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भारत के लिए बड़ी खुशखबरी, 7 साल बाद आ रहा सबसे सस्ता तेल

मिडिल-ईस्ट में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और कच्चे तेल की अंतरराष्ट्रीय कीमतों में लगातार उछाल के बीच भारत के लिए एक सकारात्मक खबर सामने आई है. जी हां भारत के लोगों के लिए बहुत ही सस्ता तेल आ रहा है.  खास बात यह है कि करीब सात वर्षों के अंतराल के बाद ईरान से भारत के लिए कच्चे तेल की पहली खेप भारत पहुंचने वाली है. ये तेल की खेप काफी सस्ती बताई जा रही है. जानकारी के मुताबिक यह खेप 4 अप्रैल को गुजरात के वाडिनार पोर्ट पर पहुंचेगी, जिससे भारतीय ऊर्जा बाजार को राहत मिलने की उम्मीद है.

7 साल बाद ईरानी तेल की वापसी

मई 2019 के बाद यह पहला मौका है जब ईरान से कच्चा तेल भारत आ रहा है. उस समय अमेरिकी प्रतिबंधों के कारण भारत समेत कई देशों को ईरान से तेल आयात बंद करना पड़ा था. अब अमेरिका की ओर से दी गई 30 दिन की अस्थायी छूट के चलते यह डील संभव हो पाई है. यह छूट खासतौर पर उन खेपों के लिए है, जो पहले से समुद्र में मौजूद हैं.

पिंग शुन टैंकर: सस्ती ऊर्जा का स्रोत

शिप ट्रैकिंग के अनुसार, 'पिंग शुन' नाम का एक अफ्रामैक्स टैंकर ईरान के खार्ग आइलैंड से करीब 6 लाख बैरल (लगभग 9.5 करोड़ लीटर) कच्चा तेल लेकर भारत की ओर बढ़ रहा है. मार्च की शुरुआत में लोडिंग के बाद यह टैंकर लगभग एक महीने की यात्रा पूरी कर वाडिनार पहुंचेगा. यह तेल अंतरराष्ट्रीय बाजार में अपेक्षाकृत सस्ता माना जाता है, जिससे भारतीय रिफाइनरियों को लागत कम करने में मदद मिलेगी.

कौन खरीदेगा यह तेल?

इस खेप को लेकर सबसे बड़ा सवाल यह है कि इसे खरीदेगा कौन। वाडिनार में स्थित नायरा एनर्जी की रिफाइनरी इस समय मेंटेनेंस के दौर से गुजर सकती है. ऐसे में संभावना है कि सरकारी कंपनियां जैसे इंडियन ऑयल या भारत पेट्रोलियम इस तेल को खरीदें. इन कंपनियों के लिए सस्ता ईरानी तेल एक लाभदायक विकल्प साबित हो सकता है.

ईरानी तेल क्यों है खास?

ईरानी कच्चा तेल भारतीय रिफाइनरियों के लिए तकनीकी रूप से अनुकूल माना जाता है. साथ ही इसकी व्यापारिक शर्तें भी पहले काफी लचीली रही हैं. 2019 से पहले भारत के कुल तेल आयात में ईरान की हिस्सेदारी करीब 11.5% तक पहुंच गई थी. यही कारण है कि इसकी वापसी भारत के लिए रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण मानी जा रही है.

ऊर्जा सुरक्षा की नई रणनीति

भारत ने हाल के वर्षों में अपने तेल आयात स्रोतों में विविधता लाई है. रूस से रिकॉर्ड स्तर पर खरीद और वेनेजुएला से आयात की पुनः शुरुआत इसी रणनीति का हिस्सा है. अब ईरान की संभावित वापसी भारत की ऊर्जा सुरक्षा को और मजबूत कर सकती है.

भुगतान प्रणाली: सबसे बड़ी चुनौती

हालांकि एक बड़ी समस्या अभी भी बनी हुई है भुगतान की व्यवस्था. ईरान अंतरराष्ट्रीय स्विफ्ट बैंकिंग सिस्टम से बाहर है, जिससे सीधे भुगतान करना मुश्किल होता है. पहले तीसरे देश के जरिए यूरो में भुगतान किया जाता था, लेकिन अब वह रास्ता भी लगभग बंद हो चुका है.

