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अमेरिकी विधेयक के जरिए अवैध प्रवासियों के वाणिज्यिक ड्राइविंग लाइसेंस के उपयोग पर साधा निशाना

वॉशिंगटन, 31 मार्च (आईएएनएस)। रिपब्लिकन सीनेटरों के एक समूह ने नया विधेयक पेश किया है, जिसका उद्देश्य अवैध प्रवासियों को कमर्शियल ड्राइविंग लाइसेंस (सीडीएल) प्राप्त करने या उसका उपयोग करने से रोकना है। इस प्रस्ताव में ऐसे लाइसेंस जारी करने वाले ड्राइवरों और राज्यों के लिए कड़े दंड का प्रावधान किया गया है।

इस विधेयक का नाम “दलिलाह्स लॉ एक्ट” है, को शेली मोरे कैपिटो, जॉन कार्निन, टेड बड, सिंथिया लूमिस और टॉमी टूबरविले ने पेश किया है। इसका उद्देश्य संघीय निगरानी को सख्त करना और बिना दस्तावेज़ वाले प्रवासियों द्वारा CDL जारी करने और उसके उपयोग से जुड़े मामलों में आपराधिक और दीवानी दंड लागू करना है।

कैपिटो ने कहा, “दलिलाह्स लॉ एक्ट का मकसद अमेरिकी परिवारों की सुरक्षा करना और हमारी सड़कों पर सभी की सुरक्षा सुनिश्चित करना है और मैं इस मुद्दे पर सीनेटर कॉर्निन की प्रतिबद्धता की सराहना करती हूं। कमर्शियल ड्राइवरों पर बहुत बड़ी जिम्मेदारी होती है और वाहन चलाने वालों के लिए स्पष्ट और समान मानक होने चाहिए।”

उन्होंने कहा कि यह कानून “खतरनाक खामियों को बंद करेगा और इस सिद्धांत को मजबूत करेगा कि कानून का पालन और सार्वजनिक सुरक्षा हमेशा प्राथमिकता होनी चाहिए।”

कॉर्निन ने इस विधेयक को सीमा पर नीतिगत विफलताओं की प्रतिक्रिया बताया। उन्होंने कहा, “यह बेहद दुखद है कि दलिलाह कोलमैन जैसे निर्दोष अमेरिकी नागरिकों को डेमोक्रेट्स की ओपन-बॉर्डर नीतियों की कीमत चुकानी पड़ रही है,” और आरोप लगाया कि बिना दस्तावेज़ वाले ड्राइवर हमारी सड़कों पर बड़े कमर्शियल वाहनों को खतरनाक तरीके से चला रहे हैं।

उन्होंने कहा, “हमारा विधेयक राष्ट्रपति ट्रंप के स्टेट ऑफ द यूनियन संबोधन पर आगे बढ़ते हुए इस आकर्षण को खत्म करेगा और अवैध प्रवासी ड्राइवरों तथा उन्हें सक्षम बनाने वाले राज्यों को जवाबदेह ठहराएगा।”

यह कानून कई उपायों का प्रस्ताव करता है। इनमें अंतरराज्यीय व्यापार में सीडीएल का उपयोग करने वाले बिना दस्तावेज़ व्यक्तियों के लिए नए आपराधिक दंड और ऐसे ड्राइवरों से जुड़े दुर्घटनाओं के लिए अनिवार्य न्यूनतम सजा शामिल है। साथ ही, यदि किसी दुर्घटना में मौत होती है, तो मृत्युदंड के लिए इसे एक गंभीर कारक के रूप में शामिल करने का प्रस्ताव भी है।

विधेयक में आप्रवासन से जुड़े कड़े प्रावधान भी शामिल हैं, जैसे “एग्रेवेटेड फेलॉन” के रूप में वर्गीकरण, जिससे अनिवार्य हिरासत और निर्वासन की प्रक्रिया शुरू हो सकती है। इसके अलावा, सीडीएल के लिए आवेदन करने वालों को ई-वेरीफाई या समान प्रणाली के माध्यम से रोजगार पात्रता का प्रमाण देना होगा।

राज्यों को सत्यापन रिकॉर्ड बनाए रखने और आवश्यकता पड़ने पर परिवहन विभाग को सौंपने की बाध्यता होगी। साथ ही, यदि राज्य अधिकारी सीडीएल जारी करने से पहले आप्रवासन स्थिति की जांच करने में विफल रहते हैं, तो उनके लिए भी आपराधिक दंड का प्रावधान किया गया है।

सीनेटर बड ने कैलिफोर्निया में हाल ही में हुई एक दुर्घटना का हवाला देते हुए कहा, “एक पांच साल की बच्ची गंभीर चोटों के साथ जी रही है क्योंकि एक अवैध प्रवासी ने लापरवाही से 80,000 पाउंड का कमर्शियल वाहन चलाया, जिसे कैलिफोर्निया राज्य द्वारा सीडीएल जारी किया गया था। यह दोबारा नहीं होना चाहिए।”

लुमिस ने सार्वजनिक सुरक्षा पर जोर देते हुए कहा, “हर अमेरिकी जो 80,000 पाउंड के ट्रक के साथ सड़क साझा करता है, उसे यह जानने का अधिकार है कि चालक ने वह लाइसेंस कानूनी रूप से प्राप्त किया है।” उन्होंने जोड़ा कि बिना दस्तावेज़ वाले व्यक्तियों को लाइसेंस जारी करना “जनता के विश्वास के साथ धोखा” है।

--आईएएनएस

पीएम

डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.

