फूल, गुब्बारे और 'LOVE YOU' बोर्ड..: ट्रेन में दिखा अनोखा नजारा, जानिए वायरल वीडियो की पूरी कहानी
क्या आपने कभी चलती ट्रेन के अंदर किसी होटल के हनीमून सूट जैसी सजावट देखी है? सोशल मीडिया पर वायरल एक वीडियो में फर्स्ट एसी ट्रेन कूपे को फूलों, गुब्बारों, फेयरी लाइट्स और गुलाब की पंखुड़ियों से इस तरह सजाया गया कि लोग देखते ही रह गए। वीडियो सामने आते ही इंटरनेट पर प्रतिक्रियाओं की बाढ़ आ गई और कई यूजर्स ने इसे 'पहियों पर हनीमून' का नाम दे दिया।
क्या वाकई हनीमून के लिए सजाया गया था?
वीडियो में दिखाई दे रही सजावट को देखकर अधिकांश सोशल मीडिया यूजर्स इसे नवविवाहित जोड़े का हनीमून कूपे बता रहे हैं। हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। यह भी संभव है कि सजावट किसी सालगिरह, जन्मदिन या खास अवसर के लिए की गई हो।
किस ट्रेन का है वीडियो?
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर शेयर किए गए वीडियो के साथ कुछ यूजर्स ने दावा किया कि यह सजावट राजधानी एक्सप्रेस के फर्स्ट एसी कूपे की है। लेकिन, वायरल क्लिप में ट्रेन का नाम, नंबर या रूट साफ दिखाई नहीं देता। ऐसे में यह दावा नहीं किया जा सकता कि यह किस ट्रेन का फर्स्ट एसी कूपे है।
Honeymoon on Wheels
— ShoneeKapoor (@ShoneeKapoor) July 8, 2026
Indian Railways have started "Honeymoon on Wheels" services on Rajdhani First Class. pic.twitter.com/wi6dZJDvI2
भारतीय रेलवे या आईआरसीटीसी की ओर से भी इसकी कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। इसलिए यह स्पष्ट नहीं है कि वीडियो किस ट्रेन का है और सजावट किस अवसर पर की गई थी।
रेलवे नियम जानिए: क्या ट्रेन के AC कूपे को ऐसे सजाया जा सकता है?
वायरल वीडियो देखने के बाद सबसे बड़ा सवाल यही उठ रहा है कि क्या ट्रेन के फर्स्ट AC कूपे को फूलों, गुब्बारों और रोमांटिक थीम से सजाना रेलवे नियमों के खिलाफ है?
जवाब है- जरूरी नहीं।
दरअसल, फर्स्ट AC कूपे भारतीय रेलवे का सबसे प्राइवेट ट्रैवल स्पेस माना जाता है। इसमें आमतौर पर दो बर्थ वाला बंद केबिन मिलता है, जो यात्रियों के लिए रिजर्व रहता है। ऐसे में कई यात्री जन्मदिन, सालगिरह या खास मौकों पर अपने कूपे को अपनी पसंद के अनुसार सजाते हैं।
सूत्रों के मुताबिक, यदि सजावट से सुरक्षा नियमों का उल्लंघन नहीं होता और रेलवे संपत्ति को नुकसान नहीं पहुंचता, तो रेलवे आमतौर पर इसमें हस्तक्षेप नहीं करता।
हालांकि, ज्वलनशील सामग्री, खुली आग, धुआं पैदा करने वाली वस्तुएं या ऐसी सजावट जिससे अन्य यात्रियों की सुरक्षा प्रभावित हो, परेशानी का कारण बन सकती हैं।
क्या याद रखें?
- फूल, गुब्बारे और हल्की सजावट आमतौर पर विवाद का विषय नहीं बनती।
- फर्स्ट AC कूपे यात्री के निजी उपयोग के लिए आरक्षित होता है।
- रेलवे संपत्ति को नुकसान पहुंचाना नियमों के खिलाफ है।
- खुली मोमबत्ती या आग जैसी चीजें सुरक्षा जोखिम पैदा कर सकती हैं।
यही वजह है कि वायरल वीडियो में दिख रही सजावट को देखकर लोग हैरान जरूर हैं, लेकिन रेलवे नियमों के हिसाब से यह पूरी तरह असंभव या प्रतिबंधित नहीं माना जाता।
फैक्ट्स
क्या First AC Coupe को सजाया जा सकता है?
हां, यदि सुरक्षा और रेलवे संपत्ति को नुकसान न पहुंचे।
क्या रेलवे खुद ऐसी सजावट कराता है?
नहीं, वायरल वीडियो में ऐसा कोई आधिकारिक दावा नहीं है।
क्या यह नियमों का उल्लंघन है?
सामान्य सजावट नहीं, लेकिन सुरक्षा मानकों का पालन जरूरी है।
क्या मोमबत्तियां इस्तेमाल करना सही है?
सुरक्षा के लिहाज से इस पर सवाल उठ सकते हैं।
Fact Check
| सवाल | स्थिति |
| क्या यह हनीमून के लिए सजाया गया था? | आधिकारिक पुष्टि नहीं |
| क्या यह राजधानी एक्सप्रेस है? | सोशल मीडिया दावा, पुष्टि नहीं |
| ट्रेन नंबर/रूट पता चला? | नहीं |
| रेलवे का आधिकारिक बयान? | नहीं |
| वीडियो असली है? | वीडियो वास्तविक दिख रहा है, लेकिन संदर्भ अपुष्ट |
First AC Coupe क्यों है खास?