नई शुरुआत का संकेत

4 अप्रैल को वाडिनार पहुंचने वाला यह टैंकर केवल एक तेल खेप नहीं, बल्कि भारत-ईरान ऊर्जा संबंधों के पुनर्जीवन का संकेत है. यदि हालात अनुकूल रहते हैं, तो आने वाले समय में भारत ईरान से बड़े पैमाने पर तेल आयात फिर शुरू कर सकता है, जिससे देश की अर्थव्यवस्था को बड़ा लाभ मिल सकता है.

यह भी पढ़ें - ईरान में IRGC बना सेंटर पॉवर, राष्ट्रपति पेजेशकियान के फैसलों पर रोक, युद्ध खत्म करने के लिए अब ट्रंप के सामने बड़ी चुनौती

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अदाणी एयरपोर्ट और ब्लिंकिट ने मुंबई एयरपोर्ट पर शुरू की भारत की पहली इन-टर्मिनल क्विक कॉमर्स सर्विस

अहमदाबाद, 1 अप्रैल (आईएएनएस)। अदाणी एयरपोर्ट होल्डिंग्स लिमिटेड (एएएचएल) ने बुधवार को क्विक कॉमर्स कंपनी ब्लिंकिट के साथ साझेदारी का ऐलान किया। इसके तहत मुंबई एयरपोर्ट पर यात्रियों को टर्मिनल पर ही जरूरी चीजें कुछ मिनट्स में मिल पाएंगी।

यह सर्विस फिलहाल मुंबई के छत्रपति शिवाजी महाराज अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के टर्मिनल 2 पर घरेलू उड़ानों के लिए उपलब्ध है, जिसका उद्देश्य यात्रियों के लिए यात्रा को और अधिक सुविधाजनक बनाना है।

इस नई सुविधा के साथ, यात्री अब ब्लिंकिट ऐप के माध्यम से चार्जर, स्नैक्स, किताबें और व्यक्तिगत देखभाल उत्पादों जैसी आवश्यक वस्तुएं ऑर्डर कर सकते हैं और उन्हें कुछ ही मिनटों में हवाई अड्डे के अंदर डिलीवर प्राप्त कर सकते हैं।

बोर्डिंग गेट, लाउंज, फूड कोर्ट और चुनिंदा पार्टनर आउटलेट्स पर डिलीवरी प्राप्त की जा सकती है।

यह सेवा प्रशिक्षित ऑन-ग्राउंड स्टाफ द्वारा संचालित की जा रही है ताकि एयरपोर्ट संचालन या यात्रियों के समय को प्रभावित किए बिना सुचारू और सुरक्षित डिलीवरी सुनिश्चित की जा सके।

सुरक्षा नियमों को ध्यान में रखते हुए, पैक्ड पानी, जूस और कोल्ड ड्रिंक्स जैसे तरल पदार्थ भी टर्मिनल के स्वीकृत स्टॉक के माध्यम से उपलब्ध कराए जा रहे हैं।

एएएचएल के प्रवक्ता ने कहा कि इस पहल का उद्देश्य टर्मिनल में डिजिटल सुविधा लाकर समग्र हवाई अड्डे के अनुभव को बेहतर बनाना है।

एएएचएल के प्रवक्ता ने कहा,“टर्मिनल में ऐप-आधारित सुविधा लाने से यात्री अपने समय का बेहतर उपयोग कर सकेंगे और सेवा स्तर में सुधार होगा। यह अधिक प्रतिक्रियाशील और यात्री-केंद्रित हवाई अड्डों के निर्माण की दिशा में एक कदम है।”

ब्लिंकिट के लिए, यह साझेदारी एक नया क्षेत्र खोलती है जहां मांग अधिक है और समय सीमित है, जिससे प्लेटफॉर्म को अपनी पहुंच बढ़ाने और अधिक उपयोगकर्ताओं को आकर्षित करने का अवसर मिलता है।

एएएचएल के लिए, यह यात्रियों के आराम को बढ़ाने के साथ-साथ डिजिटल रिटेल के माध्यम से गैर-विमानन राजस्व को भी बढ़ावा देता है।