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अमेरिका कुछ हफ्तों में ईरान ऑपरेशन कर देगा खत्म: मार्को रुबियो

वाशिंगटन, 30 मार्च (आईएएनएस)। अमेरिकी सरकार की तरह से बार-बार इस बात को दोहराया जा रहा है कि वह लक्ष्य पूरा करने में तय समय से आगे चल रहे हैं और जल्द ही खत्म कर देंगे। अब अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने कहा कि अमेरिका को उम्मीद है कि वह ईरान के खिलाफ अपनी सैन्य कार्रवाई का लक्ष्य महीनों में नहीं, बल्कि हफ्तों में पूरा कर लेगा।

इस बीच अमेरिकी विदेश सचिव ने लड़ाई खत्म करने के लिए वाशिंगटन की शर्तें बताईं और तेहरान को होर्मुज स्ट्रेट पर कंट्रोल करने की कोशिश के खिलाफ चेतावनी दी।

स्थानीय समयानुसार, सोमवार को अल जजीरा को दिए एक इंटरव्यू में रुबियो ने कहा कि सैन्य ऑपरेशन जारी रहने के बावजूद, “ईरान और अमेरिका के अंदर कुछ लोगों के बीच खासकर बिचौलियों के जरिए मैसेज और कुछ सीधी बातचीत चल रही थी।”

उन्होंने जोर देकर कहा कि वॉशिंगटन की मुख्य मांगें वैसी ही हैं, “ईरानी सरकार के पास कभी भी न्यूक्लियर हथियार नहीं हो सकते और उन्हें आतंकवाद को स्पॉन्सर करना बंद करना होगा और उन्हें ऐसे हथियार बनाना बंद करना होगा जो उनके पड़ोसियों के लिए खतरा बन सकते हैं।”

रुबियो ने कहा कि अमेरिकी सेना अपने बताए गए मकसद को पाने में बहुत आगे या तय समय से आगे है, जिसमें ईरान की एयर फोर्स और नेवी को खत्म करना और “उनके पास मौजूद मिसाइल लॉन्चर की संख्या में काफी कमी शामिल है।

उन्होंने कहा, “हम ये मकसद, हफ्तों में हासिल कर लेंगे, महीनों में नहीं।” उन्होंने साफ किया कि होर्मुज स्ट्रेट पर कंट्रोल करने की ईरान की कोई भी कोशिश मंजूर नहीं होगी। दुनिया का कोई भी देश इसे स्वीकार नहीं कर सकता है।

रुबियो ने चेतावनी दी कि ऐसा कदम दूसरे देशों के लिए अंतरराष्ट्रीय जलमार्ग पर दावा करने का एक उदाहरण बनेगा। रुबियो ने आगे कहा, “अमेरिका यह शर्त नहीं मानेगा। वे जो मांग रहे हैं, वह एक गैर-कानूनी शर्त है। ऐसा बिल्कुल नहीं होने वाला है।”

उन्होंने कहा कि स्ट्रेट किसी न किसी तरह से खुला रहेगा, या तो ईरान के अंतरराष्ट्रीय कानून मानने से या देशों के एक साथ आकर कार्रवाई करने से।

रुबियो ने ईरान पर पूरे इलाके में आवासीय और आर्थिक इंफ्रास्ट्रक्चर को टारगेट करने का भी आरोप लगाया। उन्होंने कहा, उन्होंने दूतावास, डिप्लोमैटिक फैसिलिटी, एयरपोर्ट, एनर्जी इंफ्रास्ट्रक्चर पर हमला किया है।

ईरान को 10 सालों में सबसे कमजोर बताते हुए, उन्होंने कहा कि भविष्य में बड़े खतरों को रोकने के लिए अभी उसकी सैन्य क्षमताओं को कम करना जरूरी है।

डिप्लोमेसी को लेकर रुबियो ने कहा कि तेहरान को न्यूक्लियर हथियार रखने की किसी भी इच्छा को खत्म करने की दिशा में ठोस कदम उठाने और मिसाइल और ड्रोन प्रोग्राम छोड़ने की जरूरत होगी।

उन्होंने कहा, अगर ईरान ऐसा करता है, तो देश का भविष्य अच्छा हो सकता है। दशकों से उस देश की सरकार ने इस रास्ते को नहीं अपनाया है।

इस दौरान रुबियो ने ऑपरेशन के दौरान एयरस्पेस और बेस एक्सेस न देने का जिक्र करते हुए कुछ नाटो सहयोगियों से भी निराशा जताई और कहा, “अगर नाटो का मकसद सिर्फ यूरोप की रक्षा करना है, लेकिन फिर जब हमें जरूरत हो तो हमें बुनियादी अधिकार देने से मना करना, तो यह बहुत अच्छा इंतजाम नहीं है। इन संबंधों को फिर से देखना होगा।”

रुबियो ने कहा कि अमेरिका के मकसद में ईरान में शासन बदलना शामिल नहीं था। हालांकि अमेरिकी विदेश मंत्री ने इस बात को माना कि अगर ईरान के नेतृत्व में बदलाव होता है तो वाशिंगटन इसका विरोध नहीं करेगा। उन्होंने कहा, “इस ऑपरेशन का मकसद यह नहीं था।”

--आईएएनएस

केके/एएस

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