वित्त वर्ष 2024-25 में भारत बना नेपाल का सबसे बड़ा द्विपक्षीय दाता : रिपोर्ट
काठमांडू, 31 मार्च (आईएएनएस)। भारत वित्तीय वर्ष 2024-25 में नेपाल का सबसे बड़ा द्विपक्षीय दाता बनकर उभरा। सरकार की एक रिपोर्ट के अनुसार, भारत ने अपने दक्षिणी पड़ोसी देश को 107.8 मिलियन अमेरिकी डॉलर की सहायता प्रदान की।
देश के वित्त मंत्रालय की ओर से जारी डेवलपमेंट कोऑपरेशन रिपोर्ट 2024-25 के अनुसार, यूनाइटेड किंगडम 84.2 मिलियन डॉलर के साथ दूसरे स्थान पर रहा, जबकि यूएसएआईडी 67.1 मिलियन डॉलर के साथ तीसरे स्थान पर रहा।
जापान ने 58.3 मिलियन डॉलर और स्विट्जरलैंड ने 30.1 मिलियन डॉलर की सहायता प्रदान की, जिससे वे क्रमशः चौथे और पांचवें सबसे बड़े द्विपक्षीय दाता बने। वित्त मंत्रालय का वार्षिक प्रकाशन विदेशी विकास साझेदारों की ओर से प्रदान किए गए अनुदान, ऋण और तकनीकी सहायता का लेखा-जोखा रखता है।
रिपोर्ट के अनुसार, भारत की ओर से दी गई कुल सहायता में से 73.3 मिलियन डॉलर अनुदान के रूप में, 25.8 मिलियन डॉलर ऋण के रूप में और 8.8 मिलियन डॉलर तकनीकी सहायता के रूप में प्राप्त हुए।
विश्व बैंक और एशियाई विकास बैंक जैसे बहुपक्षीय दाता पारंपरिक रूप से नेपाल के सबसे बड़े सहयोगी रहे हैं।
रिपोर्ट के अनुसार, पिछले वित्तीय वर्ष में नेपाल को बहुपक्षीय और द्विपक्षीय दोनों स्रोतों से कुल 1.60 अरब डॉलर प्राप्त हुए।
सभी दाताओं (बहुपक्षीय और द्विपक्षीय) में भी भारत तीसरे स्थान पर रहा। विश्व बैंक 541.0 मिलियन डॉलर के साथ पहले स्थान पर, एशियाई विकास बैंक 443.2 मिलियन डॉलर के साथ दूसरे स्थान पर, और भारत 107.8 मिलियन डॉलर के साथ तीसरे स्थान पर रहा।
पिछले 10 वर्षों (वित्तीय वर्ष 2015-16 से) में भारत की विकास सहायता में उतार-चढ़ाव रहा है, लेकिन कुल मिलाकर इसमें बढ़ोतरी का रुझान देखा गया है।
वित्तीय वर्ष 2023-24 में भारत ने दशक का अपना सबसे अधिक वार्षिक वितरण 118.1 मिलियन डॉलर दर्ज किया। हालांकि, वित्तीय वर्ष 2024-25 के आंकड़ों में पिछले वर्ष की तुलना में 8.7 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई है।
--आईएएनएस
एवाई/एबीएम
डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.
दवा कंपनियों पर बेशर्मी से बमबारी कर रहे युद्ध अपराधियों को ईरानी सशस्त्र सेनाएं देंगी जवाब : अब्बास अराघची
नई दिल्ली, 31 मार्च (आईएएनएस)। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा कि युद्ध अपराधी अब इजरायल में दवा कंपनियों पर बमबारी कर रहे हैं। हमारी शक्तिशाली सशस्त्र सेनाएं इन हमलावरों को कड़ी सजा देंगी।
अब्बास अराघची ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पोस्ट में कहा, इजरायल में युद्ध अपराधी अब खुलेआम और बेशर्मी से दवा कंपनियों पर बमबारी कर रहे हैं। उनके इरादे साफ हैं, लेकिन वे एक बात नहीं समझ रहे हैं कि उनका सामना निहत्थे फिलिस्तीनी नागरिकों से नहीं है। हमारी शक्तिशाली सशस्त्र सेनाएं इन हमलावरों को कड़ी सजा देंगी।
इससे पहले ईरान के मशहद हवाई अड्डे पर उतरे एक विमान को भी अमेरिकी हमले में निशाना बनाया गया था। ईरान के नागरिक उड्डयन संगठन ने चिकित्सा उपकरण और दवा ले जा रहे विमान पर हमले को एक युद्ध अपराध और अंतर्राष्ट्रीय कानून का स्पष्ट उल्लंघन बताया।
भारत में इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान के दूतावास के ऑफिशियल एक्स अकाउंट पर साझा की गई जानकारी में बताया गया कि ईरान के मशहद हवाई अड्डे पर अमेरिकी हमले में एक विमान को निशाना बनाया गया, जो मानवीय मिशन के तहत दवा लेकर जा रहा था।
ईरान के नागरिक उड्डयन संगठन ने विमान पर हुए अमेरिकी हमले की कड़ी निंदा की। यह विमान कई देशों से दवाएं और चिकित्सा उपकरण लेकर निकला था और ईरान के मशहद हवाई अड्डे पर उतरा था। संगठन के बयान में कहा गया कि मानवीय मिशनों में लगे नागरिक विमानों को निशाना बनाना अंतर्राष्ट्रीय विमानन नियमों का घोर उल्लंघन है और मानवीय कानून के सिद्धांतों के विपरीत है।
संगठन ने कहा कि शिकागो कन्वेंशन (1944) और मॉन्ट्रियल कन्वेंशन (1971) के अनुसार, नागरिक विमानों की सुरक्षा के खिलाफ कोई भी कार्य विमानन के क्षेत्र में एक अंतर्राष्ट्रीय आपराधिक कृत्य माना जाता है।
इसके अलावा जिनेवा कन्वेंशन के अतिरिक्त प्रोटोकॉल I के अनुच्छेद 52 के तहत, नागरिक वस्तुओं पर हमले युद्ध अपराध माने जाते हैं।
नागरिक उड्डयन संगठन ने अंतर्राष्ट्रीय निकायों से आग्रह किया कि वे इस कृत्य पर तत्काल ध्यान दें। इसके लिए जिम्मेदार लोगों पर मुकदमा चलाएं और नागरिक उड्डयन के खिलाफ इस तरह के खतरों की पुनरावृत्ति को रोकें।
दूसरी ओर अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने मंगलवार को दावा किया कि वो बूट्स ऑन द ग्राउंड के लिए तैयार हैं और संघर्ष उनकी शर्तों पर ही खत्म होगा। अगर संवाद से बात नहीं बनेगी तो बम के जरिए बातचीत को अंजाम दिया जाएगा।
--आईएएनएस
एवाई/एबीएम
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