लुंगी एनगिडी और नटराजन के सामने ढेर हुई लखनऊ सुपर जायंट्स, दिल्ली कैपिटल्स को मिला सिर्फ 142 रनों का लक्ष्य
IPL 2026 का पांचवा मैच लखनऊ सुपर जायंट्स और दिल्ली कैपिटल्स के बीच इकाना स्टेडियम में खेला जा रहा है. दिल्ली कैपिटल्स के कप्तान अक्षर पटेल के टॉस जीतकर पहले गेंदबाजी करने के फैसले को गेंदबाजों ने सही साबित किया और लखनऊ सुपर जायंट्स की पूरी टीम को 18.4 ओवरों में 141 रनों पर समेट दिया. LSG के लिए अब्दुल समद ने सबसे ज्यादा 36 रन बनाए. जबकि मिचेल मार्श ने सबसे ज्यादा रनों की पारी खेली.
LSG के कप्तान ऋषभ पंत का नहीं चला बल्ला
दिल्ली कैपिटल्स के साथ खेले जा रहे इस मैच में लखनऊ सुपर जायंट्स के लिए कप्तान ऋषभ पंत और मिचेल मार्श ने ओपनिंग की. दोनों ने धीमी शुरुआत की. पावरप्ले में ही लखनऊ सुपर जायंट्स ने 48 रन के स्कोर पर ही 2 विकेट गंवा दिए. कप्तान ऋषभ पंत 9 गेंद पर 7 रन बनाकर रनआउट हो गए. इसके बाद एडम मार्कराम भी 8 गेंद पर 11 रन बनाकर अक्षर पटेल का शिकार बने.
71 रन के स्कोर पर LSG की आधी टीम लौटी पवेलियन
इसके बाद 49 रन के स्कोर पर आयुष बदोनी के रूप में लखनऊ सुपर जायंट्स ने तीसरा विकेट गंवा दिया. आयुष बदोनी ने 3 गेंद का सामना किया, लेकिन खाता भी नहीं खोल पाए. उन्हें नटराजन ने चलता किया. फिर निकोलस पूरन को लुंगी एनगिडी ने बोल्ड आउट कर पवेलियन का रास्ता दिखाया. पूरन 8 गेंद पर 8 रन बनाकर चलते बने. फिर कुलदीप यादव ने मिचेल मार्श को आउट कर LSG को पांचवा झटका दिया. मार्श 28 गेंद पर 35 रन बनाए. इस तरह 71 रन के स्कोर पर लखनऊ सुपर जायंट्स की आधी टीम पवेलियन लौट गई.
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ऐसी है दोनों टीमों की प्लेइंग 11
केएल राहुल (विकेटकीपर), पथुम निसांका, नितीश राणा, अक्षर पटेल (कप्तान), ट्रिस्टन स्टब्स, डेविड मिलर, विप्रज निगम, लुंगी एनगिडी, कुलदीप यादव, टी नटराजन, मुकेश कुमार.
एडेन मार्कराम, मिशेल मार्श, निकोलस पूरन, ऋषभ पंत (विकेटकीपर/कप्तान), आयुष बदोनी, अब्दुल समद, मुकुल चौधरी, मोहसिन खान, मोहम्मद शमी, एनरिक नॉर्टजे, प्रिंस यादव.
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होर्मुज ‘टैक्स’! ईरान ने ट्रंप की रणनीति को क्या 'अर्थ' के जाल में फंसाया?
