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West Bengal Elections 2026: बीजेपी ने जारी की 13 उम्मीदवारों की चौथी लिस्ट, मैनागुड़ी में उम्मीदवार बदला

भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने मंगलवार को पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के लिए अपने 13 उम्मीदवारों की चौथी सूची जारी की, जिसमें उत्तर 24 परगना जिले की बागदा सीट से केंद्रीय राज्य मंत्री शांतनु ठाकुर की पत्नी सोमा ठाकुर का नाम भी शामिल है। इसके साथ ही, भाजपा ने पश्चिम बंगाल चुनावों के लिए 287 उम्मीदवारों के नाम घोषित कर दिए हैं, जिनके लिए मतदान दो चरणों में होगा। पार्टी ने मैनागुड़ी निर्वाचन क्षेत्र में भी अपना उम्मीदवार बदल दिया है और कौशिक रॉय के स्थान पर दलीम रॉय को मैदान में उतारा है। पार्टी ने हावड़ा दक्षिण से श्यामलाल हाटी, नटबारी से गिरिजा शंकर रॉय और सीताई से आशुतोष बर्मा को उम्मीदवार बनाया है। उत्तम कुमार बनिक मगराहट पुरबा से, देबांशु पांडा फाल्टा से, देबाशीष धर सोनारपुर उत्तर से और रंजन कुमार पॉल पंचला से चुनाव लड़ेंगे। इसके अतिरिक्त, संतोष पाठक, जिन्होंने हाल ही में कांग्रेस छोड़कर भाजपा में शामिल हुए हैं, को पार्टी ने कोलकाता के चौरंगी विधानसभा क्षेत्र से उम्मीदवार बनाया है।

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उम्मीदवारों की पूरी सूची 

1. सिताई (एससी) आशुतोष बर्मा
2. नटबारी गिरिजा शंकर रॉय
3. बागदा (एससी) सोमा ठाकुर
4. मगराहाट पुरबा (एससी) उत्तम कुमार बनिक
5. फाल्टा देबांगशु पांडा
6. सोनारपुर उत्तर देबाशीष धार 
7. चौरंगी संतोष पाठक
8. हावड़ा दक्षिण श्यामल हाटी 
9. पांचला राजन कुमार पॉल 
10. चांदीपुर पीयूष कांति दास
11. गरबेटा प्रदीप लोढ़ा
12. मेमारी मानव गुहा 
13. बाराबनी अरिजीत रॉय
14. मयनागुरी दलीम रॉय 

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पश्चिम बंगाल चुनाव 2026

पश्चिम बंगाल में दो चरणों में 23 और 29 अप्रैल को मतदान होगा और परिणाम 4 मई को घोषित किए जाएंगे। पश्चिम बंगाल की 294 सीटों वाली विधानसभा में 2011 से ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के बीच कड़ा मुकाबला देखने को मिलेगा। पहले चरण में पुरुलिया, बांकुरा, झाड़ग्राम, बीरभूम, पूर्वी और पश्चिमी मिदनापुर, जलपाईगुड़ी, मालदा, मुर्शिदाबाद, उत्तरी और दक्षिणी दिनाजपुर, पश्चिमी बर्धमान, दार्जिलिंग, कूचबिहार, अलीपुरद्वार और कालिम्पोंग में मतदान होगा। दूसरे चरण में पूर्वी बर्धमान, नादिया, उत्तरी और दक्षिणी 24 परगना, हावड़ा, हुगली और कोलकाता में मतदान होगा।

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चेहरे के अनचाहे बाल होंगे गायब, बस इस देसी नुस्खे का राज जान लें, चमक उठेगी स्किन

Natural Facial Hair Removal: चेहरे के अनचाहे बाल हर किसी को परेशान करते हैं। पार्लर जाना या महंगे प्रोडक्ट्स इस्तेमाल करना हर बार मुमकिन नहीं होता। ऐसे में अगर कोई आसान, सस्ता और नेचुरल तरीका मिल जाए, जिससे घर बैठे बाल हटाएं जा सकें, तो इससे बेहतर क्या हो सकता है? डॉक्टर संजीव गुलाटी (डर्मेटोलॉजिस्ट, […]

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  Sports

उत्तराखंड की बेटी ने जापान में जीता ब्रॉन्ज मेडल:फटे जूतों की कहानी सुन क्रिकेटर स्नेह राणा ने दिए नए स्पाइक्स, बोलीं- हमेशा साथ निभाऊंगी