यह सेवा हवाईअड्डों पर खरीदारी को एक नए स्तर पर सुलभ और किफायती बनाती है, जिससे यात्रियों को समय और स्थान की सामान्य बाधाओं के बिना अधिक विकल्प मिलते हैं।

टर्मिनल 2 पर भारी यात्री यातायात को देखते हुए, यह सेवा उन यात्रियों की आम समस्या को दूर करने की उम्मीद है जो अकसर आवश्यक सामान भूल जाते हैं या बोर्डिंग से पहले खरीदारी करने के लिए उनके पास पर्याप्त समय नहीं होता है।

यह पहल हवाईअड्डों के भीतर तेज और अधिक सुलभ सेवाएं प्रदान करने के लिए यात्रा में प्रौद्योगिकी के एकीकरण की बढ़ती प्रवृत्ति को दर्शाती है।

--आईएएनएस

एबीएस/

डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.

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  Sports

IPL बोरिंग और मनीलेस है.., आईपीएल छोड़ PSL में खेलना, Adam Zampa ने जाहिर की अपनी हताशा

कई समय तक आईपीएल में खेलने वाले ऑस्ट्रेलियाई स्पिनर एडम जैम्पा को अब आईपीएल बोरिंग और मनीलेस लगने लगा है। पाकिस्तान सुपर लीग को आईपीएल से बेहतर बता दिया। पाकिस्तान ने अब बेशर्मी की सारे हदें पार कर दी हैं। जलन के मारे पाकिस्तान अब अपनी लीग के प्रमोशन के लिए नए हथकंडे अपना रहा है। इसी प्रोपेगेंडा के तहत पाकिस्तान ने एडम जैम्पा से बेतुका बयान दिलाया है। जैम्पा ने एक के हवाले से बयान दिलवाया है कि भारत में प्रतिभा के अनुसार पैसे नहीं मिलते हैं। 

दरअसल, पीएसएल आजकल किसी ना किसी कारण चर्चा में है। पहले विदेशी खिलाड़ियों ने निजी कारणों से लीग में खेलने से मना कर दिया। फिर कुछ विदेशी खिलाड़ी जो वहां पहुंचे थे उन्होंने बीच में ही टूर्नामेंट छोड़ दिया और आईपीएल से जुड़ गए। इसके साथ ही कमेंटेटर निक नाइट भी आईपीएळ कॉन्ट्रैक्ट मिलने के बाद पीएसएल से किनारा कर बैठे। 

इस साल पीएसएल बंद दरवाजों के पीछे खेला जा रहा है। ऐसे में लीग को फायदे से ज्यादा नुकसान हो रहा है। तमात विवादों के बाद पाकिस्तान ने अपनी लीग को बढ़ावा देने के लिए नया प्रोपेगेंडा अपनाया और आईपीएल को नीचा दिखाने की कोशिश की। हालांकि, अब वह इसमें भी कामयाब नहीं हो पाए हैं। 

एडम जैम्पा ने जो बयान दिया है उससे वह खुद ही विवादों में आ गए हैं। जैम्पा ने पाकिस्तानी न्यूज चैनल एआरवाई के पॉडकास्ट में कहा कि, मैंने इस साल आईपीएल से नाम वापस ले लिया। सच कहूं तो मेरी स्किल सेट वाले खिलाड़ी को वहां उतनी रकम नहीं मिलती, जितनी कुछ अन्य तरह के खिलाड़ियों को मिलती है। आईपीएल जितना समय लेता है उसे देखते हुए मेरे लिए इसे खेलना कोई समझदारी भरा फैसला नहीं लगा। जैम्पा इस बयान के बाद फंस गए हैं। 

पिछले साल सनराइजर्स हैदराबाद द्वारा रिलीज किए जाने के बाद जैम्पा ने आईपीएल के रजिस्टर नहीं करवाया। उन्होंने पीएसएल के लिए अपना नाम दिया था। उन्हें कराची किंग्स ने उनके बेस प्राइस 4.5 करोड़ पाकिस्तानी रुपये में साइन किया था। 4.5 करोड़ पाकिस्तानी रुपये यानी 1.51 करोड़ भारतीय रुपये। 
Wed, 01 Apr 2026 16:31:54 +0530

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