- केवल 2 बर्थ वाला प्राइवेट केबिन
- अंदर से लॉक होने वाला दरवाजा
- ज्यादा प्राइवेसी
- लंबी दूरी की यात्रा के लिए प्रीमियम विकल्प
- नवविवाहित जोड़ों और परिवारों की पहली पसंद
सोशल मीडिया पर यूजर्स के मजेदार कमेंट्स
- "भाई ने ट्रेन को होटल से भी आगे निकाल दिया"
- "इसे ही कहते हैं Honeymoon Express"
- "IRCTC का नया प्रीमियम पैकेज आ गया क्या?"
- "अब तो ट्रेन में भी बॉलीवुड वाला रोमांस मिलेगा"
- "सजावट शानदार है, लेकिन बाद में सफाई कौन करेगा?"
- "मोमबत्ती देखकर TTE भी डर गया होगा"
- "जिसने भी सजाया है, दिल जीत लिया"
- "ट्रेन कम, चलती-फिरती वेडिंग सूट ज्यादा लग रही है"
For a whole new experience of Honeymoon on wheels, people are compromising on the bed width https://t.co/yRb7qTGKlM
— Prey for Palestine (@AdmGenAladin786) July 8, 2026
कुछ यूजर्स ने इसे 'Honeymoon on Wheels' बताया।
कई लोगों ने सजावट की तारीफ की और कहा कि यह किसी फिल्मी सीन जैसा लग रहा है।
कुछ लोगों ने रेलवे सुरक्षा नियमों और सफाई व्यवस्था को लेकर सवाल भी उठाए।
विश्व पृथ्वी दिवस: एमआईटी-वर्ल्ड पीस यूनिवर्सिटी पुणे में ग्रीन हाइड्रोजन के विकास पर हो रहा शोध, दुबई में कोप 28 सम्मेलन आयोजित
मधुरिमा राजपाल, भोपाल: आज सम्पूर्ण विश्व में ग्लोबल वार्मिंग एक प्रमुख समस्या बन गया है। जिसमें अनुमान लगाया जा रहा है कि औसत वैश्विक तापमान बढ़ेगा, जिससे ग्लेशियर के पिघलने से समुद्र का जलस्तर बढ़ेगा और पृथ्वी पर रेगिस्तानों का विस्तार होगा, जिससे प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रुप से जन-धन हानि होगी। ग्लोबल वार्मिंग की इसी समस्या से निजात पाने के लिए अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर कई शोध और अनुसंधान कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता है। जिसमें संयुक्त राष्ट्र द्वारा जलवायु परिवर्तन पर आयोजित ‘कॉप सम्मेलन’ भी महत्तवपूर्ण स्थान रखता हैं। इस सम्मेलन में दुनिया भर के देशों के प्रतिनिधि जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए नीतियों और कार्रवाइयों पर चर्चा करते हैं। ऐसे ही जलवायु परिवर्तन पर शोध करने में पुणे में स्थित एमआईटी -वर्ल्ड पीस यूनिवर्सिटी ग्रीन हाइड्रोजन के विस्तार पर प्रयासरत है।
गन्ने और गेंदे के फूल से ग्रीन हाइड्रोजन के विकास पर दिया रहा बल
हरिभूमि से बातचीत में एमआईटी में पदस्थ डॉ. भरत काले, एमेरिटस प्रोफेसर और मैटेरियल साइंस [सीओई] के निदेशक ने कहा कि एमआईटी ग्रीन हाइड्रोजन के विकास पर कार्य कर रही है। जिसके अंतर्गत जहां एक ओर गन्ने के बायोमास का उपयोग करके ग्रीन हाइड्रोजन के उत्पादन का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि गन्ने को हाइड्रोजन में बदलने के लिए मीथेन पायरोलिसिस (क्रैकिंग) या थर्मोलिसिस जैसे तरीकों का उपयोग किया जाता है, जो ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन को कम करने में मदद कर सकती है। गन्ने से ग्रीन हाइड्रोजन का उत्पादन कम लागत वाला और टिकाऊ ऊर्जा स्रोत हो सकता है, वहीं हमारी रिसर्च गेंदे के फूल से भी ग्रीन हाइड्रोजन के उत्पादन पर काम चल रहा है।
दुबई में आयोजित कोप 28 सम्मेलन में यूनिवर्सिटी के 15 छात्रों ने लिया भाग
वहीं उन्होंने बताया कि हाल ही में दुबई में आयोजित कॉप 28 सम्मेलन में हमारी यूनिवर्सिटी के एक दल को भाग लेने का मौका मिला। जिसमें डॉ. रत्नदीप आर जोशी के साथ यूनिवर्सिटी के 15 छात्रों के समूह ने डी-काबोर्नाइजेशन और जलवायु परिवर्तन के प्रतिकूल प्रभावों का मुकाबला करने के लिए ब्रांड का काम किया। स्टूडेंट्स ने कार्बन फुटप्रिंट को कम करने और जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए दुनिया भर में सरकारों, संगठनों और उद्योगों द्वारा की गई पहलों के बारे में जानकारी प्राप्त की।
क्यों है ग्रीन हाइड्रोजन महत्तवपूर्ण
ग्रीन हाइड्रोजन पृथ्वी को संरक्षित रखने में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है क्योंकि यह अक्षय ऊर्जा का उपयोग करके बनाया जाता है और कार्बन उत्सर्जन को कम करता है। ग्रीन हाइड्रोजन के उपयोग से विभिन्न उद्योगों और परिवहन क्षेत्रों में कार्बन मुक्त ऊर्जा प्रदान की जा सकती है।
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