रुड़की के एक छोटे से गांव की रहने वाली एथलीट सोनिया ने जापान के फुकुओका में हुई 18वीं एशियन क्रॉस कंट्री चैंपियनशिप में ब्रॉन्ज मेडल जीतकर देश का नाम रोशन किया है। बेहद साधारण परिवार से आने वाली सोनिया का यह सफर संघर्षों से भरा रहा, जहां संसाधनों की कमी हर कदम पर चुनौती बनकर सामने आई। बीते दिन इस संघर्ष और उपलब्धि की कहानी जब भारतीय महिला क्रिकेट टीम की स्टार ऑलराउंडर स्नेह राणा तक पहुंची, तो उन्होंने सोनिया को देहरादून स्थित अपने स्पोर्ट्स स्ट्राइव टर्फ पर बुलाया। यहां उन्होंने सोनिया को प्रोफेशनल स्पोर्ट्स शूज और बेहतर न्यूट्रिशन सपोर्ट देकर न सिर्फ मदद की, बल्कि ताउम्र साथ निभाने का भरोसा भी दिया। सोनिया के लिए यह पल भावुक कर देने वाला था। फटे जूतों में दौड़कर मेडल जीतने वाली यह एथलीट जब नए स्पाइक्स हाथ में लिए खड़ी थी, तो उसकी आंखों में सिर्फ आंसू ही नहीं, बल्कि आगे बढ़ने का नया आत्मविश्वास भी साफ दिखाई दे रहा था। टर्फ पर मिला साथ, भावुक हो गई सोनिया देहरादून के सिनोला स्थित टर्फ पर जब सोनिया पहुंचीं, तो उन्हें शायद अंदाजा भी नहीं था कि उनके लिए क्या इंतजार कर रहा है। स्नेह राणा ने उन्हें गले लगाया, हालचाल पूछा और फिर उन्हें प्रोफेशनल स्पोर्ट्स शूज और न्यूट्रिशन सपोर्ट सौंपा। यह वही चीजें थीं, जिनकी कमी सोनिया को सालों से महसूस होती रही थी। जैसे ही उन्होंने नए जूते हाथ में लिए, उनकी आंखें भर आईं। बातचीत के दौरान वह खुद को संभाल नहीं पाईं। परिवार की हालत कमजोर, बहनों ने निभाया मां का रोल सोनिया का संघर्ष सिर्फ मैदान तक सीमित नहीं था। उनका पूरा बचपन आर्थिक तंगी में बीता। परिवार में चार बहनें और एक भाई हैं। पिता मजदूरी करके घर चलाते हैं और मां का निधन हो चुका है। ऐसे हालात में खेल को करियर बनाना आसान नहीं था। सोनिया बताती हैं कि कई बार ऐसा वक्त आया जब ट्रेनिंग छोड़ने का मन हुआ, लेकिन उनकी बहनों ने उन्हें कभी टूटने नहीं दिया। उन्होंने मां की कमी पूरी की, हिम्मत दी और हर मुश्किल में साथ खड़ी रहीं। यही वजह रही कि सोनिया ने हालातों के आगे घुटने नहीं टेके और अपने सपनों को जिंदा रखा। गांव के ताने, लेकिन इरादे रहे मजबूत सोनिया के सफर में सिर्फ आर्थिक परेशानियां ही नहीं, बल्कि सामाजिक दबाव भी बड़ी चुनौती रहा। गांव के लोग अक्सर ताने मारते थे और परिवार से कहते थे कि लड़की को वापस बुला लो। लेकिन सोनिया ने इन बातों को कभी अपने ऊपर हावी नहीं होने दिया। वह कहती हैं कि उन्होंने हमेशा खुद को अंदर से मजबूत रखा और लोगों को जवाब देने के बजाय अपनी मेहनत से साबित करने का रास्ता चुना।। फटे जूतों में जीता नेशनल मेडल सोनिया की असली पहचान 2025 में हुए राष्ट्रीय खेल 2025 के दौरान बनी। 10,000 मीटर की दौड़ में उन्होंने ब्रॉन्ज मेडल जीता, लेकिन इस जीत की सबसे बड़ी बात यह थी कि उनके पास दौड़ने के लिए सही स्पाइक्स तक नहीं थे। वह फटे जूतों में ट्रैक पर उतरीं और 35 मिनट 45.19 सेकंड का समय निकालकर पदक अपने नाम किया। यह सिर्फ एक जीत नहीं थी, बल्कि उनके संघर्ष और जज्बे की सबसे बड़ी मिसाल थी। इसी दौरान उन्होंने बताया था कि एक एथलीट के लिए सही डाइट लेना कितना मुश्किल होता है। महंगे सप्लीमेंट्स तो दूर, वह सस्ते मल्टी-विटामिन के सहारे ही अपनी तैयारी कर रही थीं। न्यूट्रिशन की कमी, लेकिन हिम्मत नहीं टूटी सोनिया ने कभी भी प्रोफेशनल लेवल का न्यूट्रिशन नहीं लिया। वह बताती हैं कि उन्होंने आज तक कोई महंगा सप्लीमेंट नहीं खरीदा। ऑनलाइन सस्ते मल्टी-विटामिन खरीदकर ही उन्होंने अपनी ट्रेनिंग जारी रखी। कई बार शरीर साथ नहीं देता था, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। अब स्नेह राणा के सपोर्ट के बाद उन्हें उम्मीद है कि वह अपनी ट्रेनिंग को और बेहतर बना पाएंगी और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर और अच्छे प्रदर्शन कर सकेंगी। स्नेह राणा बोलीं- मैं भी इसी रास्ते से आई हूं स्नेह राणा ने सोनिया से मुलाकात के दौरान अपने संघर्ष भी साझा किए। उन्होंने बताया कि वह भी एक छोटे गांव से आई हैं, जहां महिला क्रिकेट को लेकर जागरूकता नहीं थी। लोगों के ताने, संसाधनों की कमी और सामाजिक सोच- इन सभी का सामना उन्होंने भी किया है। उन्होंने कहा कि जब लोग कहते थे कि तुम यह नहीं कर सकती, तो वह और ज्यादा जिद्दी हो जाती थीं। यही जिद उन्हें यहां तक लेकर आई। अब एशियन गेम्स पर नजर जापान में ब्रॉन्ज जीतने के बाद सोनिया का आत्मविश्वास काफी बढ़ गया है। अब उनका अगला लक्ष्य एशियन गेम्स के लिए क्वालीफाई करना है। स्नेह राणा के सपोर्ट से उन्हें नई ऊर्जा मिली है। बेहतर जूते, सही न्यूट्रिशन और मानसिक सहयोग- ये तीनों चीजें अब उनके पास हैं, जो किसी भी एथलीट के लिए बेहद जरूरी होती हैं। सोनिया की कहानी आज उन हजारों लड़कियों के लिए प्रेरणा है, जो संसाधनों की कमी के कारण अपने सपनों को अधूरा छोड़ देती हैं। Fri, 03 Apr 2026 00:00:32

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