थकान को कहें अलविदा! बीटरूट जूस से पाएं दिनभर ताजगी और नेचुरल ग्लो
नई दिल्ली, 1 अप्रैल (आईएएनएस)। आजकल हम अपनी लाइफस्टाइल में इतने बिजी हो गए हैं कि अक्सर हमारी एनर्जी लेवल कम हो जाती है और स्किन भी थकी-थकी दिखने लगती है। ऐसे में रोजाना दिन की शुरुआत एक गिलास चुकंदर (बीटरूट) जूस पीने के साथ करना काफी फायदेमंद हो सकता है।
बीटरूट जूस एक ऐसा सुपरफूड है जो आपको दिनभर एनर्जी देने के साथ ही नेचुरल ग्लो भी देता है। बीटरूट में मौजूद नैचुरल नाइट्रेट्स ब्लड सर्कुलेशन को बेहतर बनाते हैं, जिससे शरीर के हर सेल तक ऑक्सीजन और न्यूट्रिएंट्स आसानी से पहुंचते हैं। इससे आपका मस्तिष्क और शरीर पूरे दिन एनर्जेटिक रहते हैं।
यह सिर्फ एनर्जी ही नहीं बढ़ाता, बल्कि यह स्किन के लिए भी बेहद फायदेमंद है। इसके एंटीऑक्सिडेंट्स और विटामिन्स त्वचा को अंदर से साफ करते हैं और उसे नेचुरल ग्लो देते हैं। अगर आपकी स्किन डल और थकी-थकी लगती है, तो रोजाना बीटरूट जूस पीने से आप अंदर से डिटॉक्स हो जाएंगे और आपकी त्वचा में निखार आ जाएगा। आप चाहें तो इसमें थोड़ी गाजर और सेब भी मिला सकते हैं। गाजर में मौजूद बीटा-कैरोटीन स्किन को हेल्दी बनाए रखता है और सेब में फाइबर और विटामिन्स होते हैं जो शरीर को पूरी तरह पोषण देते हैं।
बीटरूट जूस दिल की सेहत के लिए भी बहुत अच्छा है। इसके नियमित सेवन से ब्लड प्रेशर कंट्रोल में रहता है और दिल को स्ट्रॉन्ग बनाए रखता है। इसके अलावा, यह जूस आपके लिवर को भी साफ करता है और शरीर में जमा टॉक्सिन्स को बाहर निकालता है। लिवर डिटॉक्स होने से शरीर की एनर्जी बढ़ती है और आप खुद को हल्का और ताजगी भरा महसूस करते हैं।
अगर आप चाहते हैं कि आपका दिन एनर्जेटिक और प्रोडक्टिव रहे, तो सुबह-सुबह एक गिलास बीटरूट जूस पीना बहुत फायदेमंद है। इसे किसी फ्रेश जूसर में बीटरूट, एक छोटा सा सेब और थोड़ी गाजर डालकर बना सकते हैं। स्वाद के लिए आप नींबू या थोड़ा अदरक भी डाल सकते हैं। ये छोटे-छोटे ट्विस्ट जूस को स्वादिष्ट बनाने के साथ-साथ उसके गुणों को भी बढ़ा देते हैं।
--आईएएनएस
पीआईएम/एएस
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ईरान में IRGC बना सेंटर पॉवर, राष्ट्रपति पेजेशकियान के फैसलों पर रोक, युद्ध खत्म करने के लिए अब ट्रंप के सामने बड़ी चुनौती
मिडिल ईस्ट में जारी जंग के बीच ईरान के अंदर सत्ता संघर्ष की खबरें काफी तेज हो चुकी हैं. देश की सियासत एक बड़े गतिरोध के मामले सामने आ रहे हैं. यहां पर राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान की भूमिका को पूरी तरह से सीमित कर दिया गया है. वहीं इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) का प्रभाव लगातार बढ़ गया है.
नामों को पूरी तरह से खारिज कर दिया
ईरानी मीडिया रिपोर्ट की मानें तो पेजेशकियान सरकार तरह से राजनीतिक रूप से पंगु हो चुकी है. यहां पर सभी सरकारी फैसलों और नियुक्तियों को IRGC का दखल होने लगा है. इससे राष्ट्रपति के अधिकार लगभग बेअसर हो चुके हैं. हाल ही में खुफिया मंत्री की नियुक्ति को लेकर जब पेजेशकियान की ओर प्रस्तावित सभी नामों को पूरी तरह से खारिज कर दिया गया.
BREAKING ????
— FalconUpdatesHQ (@FalconUpdatesHQ) March 31, 2026
???????? Iran has not made a decision about entering negotiations.
???????? ???????? All fighting must stop before talks. US and Israel pressure won’t change this yet.
~ Iran’s FM Araghchi pic.twitter.com/0Zm1nYkWy9
अहम पदों पर नियुक्ति सिर्फ IRGC के पास
रिपोर्ट्स की मानें तो IRGC के शीर्ष कमांडर अहमद वहीदी ने स्पष्ट कर दिया है कि मौजूदा युद्ध जैसे हालात में संवेदनशील और अहम पदों पर नियुक्ति सिर्फ IRGC के पास ही है. यहीं कारण कि राष्ट्रपति की ओर से दिए गए सुझावों को खारिज कर दिया गया. उम्मीदवार का नाम आगे नहीं बढ़ाया गया. इसमें हुसैन देहगान का नाम था. आपको बता दें कि ईरान की राजनीतिक व्यवस्था में राष्ट्रपति ही खुफिया मंत्री के नाम को प्रस्तावित करते हैं. इसमें अंतिम मंजूरी सुप्रीम लीडर से मिलती है. बताया जा रहा है कि सुप्रीम लीडर मोजतबा खामेनेई के लिए कड़ा सुरक्षा घेरा बनाया गया है. उनके पास सरकार की ओर से भेजी रिपोर्ट्स नहीं पहुंच रही हैं. पेजेशकियान को भी उनसे मिलने की इजाजत नहीं मिल रही है.
ट्रंप के लिए बड़ी चुनौती
अब सवाल उठता है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप जिस तरह से युद्ध को खत्म करने की बात कर रहे हैं, क्या इससे IRGC सहमत होगा. क्योंकि ईरान का कंट्रोल IRGC के पास है और ऐसे में सेना ही तय करेगी कि युद्ध आगे कितने दिनों तक चलेगा. ट्रंप के लिए यह एक चुनौती की तरह क्योंकि अब सेना के हाथ में सत्ता की चाभी पहुंचने के बाद बातचीत और जटिल हो चुकी है. IRGC ने हाल ही में अमेरिका को धमकी दी कि थी कि अगर अमेरिका ने जमीनी हमला किया तो उसे बड़ा नुकसान झेलना पड़ेगा. उसे तगड़ा नुकसान होगा. ट्रंप लगातार यह कह रहे हैं कि युद्ध अब खत्म होने वाला है. मगर ईरान का सैन्य संगठन का समर्थन नहीं कर रहा है. उसे अपनी डिमांड सामने रखी है. वह चाहता है कि ईरान की शर्तों पर यह समझौता हो.
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