आंध्र प्रदेश में डिजिटल हेल्थ रिकॉर्ड परियोजना 'संजीवनी' का कार्यान्वयन
अमरावती, 31 मार्च (आईएएनएस)। आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू ने मंगलवार को डिजिटल हेल्थ रिकॉर्ड बनाने वाली संजीवनी परियोजना को जुलाई तक पूरे राज्य में विस्तारित करने का निर्देश दिया।
यह परियोजना वर्तमान में चित्तूर जिले के कुप्पम और नरवरिपल्ली में कार्यान्वित की जा रही है।
मुख्यमंत्री ने अपने कैंप कार्यालय में संजीवनी परियोजना के संबंध में एक समीक्षा बैठक की।
उन्होंने अधिकारियों को अगले वर्ष के भीतर राज्य भर में 56.40 लाख लोगों की चिकित्सा जांच कराने का लक्ष्य दिया। उन्होंने यह भी निर्देश दिया कि इन जांचों के परिणाम 48 घंटों के भीतर व्हाट्सएप के माध्यम से सीधे संबंधित व्यक्तियों तक पहुंचाए जाएं।
जब अधिकारियों ने बताया कि इस पहल के लिए 904 मोबाइल मेडिकल यूनिट की आवश्यकता होगी और इस पर 162 करोड़ रुपए का खर्च आएगा, तो मुख्यमंत्री ने अपनी स्वीकृति दे दी।
अधिकारियों ने बताया कि अब तक राज्य में 3.14 लाख लोगों ने संजीवनी डिजिटल नर्व सेंटर के डेटाबेस में पंजीकरण कराया है।
इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने व्यक्तिगत स्वास्थ्य अभिलेखों को नियमित रूप से अपडेट करने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि सेवाएं इस प्रकार प्रदान की जानी चाहिए जिससे भविष्य में चिकित्सा खर्चों में कमी आए और निवारक स्वास्थ्य देखभाल पर विशेष ध्यान देने का आग्रह किया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि योग, पोषण, ध्यान और प्राणायाम का सख्ती से पालन करने से कई स्वास्थ्य समस्याओं का समाधान हो सकता है। उन्होंने चित्तूर जिले में सार्वजनिक स्वास्थ्य में हुए सुधार का आकलन करने का सुझाव दिया, जहां संजीवनी परियोजना वर्तमान में कार्यान्वित की जा रही है।
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को पांच प्रमुख स्तंभों—मातृत्व (मातृत्व देखभाल), शक्ति (सशक्तिकरण), नैपुण्यम (कौशल विकास), क्षेमा (कल्याण), और संजीवनी (समग्र स्वास्थ्य)—पर आधारित आंध्र प्रदेश स्वास्थ्य प्रबंधन नीति तैयार करने और लागू करने का निर्देश दिया।
मुख्यमंत्री ने एनटीआर वैद्य सेवा ट्रस्ट के माध्यम से राज्य भर में लागू होने वाली सार्वभौमिक स्वास्थ्य नीति की समीक्षा भी की।
अधिकारियों ने उन्हें बताया कि कई बीमा कंपनियां इस पहल में भागीदार बनने के लिए आगे आ रही हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि जन स्वास्थ्य में सुधार के लिए सभी को सामूहिक रूप से जन आंदोलन की तरह प्रयास करना चाहिए। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिया कि अप्रैल से सांसद, विधायक, जिला कलेक्टर और चिकित्सा अधिकारी जनता तक सक्रिय रूप से पहुंचें।
--आईएएनएस
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लुधियाना में माचिस फैक्ट्री में भीषण धमाका, मलबे में दबने से एक युवक की मौत
पंजाब के लुधियाना जिले के पास जोधा गांव में मंगलवार की शाम एक बड़ा हादसा हो गया। यहाँ एक माचिस बनाने वाली फैक्ट्री में जबरदस्त धमाका हुआ, जिसके बाद पूरी की पूरी बिल्डिंग ताश के पत्तों की तरह ढह गई। यह धमाका इतना जोरदार था कि इसकी गूंज काफी दूर तक सुनी गई, जिससे आसपास के रहने वाले लोगों में दहशत फैल गई। जिस वक्त यह हादसा हुआ, उस समय फैक्ट्री परिसर के अंदर करीब 15 लोग मौजूद थे। इस दर्दनाक घटना में मलबे के नीचे दबने से एक 18 साल के नौजवान मजदूर की जान चली गई।
सिलेंडर फटने के बाद गिरा लेंटर
मृतक मजदूर के पिता ने बताया कि वह और उसका बेटा दोनों ही फैक्ट्री में काम कर रहे थे। शाम के वक्त अचानक तेज हवा चलने के कारण बिजली कट गई। इसके तुरंत बाद फैक्ट्री के अंदर आग लग गई और वहां रखा एक सिलेंडर जोरदार धमाके के साथ फट गया। सिलेंडर फटने के कारण पूरी बिल्डिंग का लेंटर नीचे आ गिरा और वहां मौजूद लोग मलबे में दब गए। हालांकि, अभी तक यह पूरी तरह साफ नहीं हो पाया है कि आग लगने की शुरुआती वजह शॉर्ट सर्किट थी या कुछ और, इसकी जांच की जा रही है।
एक ही परिवार पर टूटा दुखों का पहाड़
इस हादसे में 18 साल के मोहम्मद की मौत हो गई, जबकि उसकी 16 साल की छोटी बहन के सिर में गंभीर चोट आई है। मृतक के पिता ने रोते हुए बताया कि उनका परिवार पहली बार काम की तलाश में लुधियाना आया था, लेकिन उन्हें क्या पता था कि यहाँ इतना बड़ा हादसा हो जाएगा। घटना के वक्त फैक्ट्री का मालिक वहां मौजूद नहीं था। हादसे में कुल चार लोग घायल हुए हैं, जिन्हें इलाज के लिए लुधियाना के सिविल अस्पताल में भर्ती कराया गया है। बताया जा रहा है कि फैक्ट्री परिसर के अंदर ही दो-तीन मजदूर परिवार रह रहे थे।
रेस्क्यू ऑपरेशन में जुटे ग्रामीण और प्रशासन
धमाके की खबर मिलते ही फायर ब्रिगेड की गाड़ियां और एम्बुलेंस मौके पर पहुंच गईं। फायर ऑफिसर राजिंदर ने बताया कि उन्हें रात करीब 8:20 बजे जोधा गांव के सरकारी स्कूल के पास धमाके और बिल्डिंग गिरने की सूचना मिली थी। सूचना मिलते ही उनकी टीम और मुल्लांपुर से फायर ब्रिगेड की यूनिट मौके पर पहुंची। प्रशासन के पहुंचने से पहले ही गांव के लोग बचाव कार्य में जुट गए थे और मलबे में दबे लोगों को बाहर निकालने की कोशिश कर रहे थे।
अस्पताल में चल रहा घायलों का इलाज
मलबे से निकाले गए घायलों को तुरंत एम्बुलेंस के जरिए अस्पताल पहुंचाया गया। डॉक्टरों के मुताबिक, घायलों की हालत पर नजर रखी जा रही है। पुलिस ने इस मामले में जांच शुरू कर दी है कि फैक्ट्री के अंदर सुरक्षा मानकों का पालन किया जा रहा था या नहीं। माचिस जैसी ज्वलनशील चीज की फैक्ट्री में सिलेंडर और मजदूरों के रहने की व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। फिलहाल, इलाके में भारी पुलिस बल तैनात है और मलबे को हटाने का काम जारी है.
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