ईरान युद्ध भले ही भारत से बहुत दूर हो रहा हो लेकिन उसका असर अब यहां सबकी जेब पर तेजी से पड़ने लगा है। हम आपको बता दें कि वैश्विक तेल कीमतों में उछाल के कारण विमानन टरबाइन ईंधन (एटीएफ) की कीमत में आज भारी वृद्धि की गयी है इसके साथ ही व्यावसायिक सिलेंडर की कीमत में भी एक बार फिर इजाफा कर दिया गया है। हम आपको याद दिला दें कि विमानन ईंधन की कीमतें दो दशक पहले नियंत्रण मुक्त कर दी गई थीं और तब से इन्हें अंतरराष्ट्रीय मानक कीमतों के अनुरूप तय किया जाता है। वैसे यह पहला मौका है जब एटीएफ की कीमत दो लाख रुपये प्रति किलोलीटर के स्तर को पार कर गई है।
हम आपको बता दें कि ईंधन की कीमतों में यह उछाल विमानन कंपनियों पर अतिरिक्त दबाव डालेगा क्योंकि कुल परिचालन लागत में ईंधन की हिस्सेदारी करीब 40 प्रतिशत रहती है। साथ ही पश्चिम एशिया में युद्ध के कारण कई हवाई मार्ग बंद होने से विमानों को लंबे रास्तों से उड़ान भरनी पड़ रही है जिससे ईंधन की खपत भी बढ़ रही है। इसी के साथ 19 किलोग्राम वाले वाणिज्यिक सिलेंडर (होटल-रेस्तरां में इस्तेमाल होने वाला) की कीमत भी 195.50 रुपये बढ़ा दी गई है। दिल्ली में अब इसकी कीमत 2,078.50 रुपये हो गई है।
देखा जाये तो पश्चिम एशिया में भड़कती जंग, हार्मुज जलडमरूमध्य का बंद होना और वैश्विक तेल आपूर्ति में भारी उथल पुथल ने देश की अर्थव्यवस्था पर सीधा वार किया है। केंद्र सरकार ने हालात की गंभीरता को देखते हुए हवाई ईंधन यानी एटीएफ की कीमतों में संभावित भारी बढ़ोतरी पर लगाम लगाने की कोशिश जरूर की है, लेकिन इसके बावजूद संकट की आंच अब हर क्षेत्र तक पहुंचती दिख रही है।
इस बीच, केंद्र सरकार ने साफ किया है कि अंतरराष्ट्रीय हालात के चलते एटीएफ की कीमतों में एक अप्रैल को सौ प्रतिशत से ज्यादा की बढ़ोतरी हो सकती थी। लेकिन घरेलू यात्रियों को राहत देने के लिए इस बढ़ोतरी को केवल पच्चीस प्रतिशत तक सीमित रखा गया। यानी लगभग पंद्रह रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी कर इसे चरणबद्ध तरीके से लागू किया गया। यह फैसला विमानन क्षेत्र के लिए किसी राहत से कम नहीं है, क्योंकि अगर पूरी बढ़ोतरी लागू होती तो हवाई किराए आसमान छू लेते और यात्रियों की जेब पर सीधा हमला होता।
दिल्ली में अब एटीएफ की कीमत एक लाख चार हजार नौ सौ सत्ताईस रुपये प्रति किलोलीटर पहुंच गई है, जो पिछले महीने के मुकाबले करीब 8.5 प्रतिशत ज्यादा है। देश के अन्य बड़े हवाई अड्डों पर भी इसी तरह की बढ़ोतरी देखी गई है। लेकिन असली झटका गैर-अनुसूचित और चार्टर उड़ानों को लगा है, जहां एटीएफ की कीमतें एक सौ पंद्रह प्रतिशत तक उछल गई हैं। यानी इस क्षेत्र के लिए यह सीधा आर्थिक संकट बन गया है।
उधर, रसोई गैस के मोर्चे पर भी हालात कम विस्फोटक नहीं हैं। 19 किलो वाले व्यावसायिक सिलेंडर की कीमतों में दो सौ रुपये तक की बढ़ोतरी ने होटल, रेस्टोरेंट और छोटे कारोबारियों की कमर तोड़ दी है। दिल्ली में अब यह सिलेंडर 2078 रुपये से ऊपर पहुंच चुका है, जबकि कोलकाता और चेन्नई में कीमतें और भी ज्यादा हैं। पांच किलो वाले छोटे सिलेंडर की कीमत भी 51 रुपये बढ़ा दी गई है।
