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मध्य पूर्व में तनाव का असर! अमेरिका और यूएई में 72 प्रतिशत तक बढ़े पेट्रोल-डीजल के दाम

नई दिल्ली, 31 मार्च (आईएएनएस)। मध्य पूर्व में तनाव का असर पूरी दुनिया में देखा जा रहा है। इससे अमेरिका से लेकर खाड़ी देश यूएई में पेट्रोल-डीजल की कीमत में 72 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी देखी गई है।

अमेरिका में गैसोलीन (पेट्रोल) की कीमतें बढ़कर 4 डॉलर (भारतीय रुपए में करीब 380 रुपए) प्रति गैलन (1 गैलन =3.8 लीटर) से अधिक हो गई हैं यह बीते तीन वर्षों में पहला मौका है, जब गैसोलीन के दाम इस स्तर के पार निकल गए हैं।

अमेरिकी मीडिया के मुताबिक, पूरे देश में गैसोलीन की औसत कीमत बढ़कर 4.018 डॉलर प्रति गैलन हो गई है। अमेरिका-इजरायल द्वारा ईरान पर हमला करने के बाद से गैसोलीन की कीमतों में 30 प्रतिशत से ज्यादा की वृद्धि हो चुकी है।

अमेरिका में डीजल की कीमतों में भी बढ़ोतरी देखी गई है और दाम 5 डॉलर प्रति गैलन ( करीब 475 रुपए प्रति गैलन) के पार निकल गया है। मध्य पूर्व में तनाव शुरू होने के बाद से कीमतों में 40 प्रतिशत से ज्यादा की बढ़ोतरी देखी गई है।

खाड़ी के देशों में पेट्रोल-डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी देखी जा रही है।

यूनाइटेड अरब अमीरात (यूएई) की फ्यूल प्राइस कमेटी ने कीमतों में वृद्धि का ऐलान किया है। यह बढ़ोतरी एक अप्रैल से लागू होगी।

नई कीमतों के मुताबिक, सुपर 98 पेट्रोल की कीमत लगभग 30 प्रतिशत बढ़कर 3.39 दिरहम प्रति लीटर (भारतीय रुपए में करीब 87 रुपए प्रति लीटर) हो गई है, जो कि पहले 2.59 दिरहम प्रति लीटर थी।

स्पेशल 95 पेट्रोल का दाम लगभग 32 प्रतिशत बढ़कर 3.28 दिरहम प्रति लीटर हो गया है, जो कि पहले 2.48 दिरहम प्रति लीटर था।

यूएई में डीजल की कीमतों में रिकॉर्ड बढ़ोतरी देखी गई है और यह 72 प्रतिशत बढ़कर 4.69 दिरहम प्रति लीटर (करीब 120 रुपए प्रति लीटर) पर पहुंच गई हैं, जो कि पहले 2.72 दिरहम प्रति लीटर पर थी।

अमेरिका, इजरायल और ईरान युद्ध के कारण कच्चे तेल की कीमत में जबरदस्त तेजी देखने को मिली है। बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड का दाम एक महीने में 48 प्रतिशत बढ़ा है और फिलहाल 107.28 डॉलर प्रति बैरल पर है।

--आईएएनएस

एबीएस/

डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.

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होर्मुज स्ट्रेट नहीं खुला तो भी ट्रंप ईरान के साथ युद्ध खत्म करने को तैयार हैं: अमेरिकी मीडिया

वाशिंगटन, 31 मार्च (आईएएनएस)। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के साथ संघर्ष रोकने के लिए हामी भरी है। द वॉल स्ट्रीट जर्नल ने ट्रंप सरकार के अधिकारियों के हवाले से बताया कि राष्ट्रपति ने अपने साथियों से कहा है कि वह ईरान के साथ अमेरिका-इजरायल युद्ध खत्म करने को तैयार हैं, भले ही होर्मुज स्ट्रेट काफी हद तक बंद रहे।

रिपोर्ट में कहा गया है कि ट्रंप और उनके सहयोगियों का मानना है कि दुनिया के लिए ज़रूरी तेल सप्लाई वाले समुद्री रास्ते को खोलने की कोशिश से ईरान के साथ जंग लंबी खिंच सकती है। ट्रंप ने इस जंग को खत्म करने के लिए 4 से 6 हफ्ते का समय तय किया था, लेकिन इस मिशन की वजह से जंग इस समय से ज़्यादा आगे बढ़ सकती है।

न्यूज एजेंसी सिन्हुआ ने अधिकारियों के हवाले से बताया कि ट्रंप ने फैसला किया कि अमेरिका को ईरान की नेवी और मिसाइल स्टॉक को कमजोर करने के अपने मुख्य मकसद को पाने पर ध्यान देना चाहिए। तेहरान पर स्ट्रेट के जरिए ट्रेड के फ्री फ्लो को फिर से शुरू करने के लिए डिप्लोमैटिक दबाव डालना चाहिए।

इस बीच अमेरिकी राष्ट्रपति ने फैसला लिया है कि अगर ये सभी कोशिशें नाकाम हो जाती हैं, तो व्हाइट हाउस यूरोपीय और गल्फ सहयोगियों पर इसे फिर से खोलने में आगे आने के लिए दबाव डालेगा।

अधिकारियों ने आगे कहा कि सैन्य विकल्प अभी भी टेबल पर हैं, लेकिन वे राष्ट्रपि ट्रंप की तुरंत की प्राथमिकता नहीं हैं। हालांकि, इन आकलन के बावजूद, ईरान के साथ संघर्ष को लेकर ट्रंप का पब्लिक मैसेज एक जैसा नहीं रहा है। सोमवार सुबह, उन्होंने धमकी दी कि अगर जल्दी डील नहीं हुई तो वह ईरान के सभी इलेक्ट्रिक प्लांट, तेल के कुओं और खार्ग आइलैंड को पूरी तरह से खत्म कर देंगे।

इस बीच, सरकार ने इस इलाके में अमेरिकी सेना की मौजूदगी को मजबूत करने के लिए कदम उठाए हैं। पिछले हफ्ते यूएसएस त्रिपोली और 31वीं मरीन एक्सपेडिशनरी यूनिट इस इलाके में दाखिल हुई और 82वीं एयरबोर्न डिवीजन के कुछ हिस्से भी पहुंचने लगे हैं।

द वॉल स्ट्रीट जर्नल के मुताबिक, 10,000 और जमीनी सैनिकों की तैनाती पर भी विचार किया जा रहा है। ट्रंप ईरान के यूरेनियम संवर्धन पर कब्जा करने के लिए एक मुश्किल मिशन के बारे में भी सोच रहे हैं।

व्हाइट हाउस की प्रेस सेक्रेटरी कैरोलिन लेविट ने सोमवार को कहा कि अमेरिका स्ट्रेट के जरिए नॉर्मल शिपिंग को फिर से शुरू करने की दिशा में काम कर रहा है, हालांकि इसे फिर से खोलना सरकार के मुख्य सैन्य मकसदों में शामिल नहीं है। ट्रंप का मुख्य मकसद ईरान की नौसेना, मिसाइल प्रोग्राम, रक्षा उद्योग और न्यूक्लियर इंफ्रास्ट्रक्चर को टारगेट करने पर केंद्रित है।

--आईएएनएस

केके/एएस

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