रात के समय बच्चे को सोने में होती है परेशानी, आयुर्वेद में बताए गए हैं आसान तरीके
नई दिल्ली, 1 अप्रैल (आईएएनएस)। कई बार छोटे उम्र के बच्चे पूरा दिन अच्छे से खेलते और खाते हैं लेकिन रात को सोते समय बार-बार डरकर उठ जाते हैं या फिर बेचैनी की वजह से नींद में बाधा बनी रहती है।
ऐसे में पूरी रात बच्चा चिड़चिड़ा महसूस करता है और नींद भी पूरी नहीं होती।
आयुर्वेद में इस परेशानी को तंत्रिका तंत्र और स्नायु से जोड़कर देखा गया है और इसके बारे में गहराई से बताया गया है। अगर बच्चे को रात के समय नींद में किसी तरह की परेशानी होती है तो आयुर्वेद में बच्चे को थोड़े से घी में गुड़ मिलाकर चटाने की सलाद दी जाती है। यह काम रात को सोते समय ही करना चाहिए। ऐसा करने से बच्चा गहरी नींद में सोता है और बार-बार नींद टूटने की परेशानी भी नहीं होती है। आयुर्वेद में घी को मन और स्नायु को शांत करने वाला माना गया है जबकि थोड़ा सा गुड़ शरीर को हल्की ऊर्जा और स्थिरता देने में सहायक माना जाता है।
रात के समय शरीर में वात भी अधिक बनता है, ऐसे में बच्चे की नींद प्रभावित होती है। घी वात को संतुलित रखने में मदद करता है और गहरी नींद लाने में सहायक है। इसके साथ ही घी तंत्रिका तंत्र को भी शांत करता है, जिससे शरीर रिलैक्स महसूस करता है और नींद लाने वाले हॉर्मोन भी अच्छे से बनते हैं। इसके अलावा, बच्चे की दिनचर्या में और बदलाव लाने की जरूरत है।
अगर बच्चा मोबाइल अधिक देखता है तो रात को बच्चे का स्क्रीन टाइम कम करें। अत्याधिक मोबाइल देखने की वजह से मस्तिष्क को लगता है कि अभी नींद का समय नहीं हुआ है और वह एक्टिव मोड में रहता है। यही कारण है कि मस्तिष्क कार्य करने की स्थिति में रहता है। इसलिए रात के समय बच्चे को मोबाइल से दूर रखें और आस-पास के वातावरण को शांत रखने की कोशिश करें।
अगर बच्चा रात के समय ज्यादा डरता है और इस आयुर्वेदिक नुस्खे से भी आराम नहीं मिल पाता है तो तुरंत बाल विशेषज्ञ की सलाह लें। कई बार बच्चे अन्य परेशानियों की वजह से भी नहीं सो पाते हैं।
--आईएएनएस
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UP में LPG माफिया पर बड़ा Action, छापेमारी के बाद 70 FIR और 10 अरेस्ट
उत्तर प्रदेश में पेट्रोल, डीजल और रसोई गैस की कालाबाजारी करने वालों के खिलाफ सरकार ने बड़ा अभियान छेड़ दिया है. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के सख्त निर्देशों के बाद प्रवर्तन एजेंसियां पूरी तरह एक्शन मोड में हैं. राज्यभर में ताबड़तोड़ छापेमारी की जा रही है और अवैध गतिविधियों में शामिल लोगों पर कड़ी कार्रवाई हो रही है.
छापेमारी और कार्रवाई का बड़ा आंकड़ा
12 मार्च से शुरू हुए इस अभियान के तहत अब तक 4816 से अधिक जगहों पर निरीक्षण और छापेमारी की जा चुकी है. इस दौरान एलपीजी वितरकों के खिलाफ 10 एफआईआर दर्ज हुई हैं, जबकि अन्य कालाबाजारियों के खिलाफ 60 मामले दर्ज किए गए हैं. कार्रवाई के दौरान 10 आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया है, वहीं 67 लोगों पर कानूनी शिकंजा कसा गया है. यह आंकड़े दिखाते हैं कि सरकार इस मुद्दे को लेकर कितनी गंभीर है.
एलपीजी वितरण पर विशेष निगरानी
सरकार का मुख्य उद्देश्य उपभोक्ताओं को समय पर गैस सिलेंडर उपलब्ध कराना है. इसके लिए प्रदेश के 4108 एलपीजी वितरकों पर कड़ी नजर रखी जा रही है. यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि उपभोक्ताओं को बुकिंग के अनुसार होम डिलीवरी मिले और किसी भी तरह की स्टॉक की कमी न हो. साथ ही, कमर्शियल सिलेंडरों के 20% आवंटन नियम को भी सख्ती से लागू किया जा रहा है.
कंट्रोल रूम से 24 घंटे निगरानी
प्रणाली को पारदर्शी बनाने के लिए खाद्य विभाग ने 24 घंटे सक्रिय कंट्रोल रूम स्थापित किया है. यहां तैनात अधिकारी पेट्रोलियम उत्पादों से जुड़ी शिकायतों का तुरंत समाधान कर रहे हैं. जिला स्तर पर भी कंट्रोल रूम बनाए गए हैं, जहां जिलापूर्ति अधिकारी और स्थानीय प्रशासन फील्ड में उतरकर स्थिति की निगरानी कर रहे हैं.
उपभोक्ताओं को राहत, माफियाओं में डर
इस सख्त कार्रवाई से जहां आम उपभोक्ताओं को राहत मिलने की उम्मीद है, वहीं कालाबाजारी करने वालों में डर का माहौल बन गया है. सरकार का स्पष्ट संदेश है कि आवश्यक वस्तुओं की कालाबाजारी किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं की जाएगी. आने वाले दिनों में भी यह अभियान जारी रहेगा, जिससे बाजार में पारदर्शिता और आपूर्ति की स्थिरता बनी रहे.
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