हालांकि, सरकार ने घरेलू उपभोक्ताओं को फिलहाल राहत दी है। 14.2 किलो वाले घरेलू गैस सिलेंडर की कीमत दिल्ली में 913 रुपये पर स्थिर रखी गई है। लेकिन यह राहत कितने समय तक टिकेगी, यह बड़ा सवाल है। क्योंकि अंतरराष्ट्रीय बाजार में जारी अस्थिरता का असर कभी भी सीधे आम आदमी की रसोई तक पहुंच सकता है।
दिलचस्प बात यह है कि पेट्रोल और डीजल की कीमतें अभी भी स्थिर बनी हुई हैं। दिल्ली में पेट्रोल 94 रुपये 72 पैसे और डीजल 87 रुपये 62 पैसे प्रति लीटर पर टिका हुआ है। पिछले साल मार्च में दो रुपये की कटौती के बाद से इनकी कीमतों में कोई बदलाव नहीं हुआ है। लेकिन विशेषज्ञ मानते हैं कि अगर वैश्विक हालात ऐसे ही बने रहे तो इस स्थिरता का टूटना तय है। यह पूरा घटनाक्रम साफ संकेत देता है कि भारत की ऊर्जा सुरक्षा अभी भी वैश्विक संकटों के सामने कमजोर है। सरकार ने फिलहाल हालात संभालने की कोशिश जरूर की है, लेकिन असली चुनौती आगे है। अगर पश्चिम एशिया में तनाव और बढ़ता है, तो इसका सीधा असर हवाई यात्रा से लेकर रसोई गैस और रोजमर्रा की जिंदगी तक हर जगह दिखेगा।
अब सवाल यह है कि क्या सरकार लंबी अवधि के लिए कोई ठोस रणनीति बनाएगी या फिर हर बार ऐसे संकटों के समय केवल अस्थायी राहत देकर हालात को संभालने की कोशिश करती रहेगी। क्योंकि ऊर्जा की कीमतों का यह तूफान अगर नहीं थमा, तो इसका असर केवल जेब तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पूरी अर्थव्यवस्था को हिला कर रख देगा।
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बिहार पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी के खिलाफ भ्रष्टाचार के मामले में बड़ी कार्रवाई करते हुए आर्थिक अपराध इकाई (EOU) ने मंगलवार को हड़कंप मचा दिया। किशनगंज के सब-डिविजनल पुलिस ऑफिसर (SDPO) गौतम कुमार के आधा दर्जन ठिकानों पर एक साथ छापेमारी की गई, जिसमें आय से अधिक संपत्ति का विशाल जखीरा बरामद हुआ है। टीमों ने SDPO से जुड़े लगभग आधा दर्जन ठिकानों पर तलाशी अभियान चलाया, जिसमें बेनामी संपत्ति का विशाल जखीरा सामने आया। इस संपत्ति में जमीन के टुकड़े, लग्जरी गाड़ियां और निवेश से जुड़े दस्तावेज शामिल हैं।
सूत्रों ने बताया कि जांचकर्ताओं को सिलीगुड़ी में एक चाय का बागान, नोएडा और गुरुग्राम में फ्लैट, और 25 से अधिक जमीन के प्लॉट मिले हैं। अधिकारियों ने उनकी पत्नी और एक महिला मित्र के नाम पर रजिस्टर्ड गहने, कारें और संपत्ति के कागजात भी जब्त किए हैं। ये छापे तब मारे गए जब अधिकारियों ने 1.94 करोड़ रुपये से अधिक की ऐसी संपत्ति का पता लगाया जो उनकी ज्ञात आय के अनुपात में कहीं अधिक थी। इसके बाद पटना में एक मामला दर्ज किया गया और तलाशी के लिए अदालत से आदेश प्राप्त किए गए।
छापों में क्या-क्या मिला?
