31 जुलाई 2026 को जया पार्वती व्रत का समापन होगा। लेकिन इन 5 दिनों के व्रत का पारण 01 अगस्त 2026 को किया जाएगा। जया पार्वती व्रत लगातार 5, 7, 9 या 11 वर्षों तक करना होगा है। वहीं अधिकतम 20 सालों तक करने का नियम है।
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