Paneer Vs Tofu: डायबिटीज के मरीजों के लिए क्या होता है बेहतर?
Paneer Vs Tofu: भारतीय घरों में पनीर की सब्जी, पनीर भुर्जी और पनीर टिक्का बड़े चाव से खाए जाते हैं. वहीं टोफू को भी इन दिनों हेल्दी डाइट का हिस्सा माना जाने लगा है. लेकिन डायबिटीज के मरीजों के मन में अक्सर यह सवाल रहता है कि पनीर और टोफू में से क्या खाया जाए, जिससे ब्लड शुगर भी कंट्रोल रहे और सेहत भी अच्छी बनी रहे. ऐसे में आज हम इस खबर में जानेंगे कि पनीर और टोफू में क्या फर्क है और डायबिटीज के मरीजों के लिए इनमें से कौन सा बेहतर विकल्प हो सकता है.
पनीर और टोफू में पोषण का फर्क
पनीर और टोफू दोनों ही प्रोटीन के अच्छे स्रोत हैं, लेकिन इनके पोषण में काफी अंतर होता है. 100 ग्राम पनीर में करीब 265 से 300 कैलोरी होती हैं, जबकि 100 ग्राम टोफू में सिर्फ 70 से 144 कैलोरी होती हैं. प्रोटीन की बात करें तो पनीर में 18 से 20 ग्राम प्रोटीन होता है, जबकि टोफू में 8 से 17 ग्राम प्रोटीन पाया जाता है. फैट के मामले में पनीर में 15 से 25 ग्राम फैट होता है जो ज्यादातर सैचुरेटेड होता है, वहीं टोफू में सिर्फ 4 से 9 ग्राम फैट होता है जो अनसैचुरेटेड होता है. कार्बोहाइड्रेट दोनों में बहुत कम होता है, इसलिए ब्लड शुगर पर दोनों का असर काफी सीमित रहता है. टोफू में फाइबर भी होता है जो पनीर में बिल्कुल नहीं होता.
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ब्लड शुगर पर पनीर और टोफू का असर
डायबिटीज के मरीजों के लिए सबसे जरूरी यह जानना है कि कोई भी खाना ब्लड शुगर को कितना बढ़ाता है. पनीर का ग्लाइसेमिक इंडेक्स करीब 27 से 30 होता है, जबकि टोफू का ग्लाइसेमिक इंडेक्स सिर्फ 15 के आसपास होता है. यानी दोनों ही लो ग्लाइसेमिक फूड हैं और सीमित मात्रा में खाने पर ब्लड शुगर को अचानक नहीं बढ़ाते. दोनों में मौजूद प्रोटीन और फैट खाना पचने की गति को धीमा करते हैं, जिससे खाने के बाद ब्लड शुगर धीरे-धीरे बढ़ता है. रिसर्च यह भी बताती है कि टोफू में पाए जाने वाले आइसोफ्लेवोन्स नामक तत्व इंसुलिन सेंसिटिविटी को बेहतर बनाने में मदद कर सकते हैं.
डायबिटीज के मरीजों के लिए पनीर के फायदे
डायबिटीज के मरीजों के लिए पनीर एक अच्छा विकल्प हो सकता है. इसमें हाई क्वालिटी प्रोटीन होता है जो मांसपेशियों को मजबूत रखता है और पेट को लंबे समय तक भरा रखता है. पनीर में कार्बोहाइड्रेट बहुत कम होता है, इसलिए यह ब्लड शुगर को ज्यादा प्रभावित नहीं करता. इसमें कैल्शियम और मैग्नीशियम भी अच्छी मात्रा में होते हैं, जो ब्लड शुगर को रेगुलेट करने में मदद कर सकते हैं. पालक पनीर, पनीर भुर्जी और ग्रिल्ड पनीर जैसी डिशेज में इसे आसानी से शामिल किया जा सकता है. हालांकि ध्यान रखें कि मलाई पनीर या फुल फैट पनीर ज्यादा खाने से वजन बढ़ सकता है और कोलेस्ट्रॉल भी बढ़ सकता है, जिसका असर ब्लड शुगर पर पड़ सकता है. इसलिए घर पर बना लो फैट पनीर ही बेहतर रहता है और एक बार में 50 से 100 ग्राम से ज्यादा न खाएं.
डायबिटीज के मरीजों के लिए टोफू के फायदे
टोफू डायबिटीज के मरीजों के लिए एक बेहतरीन विकल्प माना जाता है. इसमें कैलोरी और सैचुरेटेड फैट दोनों बहुत कम होते हैं, जिससे वजन कंट्रोल में रहता है और दिल की सेहत भी अच्छी बनी रहती है. इसमें फाइबर होता है जो पाचन को बेहतर बनाता है और पेट को भरा हुआ महसूस कराता है. टोफू में आइसोफ्लेवोन्स नामक प्लांट कंपाउंड होते हैं जो इंसुलिन सेंसिटिविटी को बेहतर बनाने और दिल की बीमारियों का खतरा कम करने में मददगार हो सकते हैं. अगर आपका वजन ज़्यादा है, कोलेस्ट्रॉल हाई है या आप प्लांट बेस्ड डाइट फॉलो करते हैं, तो टोफू आपके लिए और भी फायदेमंद साबित हो सकता है.
पनीर और टोफू में से डायबिटीज के मरीजों के लिए क्या बेहतर है?
अगर दोनों की तुलना करें तो टोफू को डायबिटीज के मरीजों के लिए थोड़ा बेहतर विकल्प माना जा सकता है, खासकर उन लोगों के लिए जिनका वजन ज्यादा है, कोलेस्ट्रॉल हाई है या जो कैलोरी कंट्रोल करना चाहते हैं. इसका कम फैट, कम कैलोरी और फाइबर व आइसोफ्लेवोन्स जैसे पोषक तत्व इसे लंबे समय तक ब्लड शुगर और दिल की सेहत के लिए फायदेमंद बनाते हैं. लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि पनीर बिल्कुल छोड़ दें. अगर आप हाई प्रोटीन डाइट चाहते हैं, पनीर का स्वाद पसंद है और लो फैट या घर का बना पनीर खाते हैं, तो पनीर भी सीमित मात्रा में खाया जा सकता है. दोनों को बारी-बारी से डाइट में शामिल करना भी एक अच्छा तरीका हो सकता है.
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