अधिकारियों ने पाया कि गौतम कुमार ने कथित तौर पर न केवल अपने नाम पर, बल्कि अपने सहयोगियों के माध्यम से भी संपत्तियां जमा की थीं। प्रारंभिक जांच में कम से कम 25 जमीन के प्लॉटों का पता चला, जिनमें से कई उनकी पत्नी पूनम देवी और उनकी महिला सहयोगी शगुफ्ता शमीम के नाम पर रजिस्टर्ड थे। अकेले शगुफ्ता शमीम के आवास से ही जमीन से जुड़े सात दस्तावेज बरामद किए गए, जिनकी कीमत लगभग 60 लाख रुपये आंकी गई है।
पूर्णिया में 3,600 वर्ग फुट में फैला एक चार मंजिला मकान, जिसकी अनुमानित कीमत लगभग 2.5 करोड़ रुपये है, बरामद की गई प्रमुख संपत्तियों में से एक था। लग्जरी घड़ियां और Creta तथा Thar जैसी महंगी गाड़ियां भी जब्त की गईं। तलाशी के दौरान पटना में एक नर्सिंग होम स्थापित करने से जुड़े दस्तावेज भी मिले।
अधिकारियों ने बताया कि उन्होंने सिलीगुड़ी में एक चाय के बागान में निवेश किया था और नोएडा तथा गुरुग्राम में संपत्तियां खरीदी थीं। विभिन्न स्थानों से बीमा निवेश से जुड़े कागजात और कई अन्य वित्तीय दस्तावेज भी बरामद किए गए।
किशनगंज स्थित उनके सरकारी आवास से टीमों ने 1.37 लाख रुपये नकद जब्त किए। यह छापा लगभग आठ घंटे तक चला और अधिकारियों ने उनका मोबाइल फोन भी जब्त कर लिया, जिससे जांच में और भी महत्वपूर्ण सुराग मिलने की उम्मीद है।
स्थानीय अधिकारियों में हड़कंप
इस कार्रवाई के बाद किशनगंज में सरकारी कर्मचारियों के बीच बेचैनी और घबराहट का माहौल बन गया। पूरे दिन कई अधिकारी SDPO के आवास के पास से गुज़रते देखे गए, जो वहाँ हो रही घटनाओं के बारे में ताज़ा जानकारी जुटाने की कोशिश कर रहे थे।
SDPO गौतम कुमार का किशनगंज से लंबा जुड़ाव
यह बात ध्यान देने लायक है कि गौतम कुमार कई सालों से किशनगंज से जुड़े रहे हैं। उन्होंने 1994 बैच में सब-इंस्पेक्टर के तौर पर बिहार पुलिस में शामिल हुए थे। 1996 में एक ट्रेनी अधिकारी के रूप में उनकी पहली पोस्टिंग किशनगंज में हुई थी, जहाँ उन्होंने अपना प्रोबेशन भी पूरा किया। दूसरे ज़िलों में सेवा देने के बाद, वे 2012-13 में एक मोबाइल पुलिस अधिकारी के तौर पर किशनगंज लौटे। बाद में वे इंस्पेक्टर और फिर DSP के पद तक पहुँचे। 2023 में, उन्होंने एक बार फिर ज़िले के SDPO का कार्यभार संभाला। उनकी सेवा का एक बड़ा हिस्सा सीमांचल क्षेत्र में बीता है, जिसमें किशनगंज, अररिया, पूर्णिया और कटिहार शामिल हैं।
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