नई दिल्ली, 1 अप्रैल (आईएएनएस)। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का ईरान को लेकर असली खेल उनके हालिया बयानों में साफ झलकता है—एक तरफ कड़ी चेतावनी और दूसरी तरफ सीमित युद्ध का संकेत। उन्होंने कहा कि अगर ईरान नहीं झुका तो “हम उन्हें मारते रहेंगे, लेकिन साथ ही यह भी जोड़ा कि यह संघर्ष “दो-तीन हफ्तों में खत्म हो सकता है” और अमेरिका इसमें लंबे समय तक नहीं रहेगा।
बांग्लादेश में भारत की पूर्व उच्चायुक्त रहीं वीणा सिकरी ने इसे रणनीति का हिस्सा या मिस कैल्कुलेशन का नतीजा बताया। सिकरी बोलीं, नहीं, ये लिमिटेड युद्ध नहीं है। हाल ही में 900 किलोग्राम इस्फाहान पर बम फेंका। बस थोड़ी देर का विराम सिर्फ इस बात को लेकर दिया कि हम पावर प्लांट को अटैक नहीं करेंगे।
ट्रंप के बयान यह भी दिखाते हैं कि वह इस टकराव को “कंट्रोल्ड वॉर” की तरह देख रहे हैं—जहां अचानक हमले, मनोवैज्ञानिक दबाव और अनिश्चितता के जरिए विरोधी को बातचीत के लिए मजबूर किया जाए। उन्होंने यह तक कहा कि अमेरिका के बाहर निकलते ही स्ट्रेट ऑफ होर्मुज अपने आप खुल जाएगा, जिससे यह संदेश गया कि वाशिंगटन खुद को इस संकट का केंद्र मानता है और मानता है कि उसके हटते ही हालात सामान्य हो जाएंगे।
लेकिन ईरान ने इस रणनीति को समझकर खेल को एक नए स्तर पर पहुंचा दिया है। ईरानी नेताओं और अधिकारियों के बयानों में अब सीधा संदेश है कि “दबाव डालकर झुकाया नहीं जा सकता” और “युद्ध कब खत्म होगा, यह हम तय करेंगे, अमेरिका नहीं।” ईरान ने अमेरिकी नीति को “विरोधाभासी” बताते हुए कहा कि वाशिंगटन कभी बातचीत की बात करता है तो कभी धमकी देता है, जिससे उस पर भरोसा नहीं किया जा सकता।
इसी समझ के आधार पर ईरान ने सबसे बड़ा कदम आर्थिक मोर्चे पर उठाया है। उसने संकेत दिया है कि होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने वाले जहाजों पर “टैक्स या टोल” लगाया जा सकता है। ईरानी संसद और अधिकारियों के बयानों में यह कहा गया कि जो देश इस मार्ग का उपयोग करेंगे, उन्हें उसकी “सुरक्षा” के बदले भुगतान करना होगा। यह सिर्फ एक आर्थिक फैसला नहीं बल्कि एक रणनीतिक संदेश है—अगर दबाव बढ़ेगा तो तेल आपूर्ति और वैश्विक व्यापार को हथियार बनाया जाएगा।
ईरान ने इससे भी आगे बढ़कर चेतावनी दी कि हालात बिगड़ने पर “एक बूंद तेल भी नहीं गुजरने दिया जाएगा।” इस बयान का असर तुरंत वैश्विक बाजारों में दिखा, जहां तेल की कीमतों में उछाल आया और अनिश्चितता बढ़ी। इससे साफ हो गया कि तेहरान अब सीधे सैन्य टकराव के बजाय लागत बढ़ाने की रणनीति पर काम कर रहा है—यानी संघर्ष को इतना महंगा बना देना कि विरोधी खुद पीछे हटने पर मजबूर हो जाए।
इस पूरे घटनाक्रम में अब टकराव की प्रकृति बदल चुकी है। एक तरफ ट्रंप हैं, जो तेज दबाव, सीमित युद्ध और राजनीतिक संदेशों के जरिए जल्दी परिणाम चाहते हैं। दूसरी तरफ ईरान है, जिसने समय, बाजार और अब “होर्मुज टैक्स” को हथियार बनाकर इस रणनीति को चुनौती दी है। यही कारण है कि यह संघर्ष अब सिर्फ सैन्य शक्ति का नहीं, बल्कि अर्थव्यवस्था, मनोविज्ञान और वैश्विक ऊर्जा नियंत्रण का जटिल खेल बन गया है।
--आईएएनएस
केआर/
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