छांगयिंग-8 बड़े परिवहन ड्रोन की पहली उड़ान पूरी
बीजिंग, 31 मार्च (आईएएनएस)। चीन के पहले सात टन स्तरीय बड़े परिवहन ड्रोन छांगयिंग-8 ने मंगलवार को हनान प्रांत के चंगचो शहर में अपनी पहली उड़ान पूरी की।
बताया जाता है कि छांगयिंग-8 बड़े परिवहन ड्रोन का अनुसंधान चाइना नॉर्थ इंडस्ट्रीज ग्रुप ने खुद किया। परिवहन ड्रोन की लंबाई 17 मीटर है और पंखों का फैलाव 25 मीटर है। 18 घन मीटर के सुपर बड़े कार्गो होल्ड में कई तरह के मानक वायु कंटेनर और पेशेवर कोल्ड चेन स्टोरेज कंटेनर रखे जा सकते हैं। 15 मिनट में सभी की लोडिंग और अनलोडिंग पूरी हो सकती है, जिससे रसद कारोबार की क्षमता काफी हद तक उन्नत होगी।
छांगयिंग-8 का टेकऑफ वजन 7 टन तक पहुंचा और भार क्षमता 3.5 टन है। इसकी अधिकतम यात्रा सीमा 3,000 किलोमीटर से अधिक है। अलग-अलग स्थितियों का अनुकूलन करने के लिए छांगयिंग-8 पठार पर और कम से कम 200 मीटर की छोटी दूरी पर टेकऑफ और लैंडिंग कर सकता है।
भविष्य में छांगयिंग-8 का प्रयोग ई-कॉमर्स लॉजिस्टिक्स, पठार व द्वीपीय क्षेत्रों में जीवन तथा बुनियादी संस्थापनों से जुड़ी सामग्री की आपूर्ति, आपातकालीन बचाव और बाढ़ नियंत्रण व आपदा राहत आदि में किया जाएगा।
(साभार- चाइना मीडिया ग्रुप, पेइचिंग)
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डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.
काइनेटिका-2 वाई1 वाहक रॉकेट का उड़ान परीक्षण सफल रहा
बीजिंग, 31 मार्च (आईएएनएस)। पेइचिंग समयानुसार 30 मार्च को शाम 7 बजे, काइनेटिका-2 वाई1 वाहक रॉकेट को चीन के डोंगफंग वाणिज्यिक अंतरिक्ष नवाचार पायलट क्षेत्र से लॉन्च किया गया, जो चीनी उद्यम सीएएस अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी कंपनी द्वारा स्वतंत्र रूप से अनुसंधित व विकसित मध्यम आकार का एक रॉकेट है।
चीन ने इस रॉकेट का इस्तेमाल कर न्यू मार्च-1 उपग्रह, न्यू मार्च-2 उपग्रह और टीएस-01 उपग्रह आदि 3 उपग्रहों का प्रक्षेपण किया गया। इन तीनों उपग्रहों ने अपनी नियोजित कक्षाओं में सफलतापूर्वक प्रवेश किया, जो एक पूर्ण सफलता का प्रतीक है। यह काइनेटिका-2 वाहक रॉकेट की पहली उड़ान है।
बताया जाता है कि काइनेटिका-1 रॉकेट के पहले स्टेज में सिर्फ एक इंजन है, जबकि काइनेटिका-2 रॉकेट के पहले स्टेज में नौ इंजन हैं। काइनेटिका-2 रॉकेट का लिफ्ट ऑफ वजन 625 टन है, जो कुल 8 टन वजन वाले अंतरिक्ष यान को 500 किलोमीटर की ऊंचाई पर एक विशिष्ट सूर्य-समकालिक कक्षा में ले जा सकता है और 12 टन वजन वाले अंतरिक्ष यान को 200 किलोमीटर की ऊंचाई पर निम्न-पृथ्वी कक्षा में ले जा सकता है।
साथ ही, काइनेटिका-2 रॉकेट एक मॉड्यूलर और यूनिवर्सल डिजाइन अवधारणा अपनाता है। इससे इस रॉकेट का संयोजन व वियोजन बिल्डिंग ब्लॉक्स जितना ही कुशल व लचीला बनता है, जिसका उत्पादन व प्रक्षेपण ज्यादा सुविधाजनक बनेगा। इसके अलावा, भविष्य में काइनेटिका-2 रॉकेट में दोबारा इस्तेमाल करने की क्षमता भी होगी, जिससे प्रक्षेपण की लागत और कम हो जाएगी।
(साभार- चाइना मीडिया ग्रुप, पेइचिंग)
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