ओवैसी और हुमायूं कबीर ने ममता बनर्जी को लेकर दिया बड़ा बयान, जानें मुस्लिम वोटर्स को लेकर क्या कहा?
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के सियासी रण में एक नया मोड़ तब आया जब असदुद्दीन ओवैसी ने राज्य की राजनीति में सक्रिय एंट्री की. मुर्शिदाबाद में आयोजित एक बड़ी जनसभा में उन्होंने हुमायूं कबीर के साथ मिलकर न केवल अपनी चुनावी रणनीति स्पष्ट की, बल्कि ममता बनर्जी समेत अन्य दलों पर तीखा हमला भी बोला. इस गठबंधन ने राज्य में मुकाबले को अब त्रिकोणीय बना दिया है.
मुस्लिम वोटर्स को ‘किंगमेकर’ बनने की अपील
अपने भाषण में ओवैसी ने मुस्लिम मतदाताओं को सीधा संदेश देते हुए कहा कि अब समय आ गया है कि वे केवल 'वोटिंग मशीन' बनकर न रहें, बल्कि 'किंगमेकर' की भूमिका निभाएं. उन्होंने दावा किया कि बंगाल में करीब 30 फीसदी मुस्लिम आबादी होने के बावजूद उनकी सरकारी नौकरियों में हिस्सेदारी मात्र 7 प्रतिशत है, जो उनकी राजनीतिक उपेक्षा को दर्शाता है.
ओवैसी का कहना था कि जिस समुदाय के पास अपना मजबूत नेतृत्व होता है, वही असली विकास कर पाता है. इसलिए उन्होंने स्वतंत्र मुस्लिम नेतृत्व की आवश्यकता पर जोर दिया.
ममता बनर्जी पर सीधा हमला
ओवैसी ने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को निशाने पर लेते हुए कहा कि केवल प्रतीकात्मक राजनीति से समुदाय का भला नहीं हो सकता. उन्होंने सवाल उठाया कि त्योहारों पर दुआ मांगने से क्या शिक्षा और रोजगार की समस्याएं हल हो सकती हैं?
उन्होंने आरोप लगाया कि तृणमूल कांग्रेस ने मुस्लिम वोट तो हासिल किए, लेकिन जमीनी स्तर पर उनके लिए ठोस काम नहीं किया. 5 लाख ओबीसी सर्टिफिकेट रद्द होने के मुद्दे को भी उन्होंने अल्पसंख्यकों के साथ अन्याय बताया.
कांग्रेस और लेफ्ट पर भी निशाना
ओवैसी ने केवल टीएमसी ही नहीं, बल्कि भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस और वाम मोर्चा पर भी तीखा प्रहार किया. उन्होंने कहा कि दशकों तक सत्ता में रहने के बावजूद इन दलों ने मुस्लिम समुदाय की स्थिति में कोई खास सुधार नहीं किया. उनका आरोप था कि ये पार्टियां धर्मनिरपेक्षता की बात तो करती हैं, लेकिन जब असली मुद्दों की बात आती है, तो चुप्पी साध लेती हैं.
मुर्शिदाबाद और मालदा में बदले समीकरण
मुर्शिदाबाद और मालदा जैसे जिले, जो पहले कांग्रेस और बाद में टीएमसी के गढ़ माने जाते थे, अब नए राजनीतिक समीकरणों के केंद्र बनते जा रहे हैं. ओवैसी और हुमायूं कबीर का गठबंधन इन इलाकों में मजबूत पकड़ बनाने की कोशिश कर रहा है. दोनों नेताओं ने घोषणा की है कि उनका गठबंधन 180 से अधिक सीटों पर चुनाव लड़ेगा और उनका लक्ष्य केवल सीटें जीतना नहीं, बल्कि सत्ता की चाबी अपने हाथ में रखना है.
हुमायूं कबीर का समर्थन और आरोप
हुमायूं कबीर ने भी ममता सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि मुस्लिम समुदाय के साथ विश्वासघात हुआ है. उन्होंने दावा किया कि सरकार ने उनकी अनदेखी की और उनके मुद्दों को प्राथमिकता नहीं दी.
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यह गठबंधन केवल चुनावी रणनीति नहीं, बल्कि समुदाय के राजनीतिक सशक्तिकरण का प्रयास है.
चुनाव में बढ़ेगा रोमांच
ओवैसी की एंट्री और इस नए गठबंधन ने पश्चिम बंगाल के चुनाव को और अधिक दिलचस्प बना दिया है. खासकर मुस्लिम वोट बैंक के संभावित बिखराव से टीएमसी की मुश्किलें बढ़ सकती हैं.
आने वाले मतदान चरणों में यह देखना अहम होगा कि क्या यह गठबंधन वास्तव में 'किंगमेकर' की भूमिका निभा पाता है या नहीं. फिलहाल, इतना तय है कि बंगाल की राजनीति अब एक नए मोड़ पर खड़ी है.
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