Aaj Ka Mesh Rashifal 8 August 2026 : आज मेष राशि में आज ध्रुव योग बनेगा. बिगड़े काम बनेंगे. रुका हुआ धन मिल सकता है. दिन ऊर्जा से भरपूर रहेगा. आवेग में आकर कोई बड़ा फैसला न लें. विंध्यधाम के ज्योतिषाचार्य अखिलेश अग्रहरि लोकल 18 से बताते हैं कि आज मेष राशि वालों के लिए बुध का प्रभाव व्यापार, लेखन, मीडिया, शिक्षा और बातचीत से जुड़े कार्यों में लाभदायक रहेगा. चंद्रमा और सूर्य के संयोग से विशेष योग बनेगा. बेवजह के विवादों से बचें. आज चंद्रमा मिथुन राशि में रहने वाले हैं. इससे संचार, यात्रा, नए संपर्क और सीखने की इच्छा बढ़ेगी.
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आषाढ़ माह की पूर्णिमा का दिन भगवान शिव और मां पार्वती की पूजा-उपासना के लिए बेहद शुभ माना जाता है। वहीं इस दिन महिलाएं कोकिला व्रत करती हैं। धार्मिक मान्यता है कि इस व्रत को करने से वैवाहिक जीवन में प्रेम, सुख और सौभाग्य बना रहता है। वहीं कुंवारी लड़कियों योग्य जीवनसाथी की कामना के साथ कोकिला व्रत करती हैं। इस बार आज यानी की 28 जुलाई 2026 को कोकिला व्रत किया जा रहा है। तो आइए जानते हैं कोकिला व्रत कि तिथि, मुहूर्त, पूजन विधि और महत्व के बारे में...
तिथि और शुभ मुहूर्त
वैदिक पंचांग के मुताबिक आषाढ़ माह की पूर्णिमा तिथि की शुरूआत 28 जुलाई की शाम 06:18 मिनट पर होगी। वहीं अगले दिन यानी की 29 जुलाई 2026 की रात 08:05 मिनच पर इस तिथि की समाप्ति होगी। ऐसे में उदयातिथि के मुताबिक यह व्रत 28 जुलाई 2026 को किया जा रहा है।
पूजा का समय
कोकिला व्रत की पूजा शाम के समय प्रदोष काल में करना शुभ माना जाता है। आज प्रदोष काल का समय शाम 07:15 मिनट से लेकर रात 09:20 मिनट तक रहेगा। इस दौरान सुहागिन महिलाएं पूजा-अर्चना कर सकती हैं।
पूजन विधि
इस दिन सुबह जल्दी स्नान आदि करने के बाद भगवान शिव और मां पार्वती का ध्यान करें और व्रत का संकल्प लें। इसके बाद सूर्य देव को अर्घ्य दें और गंगाजल से मंदिर की सफाई करें। फिर मंदिर में भगवान शिव और मां पार्वती की प्रतिमा को स्थापित करें। इसके बाद पवित्र मिट्टी से कोयल की छोटी प्रतिमा बनाएं। क्योंकि कोयल को मां पार्वती का प्रतीक माना जाता है।
इसके बाद इस कोयल की प्रतिमा को भगवान शिव और मां पार्वती की मूर्ति के पास चौकी पर स्थापित करें। फिर फूल, धूप, चंदन, दीप, बेलपत्र, भांग, धतूरा, मौसमी फल और मिठाई आदि अर्पित कर भगवान शिव और मां पार्वती की विधि-विधान से पूजा करें।
बता दें कि प्रदोष काल में कोकिला व्रत की पूजा करना सबसे फलदायी माना जाता है। पूजा के दौरान कोकिला व्रत की कथा जरूर सुनना चाहिए। अंत में मां पार्वती की आरती करें और पूजा में हुई भूलचूक के लिए क्षमायाचना करें।
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