Global Internet Outage: क्या ठप हो जाएगा दुनियाभर में इंटरनेट? समुद्र के नीचे बिछी केबल्स पर मंडराया युद्ध का साया
Middle East Conflict: होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण व्यापारिक रास्तों में से एक है, लेकिन इसकी महत्ता केवल तेल और गैस तक सीमित नहीं है। समुद्र के इसी संकरे रास्ते के नीचे से 'अंडरसी फाइबर ऑप्टिक केबल्स' का एक विशाल जाल गुजरता है, जो एशिया को यूरोप और अमेरिका से जोड़ता है।
अमेरिका और ईरान के बीच जारी युद्ध मे यह अंदेशा जताया जा रहा है कि रणनीतिक बढ़त हासिल करने के लिए इन केबल्स को निशाना बनाया जा सकता है।
यदि ये केबल्स क्षतिग्रस्त होती हैं, तो डेटा ट्रांसफर की गति धीमी हो जाएगी या पूरी तरह रुक जाएगी, जिससे ग्लोबल इंटरनेट ब्लैकआउट की स्थिति पैदा हो सकती है।
भारत पर क्या होगा असर? ठप हो सकते हैं बैंकिंग और IT सेक्टर
भारत के लिए यह खतरा और भी बड़ा है क्योंकि भारत का अधिकांश इंटरनेट ट्रैफिक इन्हीं समुद्री केबल्स के जरिए आता है। यदि होर्मुज में केबल्स कटती हैं, तो भारत के बैंकिंग सिस्टम, स्टॉक मार्केट, ई-कॉमर्स और आईटी (IT) सेक्टर को भारी नुकसान हो सकता है।
डिजिटल इंडिया के इस दौर में इंटरनेट का बंद होना न केवल आम जनजीवन को प्रभावित करेगा, बल्कि देश की अर्थव्यवस्था को भी अरबों डॉलर का चूना लगा सकता है।
विशेषज्ञों के अनुसार, भारत में अंतरराष्ट्रीय कॉलिंग और ऑनलाइन पेमेंट गेटवे पूरी तरह बाधित हो सकते हैं, जिससे अफरा-तफरी की स्थिति पैदा होने की आशंका है।
युद्ध की रणनीति में 'डिजिटल स्ट्राइक' का डर
युद्ध के जानकारों का मानना है कि आधुनिक युद्ध में दुश्मन को कमजोर करने के लिए उसके संचार तंत्र पर हमला करना एक आम रणनीति है। ईरान या अमेरिका, दोनों में से कोई भी पक्ष संचार के इन साधनों को बाधित कर दूसरे पर दबाव बना सकता है।
पहले भी रेड सी और अन्य युद्ध क्षेत्रों में अंडरसी केबल्स के कटने की घटनाएं हो चुकी हैं, लेकिन होर्मुज की भौगोलिक स्थिति इसे और भी संवेदनशील बनाती है। यहाँ केबल्स को जानबूझकर काटने या एंकरिंग और मिसाइल हमलों के दौरान दुर्घटनावश नुकसान पहुँचने की संभावना बहुत अधिक है।
इस समस्या से कैसे निपट सकता है भारत?
भारत इस संभावित संकट से निपटने के लिए कई मोर्चों पर काम कर सकता है। सबसे पहला विकल्प सैटेलाइट इंटरनेट का विस्तार है। एलन मस्क की 'स्टारलिंक' या एयरटेल की 'वनवेब' जैसी सेवाएं केबल कटने की स्थिति में बैकअप का काम कर सकती हैं।
दूसरा उपाय वैकल्पिक समुद्री रास्तों जैसे वियतनाम या थाईलैंड के जरिए प्रशांत महासागर वाले रूट का उपयोग करना है। हालांकि, ये विकल्प महंगे और सीमित क्षमता वाले हो सकते हैं। भारत सरकार ने पहले ही डेटा लोकलाइजेशन पर जोर दिया है ताकि देश का आंतरिक डेटा सुरक्षित रहे।
फिलहाल, प्रशासन और टेक कंपनियां अलर्ट पर हैं और किसी भी आपात स्थिति के लिए 'डिजास्टर रिकवरी' प्लान तैयार किया जा रहा है।
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